उन्नाव पुलिस का 'खौफ': हाथों में तख्तियां लेकर थाने पहुंचे अपराधी
प्रलभ शरण चौधरी/उन्नाव/Truth India Times
उन्नाव: उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। उन्नाव जिले में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने ‘ऑपरेशन दस्तक’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत जिले के कुख्यात अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों, चोरों और लुटेरों की हालत ऐसी हो गई है कि वे खुद थाने पहुंचकर अपराध से तौबा कर रहे हैं। सदर कोतवाली में अपराधियों का हाथ में तख्ती लेकर हाजिरी लगाने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
हाथों में तख्तियां और चेहरे पर पुलिस का डर
उन्नाव की सदर कोतवाली परिसर में उस वक्त एक अनोखा और फिल्मी लगने वाला नजारा देखने को मिला, जब दर्जनों चिन्हित अपराधी एक साथ कतार में खड़े नजर आए। इन अपराधियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था— “मजदूरी कर लेंगे, अपराध नहीं करेंगे… हमें माफ करो।” वर्षों तक इलाके में दहशत फैलाने वाले ये शातिर अपराधी अब पुलिस के सामने गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं। ‘ऑपरेशन दस्तक’ के डर से अपराधी अब न केवल अपराध छोड़ने की कसमें खा रहे हैं, बल्कि पुलिस को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अब मुख्यधारा में लौटकर मेहनत-मजदूरी करना चाहते हैं।
क्या है ‘ऑपरेशन दस्तक’ और पुलिस की रणनीति?
सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अपराधियों की वर्तमान गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना है।
- अनिवार्य हाजिरी: चिन्हित हिस्ट्रीशीटरों और अपराधियों को रोजाना थाने आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी अनिवार्य कर दी गई है।
- दिनचर्या की पूछताछ: पुलिस केवल हाजिरी ही नहीं ले रही, बल्कि अपराधियों से उनके मौजूदा काम, वे कहां रह रहे हैं और उनके साथ कौन लोग उठ-बैठ रहे हैं, इसका पूरा हिसाब मांग रही है।
- क्रॉस वेरिफिकेशन: अपराधियों द्वारा दी गई जानकारी को पुलिस की टीमें उनके मोहल्लों और गांवों में जाकर क्रॉस-चेक भी कर रही हैं।
अपराधियों में खौफ, जनता में बढ़ा भरोसा
इस सख्त कार्रवाई का दोहरा असर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां जेल से बाहर घूम रहे अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ इस कदर बैठ गया है कि वे दोबारा किसी वारदात को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अपराधियों का इस तरह थाने में सरेंडर मोड में खड़ा होना कानून व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। चोरी, लूट और छिनैती जैसी वारदातों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इंस्पेक्टर चंद्रकांत मिश्रा की दो-टूक चेतावनी
कोतवाली प्रभारी चंद्रकांत मिश्रा ने अपराधियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जिले में अपराध के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन दस्तक के जरिए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पुराना अपराधी दोबारा सक्रिय न हो पाए। अपराधियों के पास केवल दो ही रास्ते हैं— या तो वे अपराध का रास्ता पूरी तरह छोड़कर सुधर जाएं, या फिर जेल की सलाखों के पीछे जाने के लिए तैयार रहें।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि हाजिरी लगाने वाला कोई भी अपराधी किसी भी संदिग्ध गतिविधि में लिप्त पाया गया या उसने थाने में गलत जानकारी दी, तो उसके खिलाफ गैंगस्टर और एनएसए जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सुधरने का आखिरी मौका
पुलिस का मानना है कि इस अभियान से उन अपराधियों को एक मौका मिल रहा है जो सच में सुधरना चाहते हैं। हाजिरी के दौरान कई अपराधियों ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में पुलिस को बताया। कोई ई-रिक्शा चलाने की बात कह रहा है तो कोई राजमिस्त्री का काम करने की। पुलिस का कहना है कि जो अपराधी ईमानदारी से जीवन बिताना चाहेंगे, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष: बदल रहा है उन्नाव का माहौल
उन्नाव पुलिस की इस ‘नो-नॉनसेन्स’ अप्रोच ने अपराधियों की कमर तोड़ दी है। ‘मजदूरी कर लेंगे, अपराध नहीं करेंगे’ के नारों के साथ अपराधियों का यह समर्पण प्रदेश में कानून व्यवस्था की बदलती तस्वीर को बयां करता है। अब देखना यह होगा कि ‘ऑपरेशन दस्तक’ का यह खौफ कितने समय तक अपराधियों को सलाखों से बाहर और अपराध से दूर रख पाता है।
खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- अभियान: ऑपरेशन दस्तक (Operation Dastak)
- नारा: “मजदूरी कर लेंगे, अपराध नहीं करेंगे”
- प्रमुख अधिकारी: प्रभारी निरीक्षक चंद्रकांत मिश्रा।
- कार्रवाई: हिस्ट्रीशीटरों और चोरों की दैनिक हाजिरी और पूछताछ।
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.