बजरंग दल ने लगाया 'धर्म परिवर्तन' का आरोप
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में रविवार को धार्मिक गतिविधियों को लेकर भारी तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। दही कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घटोरी तरगांव में एक घर के भीतर चल रही क्रिस्चियन प्रार्थना सभा को लेकर दक्षिणपंथी संगठन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यहां प्रार्थना की आड़ में भोले-भाले ग्रामीणों का धर्मांतरण कराया जा रहा था। हंगामे की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर तैनात किया गया।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटोरी तरगांव में एक निजी आवास के भीतर पिछले कुछ समय से रविवार को प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। रविवार सुबह जब सभा चल रही थी, तभी बजरंग दल के दर्जनों कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने सभा को बीच में ही रुकवा दिया और आयोजकों पर लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का गंभीर आरोप लगाया। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस हुई, जिससे गांव में सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति पैदा हो गई।
मौके पर पहुँचा प्रशासन, घंटों चली पूछताछ
हंगामे और संभावित हिंसा की सूचना मिलते ही दही कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नायब तहसीलदार और क्षेत्राधिकारी (CO) भी भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने सबसे पहले आक्रोशित बजरंग दल कार्यकर्ताओं को शांत कराया और घर के भीतर मौजूद लोगों को सुरक्षा घेरे में लिया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रार्थना सभा के आयोजकों से उनके दस्तावेजों, सभा के उद्देश्य और वहां मौजूद लोगों की सूची मांगी। एसडीएम सदर ने स्वयं मामले की निगरानी की और स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी भी सूरत में जिले की शांति व्यवस्था भंग नहीं होने देगा।
बजरंग दल का पक्ष: ‘साजिश के तहत हो रहा धर्मांतरण’
बजरंग दल के स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से घटोरी तरगांव और आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। उनका आरोप है कि बाहरी लोग गांव में आकर गरीबी और बीमारी का फायदा उठाते हैं और लोगों को चमत्कार या धन का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
आयोजकों का दावा: ‘आस्था के साथ खिलवाड़ है आरोप’
दूसरी ओर, प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों और आयोजकों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि वे वर्षों से अपनी निजी आस्था के अनुसार प्रार्थना करते आ रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि किसी को भी अपनी मर्जी से प्रार्थना करने का संवैधानिक अधिकार है और वहां कोई जबरदस्ती या प्रलोभन नहीं दिया जा रहा था। आयोजकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डाल रहे हैं और उन्हें भयभीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच के घेरे में प्रार्थना सभा: क्या कहते हैं अधिकारी?
एसडीएम सदर ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “हमें सूचना मिली थी कि घटोरी तरगांव में प्रार्थना सभा के दौरान हंगामा हुआ है। पुलिस और राजस्व टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। फिलहाल मौके से धर्म परिवर्तन से संबंधित कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य (जैसे जबरन धर्मांतरण के दस्तावेज या कैश) नहीं मिले हैं। हालांकि, हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। ग्रामीणों और सभा में मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यदि कोई भी तथ्य कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो संबंधित धाराओं में कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
गांव में पुलिस बल तैनात, अफवाहों पर नजर
रविवार की इस घटना के बाद गांव में अभी भी सन्नाटा और तनाव व्याप्त है। एहतियात के तौर पर गांव के मुख्य चौराहों और प्रार्थना स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कोई भी भ्रामक जानकारी या वीडियो साझा न किया जाए। डिजिटल सेल के जरिए भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर नजर रखी जा रही है।
विश्लेषण: धार्मिक संवेदनशीलता और कानून
उत्तर प्रदेश में धर्म परिवर्तन को लेकर बने नए कानूनों के बाद इस तरह की घटनाएं लगातार सुर्खियों में रहती हैं। उन्नाव की यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक आयोजनों को लेकर कितनी अधिक संवेदनशीलता है। एक ओर जहां कानून किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म के पालन की अनुमति देता है, वहीं ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’ जबरन या लालच देकर कराए गए धर्मांतरण को संज्ञेय अपराध मानता है।
दही कोतवाली पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस सभा के लिए जिला प्रशासन से अनुमति ली गई थी और क्या इसमें शामिल होने वाले लोग स्वेच्छा से वहां आए थे।
निष्कर्ष
फिलहाल, प्रशासन की मुस्तैदी से घटोरी तरगांव में हिंसा टल गई है, लेकिन यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि प्रार्थना और धर्मांतरण के बीच की बारीक रेखा को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है, वह जांच में क्या मोड़ लेता है। पुलिस ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि वे कानून अपने हाथ में न लें।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स की अपील: शांति बनाए रखें और किसी भी सूचना की पुष्टि आधिकारिक सूत्रों से ही करें।
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