एक दिन में 800 से ज्यादा पंजीकरण
(प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times)
उन्नाव : उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बदलते मौसम और बेकाबू होते वायरल संक्रमण ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सोमवार को उन्नाव जिला अस्पताल की जो तस्वीर सामने आई, वह स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलने के लिए काफी थी। रविवार के अवकाश के बाद सोमवार को जैसे ही ओपीडी (OPD) के द्वार खुले, अस्पताल परिसर किसी मेले के मैदान में तब्दील हो गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टरों के चैम्बर तक मरीजों और उनके तीमारदारों की ऐसी लंबी कतारें लगीं कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची।
आंकड़ों में बीमारी का खौफ
अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को दोपहर तक ही 800 से अधिक नए पंजीकरण दर्ज किए जा चुके थे। यह संख्या सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुनी है। अस्पताल आने वाले अधिकांश मरीजों में तेज बुखार, बदन दर्द, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वायरल फीवर’ और ‘सीजनल इन्फ्लुएंजा’ के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
सुबह 7 बजे से ही लग गईं कतारें
रविवार की छुट्टी होने के कारण सोमवार को मरीजों का दबाव पहले से ही अपेक्षित था, लेकिन भीड़ ने सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया। अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर सुबह 7 बजे से ही मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। 10 बजते-बजते यह कतार अस्पताल की मुख्य गैलरी से बाहर निकलकर परिसर तक पहुँच गई।
भीड़ में सबसे ज्यादा संख्या छोटे बच्चों और बुजुर्गों की रही। तपती धूप और उमस के बीच घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण कई मरीजों की हालत और भी बिगड़ती दिखी। कुछ तीमारदारों ने आरोप लगाया कि पर्चा काउंटर पर कर्मचारियों की कमी के कारण काम बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।
डॉक्टरों के चैम्बर के बाहर अफरा-तफरी
पर्चा बनवाने के बाद असली संघर्ष डॉक्टरों को दिखाने का था। फिजीशियन और बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) के कमरों के बाहर भारी भीड़ के कारण सोशल डिस्टेंसिंग जैसे शब्द कहीं खो गए। वायरल के बढ़ते प्रकोप के चलते पैथोलॉजी लैब और एक्स-रे रूम के बाहर भी मरीजों का हुजूम उमड़ा रहा। लोग अपनी बारी के इंतजार में घंटों जमीन पर बैठने को मजबूर दिखे।
अस्पताल की मुख्य समस्याएं:
- दवाइयों की किल्लत: कुछ मरीजों ने शिकायत की कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई जरूरी दवाएं अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें निजी मेडिकल स्टोर्स का रुख करना पड़ रहा है।
- स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की कमी: गंभीर मरीजों को वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के लिए तीमारदारों को आपस में उलझते देखा गया।
- पर्चा काउंटर: 800 से अधिक मरीजों के लिए काउंटरों की संख्या नाकाफी साबित हुई।
वायरल के साथ डेंगू का भी डर
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि वायरल बुखार के साथ-साथ जिले में डेंगू और मलेरिया के संदिग्ध मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। जिला अस्पताल के सीएमएस (Chief Medical Superintendent) ने बताया कि अस्पताल प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है और मरीजों को बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे घर के आसपास पानी जमा न होने दें और तेज बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, खुद से दवाइयां (Self-medication) न लें।
प्रशासन के दावे बनाम हकीकत
भले ही प्रशासन पर्याप्त इंतजामों की बात कर रहा हो, लेकिन एक दिन में 800 से अधिक मरीजों का आना यह बताता है कि जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, जिसके कारण सभी मरीज जिला मुख्यालय की ओर भाग रहे हैं। यदि समय रहते पीएचसी (PHC) और सीएचसी (CHC) स्तर पर वायरल को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा सकती हैं।
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