जिले में बनेंगे 19 स्थायी हेलीपैड
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उत्तर प्रदेश का उन्नाव जिला अब हवाई कनेक्टिविटी और प्रशासनिक बुनियादी ढांचे के मामले में एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है। अब तक एक भी स्थायी हेलीपैड न होने की कमी झेल रहे उन्नाव में एक साथ 19 स्थायी हेलीपैड बनाने के मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है। प्रदेश सरकार की इस मंजूरी के बाद जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर जमीन चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम न केवल वीआईपी मूवमेंट को आसान बनाएगा, बल्कि आपदा और आपात स्थिति में भी गेम-चेंजर साबित होगा।
अस्थायी व्यवस्था से मिलेगी मुक्ति, बचेगा सरकारी पैसा
वर्तमान में उन्नाव जनपद की स्थिति यह है कि यहाँ एक भी स्थायी हेलीपैड उपलब्ध नहीं है। जब भी किसी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या उच्चाधिकारियों का दौरा होता है, तो पीडब्ल्यूडी विभाग को आनन-फानन में अस्थायी हेलीपैड तैयार करना पड़ता है। अधिकारी के लौटते ही वह ढांचा अनुपयोगी हो जाता है और मिट्टी में मिल जाता है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, एक स्थायी हेलीपैड के निर्माण पर लगभग 30 से 40 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। हर बार अस्थायी हेलीपैड बनाने में होने वाली लाखों की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार ने अब ‘वन-टाइम इन्वेस्टमेंट’ के तहत स्थायी कंक्रीट (CC) हेलीपैड बनाने का निर्णय लिया है।
मुख्यालय से लेकर तहसील और ब्लॉक तक फैलेगा जाल
जिले के भौगोलिक ढांचे को देखते हुए 19 स्थानों का चयन किया गया है। उन्नाव में कुल 6 तहसीलें और 16 विकास खंड (ब्लॉक) हैं। योजना के अनुसार:
- जिला मुख्यालय: यहाँ एक मुख्य स्थायी हेलीपैड बनाया जाएगा।
- तहसील एवं ब्लॉक स्तर: 6 तहसीलों और 12 ब्लॉकों में हेलीपैड का निर्माण होगा।
- विशेष व्यवस्था: जहाँ तहसील और ब्लॉक एक ही परिसर में हैं (जैसे बांगरमऊ, हसनगंज और सफीपुर), वहां संसाधनों की बचत के लिए एक ही साझा हेलीपैड बनाया जाएगा।
मुख्य सड़क से जुड़ाव: एप्रोच रोड का भी होगा निर्माण
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अभियंताओं के अनुसार, ये हेलीपैड केवल ईंट-पत्थर के ढांचे नहीं होंगे, बल्कि इन्हें उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट से तैयार किया जाएगा ताकि ये लंबे समय तक उपयोग के लायक रहें। हेलीपैड से मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 200 से 300 मीटर की विशेष एप्रोच रोड भी बनाई जाएगी, जिससे लैंडिंग के बाद काफिले की आवाजाही में कोई बाधा न आए।
मुख्य सचिव के निर्देश पर DM ने कसी कमर
हाल ही में मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में उन्नाव के जिलाधिकारी गौरांग राठी ने तत्काल प्रभाव से सभी उपजिलाधिकारियों (SDMs) को अपने-अपने क्षेत्रों में उपयुक्त भूमि चिन्हित कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने बताया:
“स्थायी हेलीपैड का निर्माण जनपद के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। इससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आपदा के समय राहत कार्यों को गति मिलेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बार-बार अस्थायी हेलीपैड बनाने में होने वाली सरकारी धन की बर्बादी अब पूरी तरह रुक जाएगी। भूमि चिन्हांकन का कार्य अंतिम चरण में है, जल्द ही विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।”
विकास और सुरक्षा के नजरिए से क्यों है जरूरी?
- त्वरित आपदा राहत: बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत सामग्री पहुंचाने और रेस्क्यू ऑपरेशन में ये हेलीपैड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- मेडिकल इमरजेंसी: एयर एम्बुलेंस की सुविधा के लिए ये हेलीपैड भविष्य में जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।
- निवेश की संभावनाएं: बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और बड़े निवेशकों के आवागमन में सुगमता आएगी।
उन्नाव में शुरू होने जा रही यह पहल भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए एक दूरगामी निवेश माना जा रहा है। अब जिलेवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही कागजों से उतरकर ये हेलीपैड जमीन पर नजर आएंगे।
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