उन्नाव जिला अस्पताल में एडी स्वास्थ्य का छापा
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव: उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए रविवार को शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। अपर निदेशक (एडी) स्वास्थ्य, जेपी गुप्ता ने पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम के साथ उन्नाव जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुई इस छापेमारी से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और कई कर्मचारी अपनी कमियां छिपाते नजर आए।
औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप
रविवार की सुबह जब आम दिनों की तरह अस्पताल में कामकाज चल रहा था, तभी एडी स्वास्थ्य जेपी गुप्ता की गाड़ियों का काफिला अस्पताल पहुंचा। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण से सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) समेत पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया। जेपी गुप्ता सीधे इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, जहां उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति दर्ज की।
मरीजों का छलका दर्द: ‘अंदर डॉक्टर, बाहर की दवा’
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला और गंभीर मामला तब सामने आया जब एडी स्वास्थ्य वार्डों में भर्ती मरीजों का हाल चाल जानने पहुंचे। बातचीत के दौरान कई मरीजों और उनके तीमारदारों ने डॉक्टरों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए। मरीजों ने शिकायत की कि अस्पताल के मेडिकल स्टोर में दवाएं उपलब्ध होने के बावजूद, डॉक्टर पर्चे पर बाहर की निजी दुकानों की दवाएं लिख रहे हैं।
एक तीमारदार ने बताया कि “साहब, सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त कहने को है, लेकिन बाहर की महंगी दवाएं खरीदने में जेब खाली हो जाती है।” इन शिकायतों को सुनकर एडी स्वास्थ्य ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और तत्काल संबंधित डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा।
स्टॉक रजिस्टर और स्टोर रूम की बारीकी से जांच
बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायत मिलते ही जेपी गुप्ता ने दवा वितरण केंद्र (विंडो) और मुख्य दवा स्टोर का रुख किया। उन्होंने स्टॉक रजिस्टर का मिलान अलमारियों में रखी दवाओं से किया। जांच में यह देखा गया कि कौन सी जीवन रक्षक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं और कौन सी शॉर्टेज में हैं। एडी स्वास्थ्य ने निर्देश दिया कि यदि कोई दवा स्टॉक में नहीं है, तो उसकी डिमांड तुरंत भेजी जाए, लेकिन जो दवाएं अंदर मौजूद हैं, उन्हें बाहर से लिखवाना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आएगा।
साफ-सफाई और उपकरणों की स्थिति पर निर्देश
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जेपी गुप्ता ने केवल चिकित्सा ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का भी जायजा लिया। वार्डों में बेड की चादरें, शौचालयों की सफाई और वाटर कूलर की स्थिति को देखा गया। कुछ स्थानों पर गंदगी और अव्यवस्था मिलने पर उन्होंने अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि “मरीज यहाँ ठीक होने आता है, गंदगी देखकर बीमार होने नहीं।” इसके अलावा, उन्होंने वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की कार्यक्षमता की भी रिपोर्ट ली।
‘लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’ – जेपी गुप्ता
निरीक्षण के अंत में पत्रकारों से वार्ता करते हुए एडी स्वास्थ्य जेपी गुप्ता ने स्पष्ट किया कि जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है। यहाँ आने वाले गरीब मरीजों के हक को मारने वाले कर्मचारियों और डॉक्टरों पर गाज गिरना तय है। उन्होंने कहा, “बाहर की दवा लिखने का मामला बेहद गंभीर है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। अगर सुधार नहीं हुआ, तो बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
इस निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों में खौफ का माहौल है। अब देखना यह होगा कि इस औचक निरीक्षण के बाद मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में कितना सुधार आता है और क्या गरीब मरीजों को बाहर की दवाओं के भारी खर्च से मुक्ति मिलती है।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स की रिपोर्ट।
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