छत से गिरे किसान की इलाज के दौरान मौत
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में बंदरों का बढ़ता आतंक अब जानलेवा साबित होने लगा है। पुरवा थाना क्षेत्र के चमियानी गांव में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां बंदरों के झुंड से खुद को बचाने की कोशिश में एक वृद्ध किसान छत से नीचे गिर गए। गंभीर रूप से घायल किसान ने अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को दम तोड़ दिया। इस घटना ने न केवल गांव में मातम फैला दिया है, बल्कि एक ऐसे परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है जिसके दो बच्चे दिव्यांग हैं।
बंदरों के हमले से बिगड़ा संतुलन
मिली जानकारी के अनुसार, चमियानी गांव के रहने वाले 58 वर्षीय महावीर सिंह (पुत्र स्वर्गीय हरदेव लाल) बुधवार सुबह किसी घरेलू काम से अपने घर की छत पर गए थे। अभी वह छत पर ही थे कि अचानक बंदरों के एक बड़े झुंड ने उन पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, एक आक्रामक बंदर ने उन्हें तेजी से दौड़ाया, जिससे बचने के लिए महावीर पीछे की ओर भागे। इसी आपाधापी में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे छत से जमीन पर आ गिरे।
इलाज के दौरान थमी सांसें
छत से गिरने के कारण महावीर सिंह के सिर और शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे परिजनों और पड़ोसियों ने उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया। जीवन और मौत के बीच संघर्ष करते हुए महावीर सिंह ने गुरुवार को उपचार के दौरान अंतिम सांस ली।
बेसहारा हुए दो दिव्यांग बच्चे
महावीर सिंह गांव में खेती-किसानी करके अपने परिवार का पेट पालते थे। उनकी मृत्यु ने उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। बताया जा रहा है कि मृतक के एक बेटा और एक बेटी हैं, और अत्यंत दुखद बात यह है कि दोनों ही बच्चे दिव्यांग हैं। घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य और पिता के चले जाने से अब इन दिव्यांग बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे चमियानी गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब घरों की छतों पर जाना भी खतरे से खाली नहीं रह गया है। आए दिन बंदर लोगों को काट लेते हैं या घरों में घुसकर सामान का नुकसान करते हैं, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद बंदरों को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर शहरी और ग्रामीण इलाकों में बंदरों की बढ़ती आबादी और उनके हिंसक व्यवहार से निपटने के लिए सरकारी तंत्र की विफलता को उजागर किया है।
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