सरैया आरओबी के लिए दिल्ली से पहुंचे भारी-भरकम गार्डर
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद वासियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर स्थित बहुप्रतीक्षित सरैया रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस महत्वपूर्ण परियोजना में एक बड़ा मील का पत्थर तब स्थापित हुआ जब रेलवे के हिस्से के निर्माण के लिए आवश्यक लोहे के भारी-भरकम गार्डर दिल्ली से उन्नाव पहुंच गए। इन गार्डरों के पहुंचने के साथ ही अब निर्माण कार्य की गति तेज हो गई है और रेलवे जल्द ही ‘मेगा ब्लॉक’ लेकर पटरियों के ऊपर पुल का ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
दिल्ली से आए 100 छोटे-बड़े गार्डर, निर्माण में आएगी तेजी
सरैया आरओबी परियोजना का काम देख रही गिरिराज कंस्ट्रक्शन कंपनी ने जानकारी दी है कि पुल के ऊपरी ढांचे (सुपरस्ट्रक्चर) के लिए लगभग सौ की संख्या में छोटे और बड़े लोहे के गार्डर मंगवाए गए हैं। ये गार्डर विशेष रूप से दिल्ली से ट्रेलरों के माध्यम से उन्नाव लाए गए हैं। इन गार्डरों को रेलवे ट्रैक के ठीक ऊपर क्रेन और अत्याधुनिक मशीनों की मदद से स्थापित किया जाएगा।
निर्माण एजेंसी के सुपरवाइजर बलराम यादव ने बताया कि सेतु निगम (Bridge Corporation) ने अपने कोटे का अधिकांश कार्य, जिसमें पिलर खड़े करना और एप्रोच रोड का ढांचा तैयार करना शामिल है, लगभग पूरा कर लिया है। अब गेंद रेलवे के पाले में है। रेलवे ट्रैक के ऊपर गार्डर रखने का काम बेहद तकनीकी और संवेदनशील होता है, इसलिए इसे नट-बोल्ट की सहायता से बहुत सावधानी से जोड़ा जाएगा।
रेलवे लेगा मेगा ब्लॉक: थमेगी ‘लाइफलाइन’ की रफ्तार
कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग उत्तर भारत की सबसे व्यस्त रेलवे लाइनों में से एक है। इस मार्ग पर हर 10 से 15 मिनट में शताब्दी, राजधानी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के साथ-साथ सैकड़ों मालगाड़ियाँ गुजरती हैं। ऐसे में पटरियों के ऊपर गार्डर रखने के लिए रेलवे को यातायात पूरी तरह ठप्प करना पड़ता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘मेगा ब्लॉक’ कहा जाता है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस कार्य के लिए जल्द ही एक विस्तृत शेड्यूल जारी किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि ब्लॉक के दौरान कुछ ट्रेनों को निरस्त किया जा सकता है, जबकि कुछ का मार्ग बदला जाएगा या उन्हें बीच के स्टेशनों पर रोका जाएगा। निर्माण एजेंसी और रेलवे के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि कम से कम समय में यह कार्य संपन्न हो सके और यात्रियों को कम से कम असुविधा हो।
जाम के झाम से मिलेगी बड़ी राहत
वर्तमान में सरैया रेलवे क्रॉसिंग क्षेत्र के लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। भारी रेल यातायात के कारण यह फाटक दिन भर में दर्जनों बार बंद होता है।
- मरीजों के लिए काल: एम्बुलेंस अक्सर इस फाटक पर फंसी रहती हैं, जिससे गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या कानपुर ले जाने में कीमती समय बर्बाद होता है।
- स्कूली बच्चों की परेशानी: सुबह और दोपहर के समय स्कूल बसों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
- व्यापारिक क्षति: लखनऊ-कानपुर मार्ग पर माल ढुलाई करने वाले वाहनों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे ईंधन की बर्बादी और समय की क्षति होती है।
आरओबी बन जाने के बाद, वाहन बिना किसी रुकावट के पुल के ऊपर से गुजर सकेंगे, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि क्रॉसिंग पर होने वाली संभावित दुर्घटनाओं पर भी पूर्ण विराम लग जाएगा।
तकनीकी चुनौतियां और समय-सीमा
सुपरवाइजर बलराम यादव ने स्पष्ट किया कि गार्डर स्थापित करने का काम मौसम पर भी निर्भर करता है। वर्तमान में यदि कोहरा या अत्यधिक ठंड जैसी परिस्थितियां बाधक नहीं बनती हैं, तो निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। गार्डरों को आपस में जोड़ने के लिए उच्च क्षमता वाली वेल्डिंग और नट-बोल्टिंग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे पुल की उम्र और मजबूती सुनिश्चित की जा सके।
क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय निवासी अमित शुक्ला ने बताया, “हम पिछले कई वर्षों से इस पुल का सपना देख रहे थे। फाटक बंद होने पर कभी-कभी आधे से एक घंटा खड़ा रहना पड़ता था। अब गार्डर आने से उम्मीद जगी है कि जल्द ही हम इस पुल पर सरपट दौड़ सकेंगे।”
आगे क्या?
रेलवे जल्द ही सुरक्षा ऑडिट के बाद मेगा ब्लॉक की तारीखों की घोषणा करेगा। जिला प्रशासन ने भी निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता न किया जाए। मकर संक्रांति और आगामी त्योहारों को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी यातायात डायवर्जन की योजना तैयार कर रहा है ताकि निर्माण के दौरान नीचे की सड़कों पर जाम न लगे।
सरैया आरओबी का निर्माण केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह उन्नाव के विकास की नई धुरी बनेगा, जो दो बड़े शहरों (कानपुर और लखनऊ) के बीच के सफर को और अधिक सुगम बना देगा।
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