आईजीआरएस रैंकिंग में प्रदेश में पाया पहला स्थान
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और जनसुनवाई के मोर्चे पर उन्नाव पुलिस ने एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे सूबे के सामने नजीर पेश कर दी है। जन शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए बनाए गए ‘इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम’ (IGRS) की नवीनतम रैंकिंग में उन्नाव जनपद ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह सफलता न केवल पुलिस की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि जनता और खाकी के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है।
सभी 21 थानों ने किया ‘क्लीन स्वीप’
इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह रही कि जिले के किसी एक या दो थाने ने नहीं, बल्कि सभी 21 पुलिस थानों ने आईजीआरएस रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन किया है। सदर कोतवाली से लेकर ग्रामीण इलाकों के थानों तक, हर जगह शिकायतों के निस्तारण में गजब की तत्परता दिखाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, लंबित मामलों को शून्य करने और प्राप्त शिकायतों पर वैज्ञानिक व पारदर्शी तरीके से जांच करने में उन्नाव पुलिस ने शत-प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।
कप्तान की रणनीति और टीम का समर्पण
उन्नाव के पुलिस अधीक्षक (SP) जय प्रकाश सिंह के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही जनसुनवाई की प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन देखे गए हैं। एसपी ने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा कि शिकायतों का निस्तारण करना पुलिस की पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया, “हमने आईजीआरएस को केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि पीड़ित की पुकार समझा है। प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए हमने हर थाने को जवाबदेह बनाया। पारदर्शिता ऐसी रही कि पीड़ितों को थाने के चक्कर नहीं काटने पड़े, बल्कि पुलिस खुद उन तक समाधान लेकर पहुंची।”
सफलता के पीछे का ‘मैकेनिज्म’
उन्नाव पुलिस की इस ऐतिहासिक छलांग के पीछे एक सुनियोजित कार्यप्रणाली रही है। विभाग के सूत्रों के अनुसार, रैंकिंग में सुधार के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए:
- साप्ताहिक समीक्षा: एसपी और एएसपी स्तर पर हर हफ्ते लंबित शिकायतों की समीक्षा की गई। जिस थाने में लापरवाही दिखी, वहां के प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए।
- फीडबैक सिस्टम: शिकायत के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से पुलिस मुख्यालय द्वारा सीधे संपर्क किया गया और पूछा गया कि क्या वे कार्रवाई से संतुष्ट हैं। असंतुष्ट होने पर मामले की दोबारा जांच कराई गई।
- समय सीमा का कड़ाई से पालन: आईजीआरएस पोर्टल पर डिफॉल्टर (समय सीमा पार करने वाली) शिकायतों की संख्या को शून्य पर लाने के लिए विशेष सेल ने 24 घंटे काम किया।
- गुणवत्ता पर जोर: केवल रिपोर्ट लगाना उद्देश्य नहीं था, बल्कि मौके पर जाकर साक्ष्यों के आधार पर निस्तारण किया गया ताकि शिकायतकर्ता को वास्तविक न्याय मिल सके।
जनता का भरोसा: पुलिस की असली पूंजी
किसी भी जिले की पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती जनता के मन में सुरक्षा और विश्वास का भाव पैदा करना होता है। आईजीआरएस में नंबर वन आने का मतलब है कि जिले की जनता द्वारा पोर्टल पर दर्ज की गई समस्याओं को पुलिस ने गंभीरता से सुना और उन्हें हल किया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब छोटी-मोटी समस्याओं के लिए भी अधिकारियों के दफ्तरों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता, पोर्टल पर शिकायत करते ही पुलिस हरकत में आ जाती है।
प्रदेश स्तर पर बढ़ा मान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर अधिकारियों को जनसुनवाई में ढिलाई न बरतने की चेतावनी देते रहते हैं। ऐसे में उन्नाव पुलिस द्वारा प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल करना शासन की नजरों में जिले की छवि को और मजबूत करेगा। अन्य जिलों के लिए अब उन्नाव का ‘वर्किंग मॉडल’ एक प्रेरणा बन गया है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति के दम पर व्यवस्था बदली जा सकती है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
पहला स्थान हासिल करना जितना कठिन है, उसे बरकरार रखना उससे भी बड़ी चुनौती है। पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह रैंकिंग उनके कंधों पर और अधिक जिम्मेदारी डालती है। आने वाले समय में तकनीक का और अधिक समावेश कर पुलिस इस प्रक्रिया को और सरल बनाने की योजना बना रही है।
इस गौरवमयी उपलब्धि से पूरे जनपद के पुलिस महकमे में उत्साह का माहौल है। पुलिसकर्मियों का मानना है कि जब उनके काम को सरकारी आंकड़ों में सराहना मिलती है, तो यह उन्हें और अधिक निष्ठा से काम करने की प्रेरणा देता है।
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