जेल से छूटा अपराधी फिर बना 'ड्रग माफिया'
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव/बिछिया: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक ओर “नशा मुक्त प्रदेश” का नारा दे रही है और ड्रग माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए सख्त निर्देश जारी कर रही है, वहीं उन्नाव की सदर कोतवाली पुलिस की नाक के नीचे नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा है। बिछिया ब्लॉक के कोटरा गांव रोड स्थित शेखपुर नरी मोहल्ला इस समय नशे की मंडी बन चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे सिंडिकेट को वह अपराधी चला रहा है जो कुछ ही समय पहले गांजा तस्करी के आरोप में जेल की हवा खाकर बाहर आया है।
जेल से रिहाई, फिर वही ‘मौत’ की कमाई
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जितेंद्र नामक युवक इस अवैध धंधे का मुख्य सूत्रधार है। जितेंद्र का आपराधिक इतिहास पुराना है और वह पहले भी गांजे की बड़ी खेप के साथ गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। लेकिन विडंबना देखिए कि जेल से बाहर आते ही उसने कानून को ठेंगे पर रख दिया और फिर से अपनी पुरानी राह पकड़ ली।
मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि जितेंद्र ने शेखपुर नरी को गांजे का सुरक्षित अड्डा बना लिया है। यहाँ बेखौफ होकर सुबह से रात तक नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। जेल जाने का डर खत्म होने के कारण जितेंद्र अब और अधिक दबंगई से इस धंधे को अंजाम दे रहा है।
100 रुपये की पुड़िया, उजड़ते परिवार और बर्बादी की दास्तां
ग्राउंड जीरो पर ट्रुथ इंडिया टाइम्स की पड़ताल में यह सामने आया है कि यहाँ मात्र 100 रुपये में गांजे की पुड़िया आसानी से उपलब्ध है। कम कीमत होने के कारण स्कूल-कॉलेज जाने वाले नौजवान और दिहाड़ी मजदूर इसके जाल में फंस रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“नशे के आदी युवक अपने घरों का सामान, गहने और बर्तन तक बेच रहे हैं। जितेंद्र और उसके साथी मोहल्ले के बच्चों को नर्क में धकेल रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है, तो वह जेल जाने और अपराधी होने की धौंस दिखाकर उन्हें चुप करा देता है।”
कानून-व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
यह मामला केवल एक नशे के कारोबारी का नहीं है, बल्कि पुलिस के इंटेलिजेंस और कार्यप्रणाली की विफलता का भी है।
- निगरानी में चूक: जब एक अपराधी गांजा तस्करी में जेल जा चुका है, तो जमानत पर आने के बाद उस पर स्थानीय पुलिस या बीट कांस्टेबल की नजर क्यों नहीं थी?
- बीट कांस्टेबल की भूमिका: क्या यह संभव है कि सरेआम बिक रहे गांजे की भनक स्थानीय पुलिस और बीट इंचार्ज को न हो? ग्रामीणों में चर्चा है कि यह सब ‘ऊपर तक सेटिंग’ का खेल है।
- युवाओं का भविष्य: बिछिया ब्लॉक का यह इलाका धीरे-धीरे अपराध का गढ़ बनता जा रहा है। नशे के कारण यहाँ छोटी-मोटी चोरियां और विवाद बढ़ गए हैं।
सरकार और उच्चाधिकारियों से ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ की सीधी मांग
1. गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई: जितेंद्र जैसे आदतन अपराधियों पर केवल साधारण एनडीपीएस एक्ट नहीं, बल्कि ‘गैंगस्टर एक्ट’ लगना चाहिए और इसकी अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति की जांच होनी चाहिए। 2. जमानत निरस्तीकरण: पुलिस को तत्काल न्यायालय में रिपोर्ट देनी चाहिए कि आरोपी जेल से बाहर आकर फिर से उसी संगीन अपराध में संलिप्त है, ताकि इसकी जमानत रद्द हो सके। 3. सफाई अभियान: बिछिया और शेखपुर नरी क्षेत्र में ‘कॉम्बिंग ऑपरेशन’ चलाकर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जाए। 4. पुलिस की जवाबदेही: अगर इस खबर के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित बीट इंचार्ज और चौकी प्रभारी पर गाज गिरनी चाहिए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: केवल आश्वासन या एक्शन?
इस गंभीर मामले पर जब सदर कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्रा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह ‘जांच और टीम भेजने’ की बात कही है। लेकिन शेखपुर नरी की जनता अब आश्वासनों से ऊब चुकी है। उन्हें जांच नहीं, जितेंद्र की गिरफ्तारी और मोहल्ले से नशे के इस कलंक की विदाई चाहिए।
निष्कर्ष: उन्नाव पुलिस को समझना होगा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का मतलब केवल कागजों पर मुकदमे दर्ज करना नहीं है। जब तक जितेंद्र जैसे अपराधी खुलेआम 100 रुपये में मौत बेचते रहेंगे, तब तक प्रशासन के सभी दावे खोखले नजर आएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख अपराधियों के लिए है, लेकिन यहाँ अपराधी प्रशासन को चुनौती दे रहा है।
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