गंगाघाट हत्याकांड के चारों दोषियों को उम्रकैद
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद की माननीय एडीजे प्रथम (ADJ-1) न्यायालय ने करीब दो साल पुराने एक जघन्य हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोतवाली गंगाघाट क्षेत्र के गोताखोर चंपापुरवा गांव में हुई इस वारदात ने तब पूरे इलाके को दहला दिया था। न्यायालय ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर चार अभियुक्तों को हत्या का दोषी पाते हुए उन्हें आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है। साथ ही, दोषियों पर कुल 36,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
वारदात की खौफनाक दास्तां
यह मामला 14 जनवरी 2024 की सर्द सुबह का है। मकर संक्रांति के पर्व के समय जब लोग उत्सव की तैयारी में थे, तभी गोताखोर चंपापुरवा गांव में आपसी रंजिश और विवाद के चलते खूनी खेल खेला गया। नामजद अभियुक्तों—काले खां उर्फ शमशेर, छोटे खां, शहबाज और जमशेर ने एक राय होकर बउवा कश्यप और विनोद कश्यप पर हमला बोल दिया था।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने बेहद क्रूरता का परिचय देते हुए ईंट और पत्थरों से विनोद और बउवा पर प्रहार किए। सिर और शरीर के नाजुक अंगों पर लगी गंभीर चोटों के कारण विनोद कश्यप लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। गंभीर स्थिति में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई। इस हमले में बउवा कश्यप भी बुरी तरह घायल हुए थे।
कानूनी प्रक्रिया और पुलिस की पैरवी
हत्याकांड के बाद गांव में तनाव व्याप्त हो गया था। मृतक विनोद कश्यप की पत्नी प्रीति कश्यप ने अदम्य साहस दिखाते हुए कोतवाली गंगाघाट में चारों हमलावरों के खिलाफ नामजद तहरीर दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच तत्कालीन कोतवाली प्रभारी रामफल प्रजापति को सौंपी गई थी। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए और समयबद्ध तरीके से न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल की। अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों को अदालत में पेश किया और यह साबित किया कि हत्या पूर्व नियोजित और बर्बर थी।
न्यायालय का फैसला: अपराधियों में खौफ
एडीजे प्रथम न्यायालय के न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि काले खां, छोटे खां, शहबाज और जमशेर ने कानून को हाथ में लेकर एक व्यक्ति की जान ली और दूसरे को अपंग बनाने की कोशिश की।
- सजा: चारों दोषियों को ताउम्र जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश।
- अर्थदंड: प्रत्येक दोषी पर लगाए गए जुर्माने की कुल राशि 36,500 रुपये तय की गई है। अर्थदंड न देने पर सजा की अवधि और बढ़ सकती है।
समाज में कड़ा संदेश
गंगाघाट क्षेत्र में इस फैसले के बाद न्याय प्रणाली के प्रति जनता का विश्वास और सुदृढ़ हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से विनोद कश्यप की निर्मम हत्या की गई थी, उसके बाद इस तरह के कड़े फैसले की सख्त जरूरत थी। यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो छोटी-छोटी बातों पर हिंसक वारदातों को अंजाम देते हैं।
पीड़ित परिवार के लिए यह न्याय किसी मरहम से कम नहीं है। प्रीति कश्यप ने अपने पति को खोया था और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट के इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराध चाहे कितना भी संगीन क्यों न हो, न्याय की चौखट पर अपराधी को झुकना ही पड़ता है।
गंगाघाट पुलिस की सक्रियता आई काम
इस मामले में तत्कालीन विवेचक और गंगाघाट पुलिस की कार्यशैली की भी सराहना हो रही है। समय पर गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना ही इस सजा का आधार बना। आईजीआरएस रैंकिंग में नंबर वन आने के बाद, उन्नाव पुलिस के खाते में इस कानूनी जीत को एक और बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
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