खनन विभाग ने घेराबंदी कर पकड़े 7 ट्रक
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में अवैध खनन और सड़कों का सीना छलनी करने वाले ओवरलोड वाहनों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद खनन विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चलाकर अवैध परिवहन और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले सात ट्रकों को जब्त किया है। इस बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं और ओवरलोडिंग के कारोबार में संलिप्त लोगों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
आधी रात को घेराबंदी: विभाग की सघन कार्रवाई
बीते कुछ समय से जनपद में यह शिकायतें मिल रही थीं कि रात के अंधेरे का फायदा उठाकर कई ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्रों से अवैध खनन कर रहे हैं और निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक माल भरकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खनन अधिकारी और उनकी टीम ने देर रात जिले के प्रमुख एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर घेराबंदी की।
अभियान के दौरान जब ट्रकों को रोककर उनके प्रपत्रों (कागजातों) की जांच की गई, तो सात ट्रक ऐसे पाए गए जो या तो बिना वैध एम-चेक (M-Check) और रॉयल्टी पर्ची के माल ढो रहे थे या फिर उनमें ओवरलोडिंग की गई थी। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी ट्रकों को कब्जे में लेकर नजदीकी पुलिस थानों के सुपुर्द कर दिया।
3.45 लाख रुपये का राजस्व वसूला
खनन विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य न केवल अवैध गतिविधियों को रोकना है, बल्कि सरकारी राजस्व की चोरी को भी थामना है। पकड़े गए सात ट्रकों पर विभागीय नियमों के तहत भारी जुर्माना लगाया गया। विभाग के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई के जरिए शासन को 3.45 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह जुर्माना एक चेतावनी है। यदि ये वाहन स्वामी दोबारा इसी तरह की गतिविधि में लिप्त पाए गए, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सड़कों की सुरक्षा और पर्यावरण का सवाल
अवैध खनन और ओवरलोडिंग केवल राजस्व की हानि नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है। ओवरलोड ट्रक न केवल करोड़ों की लागत से बनी सड़कों और पुलों को समय से पहले क्षतिग्रस्त कर देते हैं, बल्कि आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण भी बनते हैं।
उन्नाव के स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड ट्रकों के कारण उड़ती धूल और सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढों से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। प्रशासन की इस सक्रियता से अब इन समस्याओं पर लगाम लगने की उम्मीद जगी है।
माफियाओं के रडार पर विभाग, विभाग के रडार पर माफिया
यह सर्वविदित है कि खनन माफिया अक्सर विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए ‘मुखबिरों’ का सहारा लेते हैं, जो विभाग की गाड़ियों के निकलते ही सूचना लीक कर देते हैं। लेकिन इस बार विभाग ने अपनी रणनीति बदली और निजी वाहनों या गुप्त सूचना तंत्र के आधार पर छापेमारी की, जिससे माफियाओं को संभलने का मौका नहीं मिला।
खनन विभाग के अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिले में किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नदियों के किनारे और प्रतिबंधित क्षेत्रों में सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए भी निगरानी बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
भविष्य की रणनीति: अभियान रहेगा जारी
उन्नाव जनपद में यह अभियान अभी थमा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने उन रास्तों की सूची तैयार की है जहाँ से चोरी-छिपे मौरंग और मिट्टी का अवैध परिवहन होता है। आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि खनन पट्टा धारकों को भी नियमों के दायरे में रहकर काम करना होगा, अन्यथा उनके लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उन्नाव में अब कानून से ऊपर कोई नहीं है। राजस्व की चोरी करने वालों और सड़कों को बर्बाद करने वाले ओवरलोड वाहनों पर नकेल कसने के लिए विभाग अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में है।
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