नेशनल पावर लिफ्टिंग में रागिनी अवस्थी ने जीता गोल्ड
प्रलभ शरण चौधरी | Truth India Times
उन्नाव: प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और जब इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती ही है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली रागिनी अवस्थी ने इसे सच कर दिखाया है। हरियाणा में आयोजित नेशनल पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में रागिनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे जनपद का मान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
हरियाणा की सरजमीं पर जब देशभर के दिग्गज पावर लिफ्टर्स अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन्नाव की इस बेटी ने वजन उठाकर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। रागिनी अवस्थी ने पावर लिफ्टिंग के विभिन्न चरणों में अपनी शारीरिक और मानसिक मजबूती का परिचय दिया।
सूत्रों के मुताबिक, रागिनी लंबे समय से इस प्रतियोगिता के लिए कड़ा अभ्यास कर रही थीं। उनके प्रशिक्षण में अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ही उनकी जीत का मुख्य आधार बना। स्वर्ण पदक की घोषणा होते ही प्रतियोगिता स्थल भारत माता के जयकारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बेटियों और युवाओं के लिए बनीं मिसाल
रागिनी की यह सफलता केवल एक पदक मात्र नहीं है, बल्कि उन तमाम बेटियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो खेलों में अपना करियर बनाना चाहती हैं। एक छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना यह दर्शाता है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि की प्रतिभाएं भी अगर सही दिशा में मेहनत करें, तो आसमान छू सकती हैं।
रागिनी की जीत के बाद से उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सोशल मीडिया पर भी खेल प्रेमी और जिले के गणमान्य लोग उन्हें ‘उन्नाव की शेरनी’ कहकर सम्मानित कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि रागिनी ने अपनी कड़ी मेहनत से साबित किया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।
खेल सुविधाओं और समर्थन की जरूरत
रागिनी की इस उपलब्धि ने जिले में खेल सुविधाओं की स्थिति पर भी चर्चा छेड़ दी है। खेल जगत के जानकारों का मानना है कि अगर उन्नाव जैसे जिलों में रागिनी जैसी उभरती प्रतिभाओं को आधुनिक जिम, बेहतर डाइट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिले, तो वे ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी तिरंगा लहरा सकती हैं। रागिनी ने अपनी सीमित सुविधाओं के बावजूद जो मुकाम हासिल किया है, वह काबिले तारीफ है।
भविष्य के लक्ष्य पर नजर
स्वर्ण पदक जीतने के बाद रागिनी के हौसले बुलंद हैं। उनका अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। रागिनी का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का अटूट विश्वास और उनके कोच का सही मार्गदर्शन रहा है। उन्होंने अपनी जीत को उन सभी लड़कियों को समर्पित किया है जो बाधाओं को पार कर आगे बढ़ना चाहती हैं।
Truth India Times की विशेष टिप्पणी
रागिनी अवस्थी की जीत ने उन्नाव को एक नई पहचान दी है। खेल के मैदान में पसीना बहाकर लाया गया यह स्वर्ण पदक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। प्रशासन और सरकार को चाहिए कि ऐसी होनहार खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करें ताकि इनका सफर यहीं न थमे। रागिनी की सफलता यह चीख-चीख कर कह रही है—”म्हारी छोरियां छोरों से कम कोन्या!”
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