चौकी इंचार्ज लाइन हाजिर
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। जनपद के बसधना गांव में हुए चर्चित मनोकांत शुक्ला हत्याकांड के पांच दिन बीत जाने के बाद भी क्षेत्र में शांति बहाल नहीं हो सकी है। पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और ढुलमुल रवैये को लेकर ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा। भारी विरोध प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बीच पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चौकी इंचार्ज कमल दुबे को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
चौकी इंचार्ज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
मनोकांत शुक्ला की बेरहमी से की गई हत्या के बाद से ही पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही थी। परिजनों का आरोप है कि चौकी इंचार्ज कमल दुबे की लापरवाही और कथित मिलीभगत के कारण ही आरोपियों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
विवाद तब और गहरा गया जब घटना के तुरंत बाद कमल दुबे को गंगाबैराज चौकी भेजा गया, लेकिन मात्र दो दिन बाद ही उन्हें दोबारा उसी चौकी पर बहाल कर दिया गया। पुलिस के इस कदम से ग्रामीणों में आक्रोश चरम पर पहुँच गया। परिजनों ने सीधा आरोप लगाया कि पुलिस आरोपियों को संरक्षण देने और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास कर रही है। शनिवार को एसपी की कार्रवाई को इसी जनाक्रोश को शांत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
नशे की पार्टी, हवाई फायरिंग और फिर खूनी संघर्ष
घटनाक्रम के अनुसार, बीते रविवार की शाम बसधना गांव निवासी विपिन के घर पर एक पार्टी का आयोजन किया गया था। इस पार्टी में शराब और शबाब के साथ-साथ हथियारों का भी प्रदर्शन हुआ। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 50 लोगों की मौजूदगी में मुख्य आरोपी विपिन ने नशे में धुत होकर छह राउंड हवाई फायरिंग की, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई।
इसी दौरान वहां मौजूद मनोकांत शुक्ला (50), रामजी और महेंद्र का विपिन से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि विपिन, छोटू सनकी और उनके अन्य साथियों ने तीनों के साथ मारपीट शुरू कर दी।
बंधक बनाकर पीट-पीटकर उतारा मौत के घाट
आरोप है कि हमलावरों ने तीनों को जबरन पकड़ लिया और दोस्ती नगर स्थित एक सुनसान घर में ले जाकर बंधक बना लिया। वहाँ उनके साथ घंटों तक हैवानियत की गई और बेरहमी से मारपीट की गई। रामजी और महेंद्र किसी तरह अपनी जान बचाकर वहाँ से भाग निकलने में सफल रहे, लेकिन मनोकांत शुक्ला आरोपियों के चंगुल से नहीं निकल सके। आरोपियों ने उन्हें इतनी बुरी तरह पीटा कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
वारदात को अंजाम देने के बाद साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने मनोकांत के शव को माखी थाना क्षेत्र के सिंधूपुर के पास ले जाकर फेंक दिया और फरार हो गए।
इंसाफ की मांग पर अड़े परिजन
फिलहाल बसधना गांव में पुलिस बल तैनात है और माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मृतक के परिजनों का कहना है कि जब तक सभी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की जाती, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि मामले की सघन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर उन्नाव पुलिस की सूचना तंत्र और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ एक घर में सरेआम फायरिंग होती है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती।
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