एआई के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श
नवाबगंज (उन्नाव) | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बदलते दौर में शिक्षा और प्रोफेशनल डेवलपमेंट की दिशा क्या होगी, इस पर मंथन करने के लिए शनिवार को उन्नाव का नवाबगंज अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बना। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ के तहत दूसरे प्री-इवेंट का भव्य आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप का मुख्य विषय ‘फैकल्टी फ्यूचर्स 2035: एआई के युग में प्रोफेशनल डेवलपमेंट की नई सोच’ रहा, जिसमें वैश्विक स्तर के शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
वैश्विक मंच पर एआई और शिक्षा का समन्वय
वर्कशॉप में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के प्रख्यात शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ पहुंचे। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2035 तक शिक्षा जगत का ढांचा पूरी तरह से एआई पर आधारित हो जाएगा। ऐसे में शिक्षकों और प्रोफेशनल्स को पारंपरिक तरीकों से हटकर नई तकनीक के साथ सामंजस्य बैठाना अनिवार्य होगा।
कनाडा से आए विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह एआई के माध्यम से व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized Learning) को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने डेटा विश्लेषण और मशीन लर्निंग के माध्यम से छात्रों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत किए। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों ने फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में एआई टूल्स के एकीकरण पर व्यावहारिक सुझाव दिए।
फैकल्टी फ्यूचर्स 2035: भविष्य की तैयारी
वर्कशॉप का मुख्य आकर्षण शिक्षकों के कौशल विकास पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक नया दृष्टिकोण है। समिट में चर्चा की गई कि 2035 तक शिक्षकों की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे एक ‘मेंटर’ और ‘एआई स्ट्रैटेजिस्ट’ के रूप में कार्य करेंगे।
चर्चा के प्रमुख बिंदु:
- प्रोफेशनल डेवलपमेंट: एआई टूल्स का उपयोग करके कार्यक्षमता को कैसे बढ़ाया जाए।
- नैतिक एआई (Ethical AI): शिक्षा में एआई के उपयोग के दौरान डेटा गोपनीयता और नैतिकता को बनाए रखना।
- भविष्य की चुनौतियां: तकनीक के कारण नौकरियों के बदलते स्वरूप और उनसे निपटने की रणनीतियां।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की पहल और उन्नाव का चयन
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के प्रबंधन ने बताया कि ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ का उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में एआई के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्नाव के नवाबगंज को इस आयोजन के लिए चुनना यह दर्शाता है कि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों के शैक्षणिक संस्थानों को भी वैश्विक तकनीक से जोड़ना अनिवार्य है। यह समिट स्थानीय शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हुआ, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों से सीधे संवाद करने का मौका मिला।
तकनीकी सत्र और नवाचार पर जोर
वर्कशॉप के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने एआई आधारित विभिन्न सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन का प्रदर्शन किया। इसमें दिखाया गया कि कैसे घंटों का काम मिनटों में शुद्धता के साथ पूरा किया जा सकता है। शोधार्थियों को बताया गया कि शोध पत्र लिखने, डेटा संकलन करने और जटिल गणनाओं के लिए एआई का सही उपयोग कैसे किया जाए ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकें।
सम्मेलन में उपस्थित विद्वानों ने निष्कर्ष निकाला कि एआई मानव का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक है। यदि शिक्षक स्वयं को अपडेट नहीं करेंगे, तो वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में पिछड़ जाएंगे। समिट ने शिक्षकों को ‘अपस्किलिंग’ और ‘रीस्किलिंग’ के लिए प्रेरित किया।
समापन और आगामी योजना
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने बताया कि यह प्री-इवेंट एक श्रृंखला का हिस्सा है, जिसके मुख्य आयोजन में और भी बड़े नवाचार देखने को मिलेंगे। वर्कशॉप ने उन्नाव जैसे जनपद में तकनीकी शिक्षा की संभावनाओं को नई ऊर्जा दी है। स्थानीय शिक्षाविदों और कॉलेज प्रिंसिपलों ने इस पहल की सराहना की और इसे क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर बताया।
इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, तकनीकी संस्थानों के निदेशक और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों ने नवाबगंज की अतिथि सत्कार परंपरा की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे साझा तकनीकी कार्यक्रमों में भागीदारी की इच्छा जताई।
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