सदर कोतवाली की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और जनसुनवाई को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता अब रंग लाती दिख रही है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, उन्नाव पुलिस ने जनवरी 2026 माह की ‘एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली’ (IGRS) की प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में नंबर वन का स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया है। प्रदेश भर के 75 जिलों में शीर्ष स्थान प्राप्त करना उन्नाव पुलिस प्रशासन की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बीच एक कड़वा सच यह भी है कि जिले की मुख्य सदर कोतवाली की रैंकिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे विभाग के भीतर खुशी और चिंता का मिला-जुला माहौल है।
जनसुनवाई में उन्नाव बना प्रदेश का ‘रोल मॉडल’
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई जनवरी माह की रिपोर्ट के अनुसार, उन्नाव पुलिस ने जन शिकायतों के निस्तारण, गुणवत्ता और समयबद्धता के मानकों पर शत-प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। पुलिस अधीक्षक (SP) के कुशल नेतृत्व में जिले के लगभग सभी थानों ने ऑनलाइन मिलने वाली शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया।
IGRS रैंकिंग में नंबर एक पर आने का सीधा मतलब है कि पीड़ित की शिकायत पर न केवल समय के भीतर कार्रवाई की गई, बल्कि शिकायतकर्ता भी पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट पाए गए। शासन द्वारा शिकायतों के निस्तारण के बाद रैंडम फीडबैक लिया जाता है, जिसमें उन्नाव को सर्वश्रेष्ठ रेटिंग मिली है।
सदर कोतवाली की रैंकिंग ने दी “क्रेडिट” को चुनौती
जहाँ एक ओर पूरा जिला प्रदेश में टॉप पर है, वहीं जिले की सबसे महत्वपूर्ण सदर कोतवाली की खराब रैंकिंग ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित इस कोतवाली में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन जनवरी माह की रिपोर्ट बताती है कि यहाँ शिकायतों के निस्तारण की गति और गुणवत्ता उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही।
सदर कोतवाली की रैंकिंग बिगड़ने के पीछे मुख्य कारण शिकायतों का लंबित होना और पोर्टल पर समय से रिपोर्ट अपलोड न करना बताया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि सदर कोतवाली की स्थिति बेहतर होती, तो जिले का स्कोर और भी अधिक प्रभावशाली हो सकता था।
पुलिस अधीक्षक ने दी बधाई और कड़ी चेतावनी
जिले के टॉप पर आने पर पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की पीठ थपथपाई है, लेकिन साथ ही लापरवाह अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। एसपी कार्यालय से जारी निर्देशों में कहा गया है कि:
- प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करना गौरव की बात है, लेकिन इसे बरकरार रखना एक चुनौती है।
- जिन थानों या कोतवालियों की रैंकिंग खराब आई है, उनके प्रभारियों को स्पष्टीकरण देना होगा।
- जनसुनवाई में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या है IGRS और कैसे मिलती है रैंकिंग?
एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संचालित एक ऐसा पोर्टल है, जहाँ आम जनता अपनी समस्याएं सीधे ऑनलाइन दर्ज कराती है। इन शिकायतों के निस्तारण के लिए समय सीमा तय होती है। रैंकिंग मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर आधारित होती है:
- निस्तारण की गति: कितनी जल्दी शिकायत पर कार्रवाई हुई।
- गुणवत्ता: क्या पीड़ित की समस्या का वास्तविक समाधान हुआ।
- फीडबैक: शिकायतकर्ता पुलिस की कार्रवाई से कितना संतुष्ट है।
- डिफॉल्टर लिस्ट: कितनी शिकायतें समय सीमा के बाद भी लंबित रहीं।
भविष्य की रणनीति: टॉप पर बने रहने की चुनौती
उन्नाव पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती फरवरी माह में भी इस स्थान को बचाए रखने की है। इसके लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन आईजीआरएस पोर्टल की समीक्षा करें और पेंडिंग शिकायतों को ‘प्राथमिकता’ पर निपटाएं। विशेष रूप से सदर कोतवाली जैसे व्यस्त इलाकों में मॉनिटरिंग के लिए अलग से टीम तैनात करने की योजना है।
जिला पुलिस की इस उपलब्धि पर स्थानीय नागरिकों ने भी हर्ष जताया है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई है कि यह रैंकिंग केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी पीड़ितों को न्याय दिलाने का जरिया बनी रहेगी।
ट्रुथ इंडिया टाइम्स की ओर से उन्नाव पुलिस को इस गौरवशाली उपलब्धि पर बधाई।
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