चमचमाया नवीन पुल, सड़कों पर उतरी 'हाईटेक' मशीन
उन्नाव |(प्रलभ शरण चौधरी – ट्रुथ इंडिया टाइम्स)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद अंतर्गत नगर पालिका परिषद गंगाघाट अब ‘स्मार्ट और क्लीन’ सिटी की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रही है। शहर की सूरत बदलने और धूल-मिट्टी से निजात दिलाने के लिए पालिका प्रशासन ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। मंगलवार के तड़के जब शहर सो रहा था, तब पालिका की मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन सड़कों पर धूल का साम्राज्य खत्म कर रही थी। नतीजा यह रहा कि सुबह जब राहगीर सड़कों पर निकले, तो उन्हें नवीन पुल और फोरलेन मार्ग बिल्कुल आईने की तरह चमकते हुए मिले।
नगर पालिका के इस नए तेवर से उन लापरवाह कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है, जो अक्सर सफाई में कोताही बरतते थे। अधिशासी अधिकारी (EO) मुकेश कुमार मिश्रा ने इस अभियान के साथ ही कड़ा संदेश जारी किया है कि यदि भविष्य में सड़कों पर गंदगी पाई गई, तो संबंधित सफाई कर्मियों और पर्यवेक्षकों पर गाज गिरना तय है।
भोर पहर ‘मिशन क्लीन’ की शुरुआत
गंगाघाट पालिकाध्यक्ष कौमुदी पांडे और अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार मिश्रा के संयुक्त निर्देशन में यह विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। आम जनता को यातायात में कोई असुविधा न हो, इसके लिए रात के अंधेरे और भोर के सन्नाटे को चुना गया। आधुनिक स्वीपिंग मशीन ने न केवल सड़कों के किनारे जमी धूल और मिट्टी को खींचा, बल्कि जमा हुए कूड़े-कचरे और सूखे पत्तों का भी पूरी तरह सफाया कर दिया।
सफाई का मुख्य केंद्र नवीन पुल और फोरलेन मार्ग रहा। इन मार्गों पर भारी यातायात के कारण अक्सर धूल उड़ती रहती थी, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई होती थी। मशीन की ब्रशिंग और सक्शन तकनीक ने धूल के कणों को वातावरण में घुलने से पहले ही सोख लिया, जिससे प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट दर्ज की गई।
पालिकाध्यक्ष का संकल्प: प्रदूषण मुक्त और सुंदर गंगाघाट
इस अभियान की सफलता पर बात करते हुए पालिकाध्यक्ष कौमुदी पांडे ने कहा, “नगर को स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने संकल्प लिया है कि गंगाघाट के नागरिकों को एक स्वस्थ वातावरण प्रदान करेंगे। आधुनिक मशीनों के उपयोग से न केवल श्रम की बचत हो रही है, बल्कि सफाई का जो स्तर हमें मिल रहा है, वह मैनुअल सफाई से संभव नहीं था।”
उन्होंने आगे कहा कि शहर के सभी प्रमुख चौराहों, पुलों और मुख्य बाजारों में अब नियमित अंतराल पर इसी प्रकार मशीन से सफाई कराई जाएगी। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे सड़कों पर कूड़ा न फेंकें और कूड़ेदान का ही प्रयोग करें।
EO की दो टूक: ‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं’
अधिशासी अधिकारी मुकेश कुमार मिश्रा का रुख इस बार काफी सख्त नजर आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर पालिका संसाधनों की कोई कमी नहीं होने देगी, लेकिन काम में पारदर्शिता और गुणवत्ता अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि मैकेनिकल स्वीपिंग से समय की बचत होती है और बड़े क्षेत्रों को कम समय में कवर किया जा सकता है।
ईओ मिश्रा ने कड़े लहजे में कहा, “मशीन अपना काम कर रही है, लेकिन वार्डों की आंतरिक सफाई की जिम्मेदारी हमारे कर्मियों की है। अगर मुख्य मार्गों के साथ-साथ मोहल्लों में गंदगी मिली, तो उत्तरदायित्व निर्धारित कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। हम सफाई व्यवस्था में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
बदली तस्वीर, जनता ने भी सराहा
गंगाघाट और उन्नाव के स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका के इस हाईटेक कदम का स्वागत किया है। सुबह सैर पर निकलने वाले नागरिकों का कहना है कि नवीन पुल पर पहले धूल की मोटी परत जमा रहती थी, लेकिन मंगलवार की सुबह नजारा बदला हुआ था। स्थानीय दुकानदार और राहगीर अब मांग कर रहे हैं कि इस प्रकार के अभियान को केवल त्यौहारों या विशेष मौकों तक सीमित न रखकर ‘डेली रूटीन’ का हिस्सा बनाया जाए।
तकनीक से बदलेगी गंगाघाट की छवि
विशेषज्ञों का मानना है कि मैकेनिकल स्वीपिंग मशीन का उपयोग वायु प्रदूषण (PM 10 और PM 2.5) को कम करने में मील का पत्थर साबित होता है। सड़कों पर जमी मिट्टी ही वाहनों के गुजरने पर हवा में घुलती है, जो फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनती है। गंगाघाट पालिका का यह कदम जनस्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष: नगर पालिका परिषद गंगाघाट ने दिखा दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो सीमित संसाधनों और बेहतर प्रबंधन से शहर की तस्वीर बदली जा सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या ईओ की चेतावनी के बाद शहर के सफाईकर्मी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाते हैं या फिर आने वाले दिनों में गाज गिरनी शुरू होगी। फिलहाल, चमचमाती सड़कों ने शहरवासियों को एक नई उम्मीद दी है।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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