उन्नाव में डम्पर ने ली युवक की जान
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव | उन्नाव के गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत सहजनी चौराहे पर सोमवार देर रात जो हुआ, उसे केवल ‘हादसा’ कहना गलत होगा। यह सीधे तौर पर बेलगाम ट्रैफिक और प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा है। एक तेज रफ्तार डम्पर ने अपनी गाड़ी खड़ी कर नाश्ता कर रहे दंपत्ति को रौंद दिया। इस दर्दनाक हादसे में 40 वर्षीय सुभाष कुमार जायसवाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी रत्ना जायसवाल गंभीर रूप से घायल हैं।
नशे में चूर चालक, डरा हुआ शहर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, डम्पर चालक पूरी तरह नशे में धुत था और वाहन की गति इतनी अधिक थी कि वह चौराहे पर नियंत्रण खो बैठा। हैरानी की बात यह है कि सहजनी चौराहे पर टक्कर मारने के बाद भी खूनी डम्पर थमा नहीं; उसने आगे जाकर करोवन मोड़ पर एक और वाहन को टक्कर मारी, जहाँ एक अन्य व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आ रही है।
प्रशासन के दावों की खुली पोल
स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। जनता के कुछ सुलगते सवाल शासन-प्रशासन के लिए यहाँ दर्ज हैं:
- चेकिंग का अभाव: रात के समय मुख्य चौराहों पर पुलिस पिकेट और ड्रंकन ड्राइविंग (शराब पीकर गाड़ी चलाना) की चेकिंग क्यों नहीं होती?
- बेलगाम भारी वाहन: शहर की सीमाओं के भीतर भारी वाहनों (डम्पर) की गति सीमा निर्धारित करने और उन पर लगाम कसने में यातायात पुलिस क्यों विफल है?
- दिखावटी सुरक्षा: लोगों का कहना है कि चौराहे पर हाल ही में स्पीड ब्रेकर बनाए गए थे, लेकिन जब तक पुलिस की गश्त और सख्त कार्रवाई का डर नहीं होगा, तब तक ये ब्रेकर मौतों को नहीं रोक पाएंगे।
पुलिस की कार्रवाई: बस आश्वासन?
घटना की सूचना मिलते ही गंगाघाट कोतवाली के इंस्पेक्टर अजय सिंह पुलिस टीम के साथ पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चालक की तलाश करने की बात कह रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन हमेशा ‘हादसे के बाद’ ही क्यों जागता है?
क्या प्रशासन को किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार है, या अब शराब पीकर मौत बांटने वाले इन डम्पर चालकों पर कोई स्थायी सख्त कार्रवाई की जाएगी? मृतक के परिवार के लिए यह अपूरणीय क्षति है, जिसका जिम्मेदार केवल चालक ही नहीं, बल्कि वह व्यवस्था भी है जिसने उसे खुली छूट दे रखी है।
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