उन्नाव में 'नशे' में चूर दिखा कानून का पहरा
प्रलभ शरण चौधरी/उन्नाव/Truth India Times
उन्नाव। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार एक तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘कठोर अनुशासन’ का दम भरती है, वहीं उन्नाव जिले से आई एक शर्मनाक तस्वीर ने खाकी की गरिमा को तार-तार कर दिया है। शहर के रिहायशी इलाके आवास विकास में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले दो होमगार्ड बीच सड़क पर शराब के नशे में धुत होकर तमाशा करते नजर आए। नशे की हालत में बाइक सवार इन होमगार्डों का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिससे प्रशासन की भारी किरकिरी हो रही है।
सवाल यह है कि जो हाथ समाज को अपराध मुक्त बनाने के लिए उठने चाहिए, वे यदि शराब के जाम से कांप रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?
सड़क पर गिरे ‘सुरक्षाकर्मी’, लोग बोले- ये है प्रशासन का असली चेहरा
पूरी घटना शहर के आवास विकास स्थित अखिलेश्वर मंदिर के पास की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बाइक पर सवार दो होमगार्ड बुरी तरह नशे में थे। उनकी बाइक लहरा रही थी और वे खुद को संभालने की स्थिति में नहीं थे। जैसे ही वे मंदिर के पास पहुंचे, संतुलन बिगड़ने के कारण दोनों बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े।
जब राहगीरों ने उन्हें उठाने की कोशिश की और पूछताछ की, तो उनकी जुबान लड़खड़ा रही थी। उन्होंने बताया कि वे दही थाना क्षेत्र में तैनात होमगार्ड हैं। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें वर्दी में इस हाल में देखा, तो दंग रह गए। मौके पर मौजूद एक युवक ने इस पूरे शर्मनाक वाकये का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया।
सरकार और उच्चाधिकारियों को चुभने वाले सवाल
यह वीडियो केवल दो व्यक्तियों की गलती नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है जो पुलिसिंग और सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है:
- ड्यूटी पर नशा, या नशे में ड्यूटी? क्या इन कर्मियों की तैनाती से पहले या ड्यूटी के दौरान कोई रैंडम चेकिंग नहीं होती?
- वर्दी का अपमान: वर्दी पहनकर सार्वजनिक स्थल पर नशे में गिरना केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि पूरे विभाग का अपमान है। क्या सरकार ऐसे कर्मियों के खिलाफ ‘नजीर’ बनने वाली कार्रवाई करेगी?
- हादसे का डर: आवास विकास जैसा इलाका बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही वाला क्षेत्र है। यदि ये नशेड़ी होमगार्ड किसी राहगीर को अपनी बाइक से टक्कर मार देते, तो उस मौत का जिम्मेदार कौन होता?
सोशल मीडिया पर फूटा आक्रोश: “भक्षक बन रहे रक्षक”
वीडियो वायरल होते ही नेटिज़न्स ने उन्नाव पुलिस और यूपी सरकार को टैग करना शुरू कर दिया है। यूजर्स लिख रहे हैं कि “जब रक्षक ही कानून की धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम आदमी से नियम पालन की उम्मीद करना बेमानी है।” कुछ लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि “उन्नाव पुलिस अब शायद ‘नशे से सुरक्षा’ का नया अभियान शुरू करने वाली है।”
सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने पुलिस महकमे को बैकफुट पर धकेल दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इन होमगार्डों का मेडिकल परीक्षण कराया गया? क्या इन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त किया जाएगा?
जांच का ‘घिसा-पिटा’ आश्वासन
हर बार की तरह, मामला तूल पकड़ते ही पुलिस प्रशासन ने जांच की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता जांची जा रही है और यदि वे होमगार्ड दही थाने के पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
परंतु, बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल एक या दो कर्मियों को सस्पेंड कर देने से विभाग की कार्यसंस्कृति बदल जाएगी? जिला कमांडेंट होमगार्ड और जिले के कप्तान को यह जवाब देना होगा कि वर्दीधारियों के बीच फैल रही इस अनुशासनहीनता को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
निष्कर्ष: दिखावे की सख्ती बनाम कड़वी हकीकत
एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री नशामुक्ति के अभियान चलाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही मशीनरी का हिस्सा रहे ये कर्मचारी नशे में सड़कों पर लोट रहे हैं। यह घटना बताती है कि धरातल पर मॉनिटरिंग का भारी अभाव है। उन्नाव की जनता आज यह पूछ रही है कि क्या वह अपनी सुरक्षा इन ‘लड़खड़ाते कंधों’ के भरोसे छोड़ दे?
प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करे ताकि भविष्य में कोई भी वर्दीधारी कानून के साथ इस तरह का ‘मजाक’ करने की हिम्मत न कर सके।
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