पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी गणना
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव। भारत की 16वीं जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब धरातल पर उतरने लगी हैं। इसी क्रम में जनपद उन्नाव के कलेक्ट्रेट स्थित पन्नालाल सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति के सदस्यों के लिए एक दिवसीय महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सुशील कुमार गोंड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में आगामी ‘जनगणना 2027’ के प्रथम चरण को सफल बनाने हेतु विस्तृत रणनीति साझा की गई और अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए।
डिजिटल क्रांति: स्मार्टफोन और ऐप से होगी गणना
इस बार की जनगणना इतिहास रचने जा रही है। एडीएम सुशील कुमार गोंड़ ने बताया कि 1872 से चली आ रही जनगणना की श्रृंखला में यह 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी, जो पूरी तरह से ‘डिजिटल मोड’ में आयोजित की जाएगी।
डेटा संकलन की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए प्रगणक (Enumerators) अपने स्मार्टफोन पर एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग CMMS पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार आम जनता को ‘वेब पोर्टल’ के जरिए स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिसका बाद में प्रगणकों द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
दो चरणों में संपन्न होगी प्रक्रिया: कार्यक्रम निर्धारित
प्रशिक्षण के दौरान जनगणना की समय-सारणी को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई। एडीएम ने बताया कि जनगणना का कार्य दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:
- प्रथम चरण (मकान सूचीकरण): यह चरण 22 मई से 20 जून 2026 तक संचालित होगा। इससे पूर्व 7 मई से 21 मई 2026 तक ‘स्व-गणना’ की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान भवनों, जनगणना मकानों और परिवारों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाएगी।
- द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): यह मुख्य चरण 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जिसकी संदर्भ तिथि (Reference Date) 1 मार्च 2027 तय की गई है।
अधिकारियों को सौंपे गए उत्तरदायित्व
जिला जनगणना प्रभारी उमाशंकर (सांख्यिकी अन्वेषक), जो जनगणना कार्य निदेशालय उत्तर प्रदेश से संबद्ध हैं, ने कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाई। उन्होंने चार्ज अधिकारियों (तहसीलदार एवं अधिशासी अधिकारी) को उनके दायित्वों के बारे में विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षण में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:
- डेटा संकलन: मकानों की छत, दीवार और फर्श की निर्माण सामग्री की जानकारी।
- बुनियादी सुविधाएं: परिवार के पास उपलब्ध पेयजल स्रोत, शौचालय की स्थिति और अन्य संपत्तियों का विवरण।
- पोर्टल मैनेजमेंट: प्रगणकों और पर्यवेक्षकों द्वारा डेटा को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने की तकनीकी बारीकियां।
त्रुटिहीन डेटा पर जोर
अपर जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि डेटा की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना राष्ट्र के नियोजन और नीतियों के निर्धारण का आधार होती है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि जिले का एक भी भवन या परिवार गणना से छूटने न पाए। फील्ड ट्रेनर्स को निर्देश दिए गए कि वे प्रगणकों को जमीनी स्तर पर आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए तैयार रखें।
इस बैठक में जिले की सभी तहसीलों के तहसीलदार, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी और सांख्यिकी विभाग के महत्वपूर्ण अधिकारी उपस्थित रहे।
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