'ऑपरेशन मुस्कान' के तहत बरामद किए 20 लाख के 101 मोबाइल
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव: उत्तर प्रदेश की उन्नाव पुलिस ने ‘ऑपरेशन मुस्कान’ अभियान के अंतर्गत एक बड़ी सफलता अर्जित की है। जनपद की सर्विलांस टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए विभिन्न क्षेत्रों से गुम हुए 101 एंड्रॉएड मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए हैं। बरामद किए गए इन स्मार्टफोन्स की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है।
खोई उम्मीदें और पुलिस की तत्परता
अक्सर मोबाइल गुम होने के बाद लोग उसे वापस पाने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन उन्नाव पुलिस के इस विशेष अभियान ने जनता के बीच विश्वास की एक नई किरण जगाई है। पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देशन में चलाई गई इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को राहत पहुंचाना था, जिन्होंने पिछले कुछ महीनों में अपने मोबाइल खोने की शिकायत दर्ज कराई थी।
सर्विलांस टीम का ‘डिजिटल प्रहार’
इस पूरी रिकवरी प्रक्रिया में जनपद की सर्विलांस सेल की भूमिका सबसे अहम रही। टीम ने अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम और IMEI नंबरों के जरिए इन फोनों को ट्रैक किया। ये फोन केवल उन्नाव ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और कुछ अन्य राज्यों में भी सक्रिय पाए गए थे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद इन फोनों को एकत्रित किया और मुख्यालय मंगवाया।
एसपी कार्यालय में सजा ‘खुशियों का दरबार’
जब इन 101 मोबाइल स्वामियों को पुलिस लाइन या एसपी कार्यालय बुलाया गया, तो वहां का माहौल काफी भावुक और उत्साहजनक था। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं अपने हाथों से मोबाइल फोन उनके स्वामियों को सौंपे। अपना खोया हुआ कीमती फोन वापस पाकर कई लोगों की आंखें भर आईं, तो कई ने उत्तर प्रदेश पुलिस और उन्नाव सर्विलांस टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया।
“मेरा फोन छह महीने पहले गुम हो गया था। मुझे लगा था कि अब वह कभी नहीं मिलेगा, लेकिन पुलिस की कॉल आई तो यकीन नहीं हुआ। आज फोन वापस पाकर बहुत खुश हूँ।” — एक लाभार्थी मोबाइल स्वामी
‘ऑपरेशन मुस्कान’: नाम के अनुरूप परिणाम
उन्नाव पुलिस का यह अभियान ‘ऑपरेशन मुस्कान’ वास्तव में अपने नाम को सार्थक कर रहा है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल केवल एक उपकरण नहीं है, बल्कि आज के दौर में व्यक्ति का महत्वपूर्ण डेटा, बैंक विवरण और निजी यादें उसमें सुरक्षित होती हैं। मोबाइल वापस मिलने से न केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई हुई है, बल्कि डेटा चोरी होने का खतरा भी टल गया है।
अपराधियों पर भी पुलिस की नजर
मोबाइल बरामदगी के दौरान पुलिस ने इस बात की भी जांच की है कि क्या ये फोन किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल किए गए थे। हालांकि, अधिकांश मामलों में फोन सड़क पर गिरने या कहीं भूल जाने के बाद किसी अन्य व्यक्ति को मिल गए थे। पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि उन्हें कोई लावारिस मोबाइल मिलता है, तो उसे नजदीकी थाने में जमा करें, क्योंकि इसे अपने पास रखना या उपयोग करना कानूनी रूप से गलत हो सकता है।
तकनीकी सुरक्षा पर पुलिस की सलाह
इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने आम जनता को कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा टिप्स भी दिए:
- अपने मोबाइल का IMEI नंबर हमेशा कहीं लिखकर सुरक्षित रखें।
- मोबाइल गुम होने पर तुरंत CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें ताकि फोन ब्लॉक किया जा सके।
- सार्वजनिक स्थानों पर फोन का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें।
- हमेशा मोबाइल में ‘फाइंड माय डिवाइस’ (Find My Device) का विकल्प ऑन रखें।
निष्कर्ष
उन्नाव पुलिस की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति भी उतनी ही संवेदनशील है। 20 लाख रुपये की संपत्ति बरामद कर उसे जनता को लौटाना पुलिस की ईमानदारी और कार्यकुशलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ पुलिस टीम के इस मानवीय और साहसी प्रयास की सराहना करता है।
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