15 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ता
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली ‘मनरेगा’ योजना को लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में सियासी पारा चढ़ गया है। शुक्रवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में “मनरेगा बचाओ संग्राम पदयात्रा” का आयोजन किया गया। इस यात्रा के माध्यम से कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गरीब मजदूरों के हक की इस योजना को सोची-समझी साजिश के तहत कमजोर किया जा रहा है। 15 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूर और समर्थक भी शामिल हुए।
सिकंदरपुर सरोसी से शुरू हुआ ‘संग्राम’
पदयात्रा का आगाज जिले के सिकंदरपुर सरोसी क्षेत्र से हुआ। सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा झंडा और ‘मनरेगा बचाओ’ की तख्तियां लेकर एकत्रित होने लगे थे। जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा ने यात्रा को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि उन करोड़ों ग्रामीण परिवारों की है जिनका चूल्हा मनरेगा की मजदूरी से जलता है।
जैसे-जैसे यात्रा जिला मुख्यालय की ओर बढ़ी, रास्ते में पड़ने वाले गांवों के मजदूर भी इसमें जुड़ते गए। नारेबाजी और जोश के बीच कार्यकर्ताओं ने 15 किलोमीटर का सफर तय किया और दोपहर बाद जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां एक विशाल जनसभा के साथ यात्रा का समापन हुआ।
“योजना का स्वरूप बदलने की साजिश”
जनसभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुशवाहा ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आज प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस सड़क पर है। हमें सूचनाएं मिल रही हैं कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को अप्रासंगिक बनाकर इसे किसी नई, कॉरपोरेट-परस्त योजना से बदलने की तैयारी में है। कांग्रेस पार्टी गरीब मजदूरों के पेट पर लात मारने वाली किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी।”
कुशवाहा ने आगे कहा कि भाजपा सरकार लगातार किसानों, नौजवानों और अब मजदूरों के अधिकारों का हनन कर रही है। मनरेगा सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए 100 दिनों के सम्मानजनक रोजगार की कानूनी गारंटी है। अगर इसके बजट में कटौती होती है या इसके स्वरूप में बदलाव किया जाता है, तो ग्रामीण भारत में पलायन और भुखमरी का संकट खड़ा हो जाएगा।
‘संसद से सड़क तक’ लड़ाई का ऐलान
सभा में मौजूद वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि मनरेगा यूपीए सरकार की एक ऐसी उपलब्धि है, जिसने मंदी और कोरोना जैसे संकट काल में भी गांवों को सहारा दिया। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि जिस प्रकार किसानों के एकजुट विरोध के कारण केंद्र सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे, ठीक उसी प्रकार जनदबाव के माध्यम से सरकार को मनरेगा के मुद्दे पर भी झुकना होगा।
नेताओं ने संकल्प लिया कि यह आंदोलन केवल एक दिन की पदयात्रा तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर मजदूरों को जागरूक करेंगे और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष जारी रखेंगे।
जनसैलाब और बढ़ता दबाव
रैली के दौरान ‘मजदूरों को काम दो, मनरेगा का बजट बढ़ाओ’ जैसे नारों से शहर गूंज उठा। जिला मुख्यालय पर हुई सभा में सरकार से स्पष्ट मांग की गई कि मनरेगा को यथावत रखा जाए और ग्रामीण रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन किया जाए।
कार्यक्रम के अंत में संगठन को न्याय पंचायत और ग्राम स्तर तक मजबूत करने का संकल्प लिया गया। नेताओं ने कहा कि आगामी दिनों में इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा यदि सरकार ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया। इस पदयात्रा ने जिले में कांग्रेस की सक्रियता को एक नई ऊर्जा दी है और आने वाले चुनावों से पहले ग्रामीण वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में भी इसे देखा जा रहा है।
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