ड्रोन तकनीक से 16 एकड़ में हुआ नैनो यूरिया प्लस का छिड़काव
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश का उन्नाव जिला अब पारंपरिक खेती की बेड़ियों को तोड़कर आधुनिकता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। जिले के राजगीर कृषि प्रक्षेत्र में कृषि विभाग और उन्नत वैज्ञानिकों की देखरेख में एक ऐतिहासिक प्रयोग किया गया। यहाँ आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रबी की फसलों पर कुल 16 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में ड्रोन (Drone) के माध्यम से नैनो यूरिया प्लस का सफल छिड़काव किया गया।
यह पहल न केवल समय की बचत करने वाली है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी संकल्प को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो रही है।
16 एकड़ में ड्रोन का ‘हवाई हमला’, घंटों का काम मिनटों में
राजगीर कृषि प्रक्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशेषज्ञों और किसानों ने देखा कि कैसे एक छोटा सा ड्रोन भारी-भरकम काम को पलक झपकते ही अंजाम दे रहा है। आमतौर पर 16 एकड़ खेत में यूरिया का छिड़काव करने के लिए कई मजदूरों और पूरे दिन की मेहनत लगती थी, लेकिन ड्रोन तकनीक की मदद से इसे बेहद कम समय में और बिना किसी बर्बादी के पूरा कर लिया गया।
ड्रोन के माध्यम से किए गए इस छिड़काव की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि नैनो यूरिया की बूंदें फसलों की पत्तियों पर समान रूप से गिरीं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण (Absorption) बेहतर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक यूरिया के मुकाबले नैनो यूरिया प्लस ज्यादा प्रभावशाली है और ड्रोन के जरिए इसका इस्तेमाल मिट्टी की सेहत को भी बरकरार रखता है।
क्या है नैनो यूरिया प्लस और क्यों है यह खास?
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विस्तार से समझाया कि नैनो यूरिया प्लस पारंपरिक दानेदार यूरिया से किस तरह अलग है।
- कम मात्रा, अधिक असर: जहाँ एक बोरी यूरिया का इस्तेमाल होता था, वहां अब नैनो यूरिया की एक छोटी बोतल ही काफी है।
- पर्यावरण अनुकूल: यह मिट्टी और भूजल को प्रदूषित नहीं करता।
- लागत में कमी: भारी बोरे ढोने और मजदूरी के खर्च से किसानों को मुक्ति मिलती है।
- फसल की गुणवत्ता: नैनो यूरिया प्लस के प्रयोग से पौधों का विकास बेहतर होता है और पैदावार की गुणवत्ता में सुधार आता है।
आधुनिक कृषि तकनीक: किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण
उन्नाव के इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों के प्रति जागरूक करना है। अक्सर देखा जाता है कि जानकारी के अभाव में किसान अभी भी पुरानी पद्धतियों पर निर्भर हैं, जिससे उनकी लागत बढ़ जाती है और मुनाफा कम होता है।
राजगीर कृषि प्रक्षेत्र में हुए इस प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय किसान भी जुटे। उन्हें यह समझाया गया कि कैसे सरकार ड्रोन खरीदने पर सब्सिडी दे रही है और कैसे वे ‘ड्रोन दीदी’ या स्थानीय समितियों के माध्यम से इस तकनीक का लाभ उठा सकते हैं। ड्रोन तकनीक से न केवल खाद का छिड़काव, बल्कि कीटनाशकों का छिड़काव भी सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है, जिससे किसानों के स्वास्थ्य पर बुरा असर नहीं पड़ता।
भविष्य की खेती: चुनौतियों का समाधान है तकनीक
रबी की फसल (जैसे गेहूं, सरसों और मटर) के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। समय पर पोषक तत्व न मिलने से फसल की वृद्धि रुक सकती है। ऐसे में ड्रोन तकनीक एक “गेम चेंजर” बनकर उभरी है।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में जिले के अन्य ब्लॉकों और गांवों में भी इसी तरह के बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। लक्ष्य यह है कि उन्नाव का हर छोटा-बड़ा किसान यह जान सके कि तकनीक के इस्तेमाल से वह न केवल मेहनत बचा सकता है, बल्कि अपनी फसल को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार कर सकता है।
सफलता का संदेश
राजगीर प्रक्षेत्र में 16 एकड़ में हुआ यह सफल छिड़काव एक संदेश है कि अब खेती सिर्फ हल और बैल तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह विज्ञान और तकनीक का संगम बन चुकी है। किसानों ने भी इस तकनीक में गहरी रुचि दिखाई है और उम्मीद जताई है कि अगर सरकार उन्हें उचित किराये पर ड्रोन उपलब्ध कराए, तो वे बड़े पैमाने पर इसे अपनाएंगे।
इस कार्यक्रम के समापन पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने आह्वान किया कि किसान रबी की इस फसल में नैनो यूरिया प्लस का अधिक से अधिक उपयोग करें ताकि कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
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