NH-31 पर लावारिस 'सिस्टम': उन्नाव-लालगंज हाईवे पर लहूलुहान मिला अज्ञात शव
उन्नाव (ककरारी)। उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक, उन्नाव-लालगंज नेशनल हाईवे (NH-31) आज सुबह उस वक्त दहल गया जब ककरारी गांव के पास सड़क किनारे एक अज्ञात व्यक्ति का खून से लथपथ शव बरामद हुआ। आज, 25 दिसंबर 2025 की सुबह जब पूरी दुनिया क्रिसमस के जश्न की तैयारी कर रही थी, तब सुबह 8:30 बजे डायल 112 को मिली एक सूचना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। मृतक के शरीर पर चोट के निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हाईवे पर रात के अंधेरे में कुछ तो खौफनाक घटा है।
क्या यह सिर्फ हादसा है या ‘साजिश’?
शव की हालत को देखकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। शरीर पर मौजूद गंभीर चोटें दो ही तरफ इशारा करती हैं: या तो व्यक्ति किसी अज्ञात तेज रफ्तार वाहन का शिकार हुआ (Hit and Run), या फिर उसकी हत्या कर शव को हाईवे किनारे फेंक दिया गया। सवाल यह है कि यदि यह एक्सीडेंट है, तो वह ‘किलर वाहन’ कहाँ गया? और यदि यह हत्या है, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं कि वे नेशनल हाईवे पर शव फेंक कर सुरक्षित निकल गए?
हाईवे पेट्रोलिंग के नाम पर करोड़ों खर्च, फिर भी ‘असुरक्षित’ सड़कें
उत्तर प्रदेश सरकार और NHAI दावा करते हैं कि नेशनल हाईवे पर 24 घंटे पेट्रोलिंग और सीसीटीवी निगरानी होती है। फिर ककरारी गांव के पास यह शव कब और कैसे आया?
- सीसीटीवी का खेल: क्या हाईवे पर लगे कैमरे काम कर रहे थे?
- नाइट पेट्रोलिंग कहाँ थी? रात के सन्नाटे में जब अपराधी सक्रिय होते हैं, तब पुलिस की गाड़ियाँ और हाईवे एम्बुलेंस कहाँ गायब रहती हैं?
- स्ट्रीट लाइट का अभाव: अक्सर हाईवे के इन हिस्सों में अंधेरा रहता है, जिससे अपराधियों को वारदात अंजाम देने में आसानी होती है।
शिनाख्त की चुनौती: पुलिस के पास ‘अज्ञात’ का ही सहारा
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर दिया है। फिलहाल पुलिस की सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान (शिनाख्त) करना है। पुलिस के अनुसार, घटनास्थल पर फिलहाल शांति है, लेकिन स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। लोगों का कहना है कि हाईवे पर आवारा मवेशी और बेलगाम रफ्तार ने पहले ही लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, और अब लावारिस लाशों का मिलना असुरक्षा की भावना को बढ़ा रहा है।
सरकार और गृह विभाग से सीधे सवाल:
- स्मार्ट सिटी और स्मार्ट हाईवे के दावों का क्या हुआ? अगर नेशनल हाईवे पर भी इंसान सुरक्षित नहीं है और उसकी मौत की वजह ‘अज्ञात’ रह जाती है, तो सुरक्षा के नाम पर वसूला जा रहा टैक्स कहाँ जा रहा है?
- रेस्पोंस टाइम की हकीकत: 25 दिसंबर की सुबह 8:30 बजे सूचना मिली, लेकिन वारदात संभवतः रात की है। क्या रात भर किसी गश्ती दल की नजर इस शव पर नहीं पड़ी?
- ट्रॉमा सेंटर की दूरी: उन्नाव के कई हिस्सों में एक्सीडेंट के बाद समय पर इलाज न मिलना मौत की मुख्य वजह है। क्या इस व्यक्ति की जान समय पर इलाज मिलने से बच सकती थी?
पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह की सुई
अक्सर ऐसे मामलों में पुलिस ‘अज्ञात वाहन की टक्कर’ बताकर फाइल बंद करने की जल्दी में रहती है। लेकिन क्या पुलिस इस व्यक्ति के मोबाइल लोकेशन, आसपास के ढाबों के सीसीटीवी और टोल प्लाजा के डेटा की गहराई से जांच करेगी? ककरारी गांव के सामने मिला यह शव सिर्फ एक शरीर नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था के ताबूत में एक और कील है।
निष्कर्ष: कब तक ‘अज्ञात’ रहेगी पहचान?
उन्नाव पुलिस के लिए यह मामला साख की लड़ाई है। क्या पुलिस इस गुत्थी को सुलझा पाएगी या यह केस भी फाइलों के ढेर में कहीं दब जाएगा? जनता जवाब चाहती है कि हाईवे पर सफर करने वाला हर व्यक्ति क्या अपनी जान हथेली पर रखकर चल रहा है?
प्रशासन को चाहिए कि वह ककरारी और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस पिकेट की तैनाती बढ़ाए और हाईवे पर लगे कैमरों की फीड को लाइव मॉनिटर करे, ताकि अगली बार किसी माँ का लाल ‘अज्ञात शव’ बनकर सड़क किनारे न मिले।
रिपोर्ट: [प्रलभ शरण चौधरी/उन्नाव/ब्यूरो]
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