मजदूर ने ग्राम विकास अधिकारी पर लगाया फर्जी रिपोर्ट का आरोप
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों के बीच उन्नाव जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक गरीब मजदूर को प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित करने के लिए कथित तौर पर ‘फर्जी रिपोर्ट’ तैयार करने का आरोप लगा है। मामला जनपद के पुरवा विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम भदनोग का है, जहाँ के निवासी अजय कुमार तिवारी ने तंत्र की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजकर न्याय की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
भदनोग निवासी अजय कुमार तिवारी पेशे से एक दिहाड़ी मजदूर हैं। अजय का कहना है कि वह लंबे समय से कच्चे और जर्जर मकान में रहने को मजबूर हैं। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ के तहत उन्होंने आवेदन किया था ताकि उनके परिवार को सिर ढंकने के लिए पक्की छत मिल सके। लेकिन, जब पात्रों की सूची आई और सर्वे हुआ, तो अजय के पैरों तले जमीन खिसक गई।
पीड़ित का आरोप है कि क्षेत्रीय ग्राम विकास अधिकारी (VDO) ने जमीनी हकीकत देखे बिना या जानबूझकर द्वेषवश उनके आवेदन पर एक ‘फर्जी रिपोर्ट’ लगा दी। रिपोर्ट में कथित तौर पर अजय को अपात्र दर्शाया गया है, जबकि धरातल पर उनकी स्थिति बेहद दयनीय है।
अधिकारी पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र में अजय कुमार तिवारी ने विस्तार से अपनी व्यथा सुनाई है। उनका आरोप है कि:
- ग्राम विकास अधिकारी ने मौके पर आकर पारदर्शी तरीके से स्थलीय निरीक्षण नहीं किया।
- सर्वे रिपोर्ट में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया ताकि उन्हें योजना के लाभ से बाहर रखा जा सके।
- गरीब और वास्तविक पात्र होने के बावजूद, अपात्रों को लाभ पहुँचाने के चक्कर में उनकी फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
पीड़ित ने पत्र में यह भी आशंका जताई है कि इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर बड़ी सेटिंग और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है, जिसकी वजह से उनके जैसे कई वास्तविक जरूरतमंद लोग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
“साहब, कच्चा घर कभी भी गिर सकता है”
अजय कुमार ने बताया कि बरसात के मौसम में उनका कच्चा मकान बेहद खतरनाक स्थिति में पहुँच जाता है। “मैं मजदूर हूँ, दिन भर मेहनत करके बमुश्किल दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाता हूँ। पक्का मकान बनवाना मेरे लिए सपने जैसा है। सरकार ने योजना बनाई, लेकिन साहब (अधिकारी) ने कलम की एक नोक से मेरा सपना और हक दोनों छीन लिया,” अजय ने सिसकते हुए कहा।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला केवल एक अजय कुमार तिवारी का नहीं है, बल्कि यह उन्नाव के विकास खंडों में आवास आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। मुख्यमंत्री को भेजे गए इस शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि अगर ग्राम विकास अधिकारी की रिपोर्ट की उच्च स्तरीय जांच होती है, तो कई और विसंगतियां सामने आ सकती हैं।
पीड़ित की मांग: स्थलीय जांच और कार्रवाई
अजय कुमार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि:
- उनके आवास के आवेदन की दोबारा जांच किसी निष्पक्ष और उच्चाधिकारी से कराई जाए।
- फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- उन्हें तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए ताकि वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित रह सकें।
क्या कहते हैं नियम?
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता का निर्धारण आर्थिक स्थिति, कच्चे मकान और भूमिहीनता जैसे मानकों पर होता है। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर तथ्यों को छुपाता है या गलत रिपोर्ट लगाता है, तो यह ‘ड्यूटी में लापरवाही’ और ‘भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में आता है।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स इस मामले की तह तक जाने के लिए प्रशासन के संपर्क में है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से इस शिकायत पर क्या निर्देश जारी होते हैं और क्या मजदूर अजय कुमार तिवारी को उनका हक मिल पाता है।
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