बजरंग दल ने एसपी को सौंपा ज्ञापन
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव | उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आयोजित एक मेले में हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय का रुख किया और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। संगठन ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
क्या है पूरा विवाद?
बजरंग दल के पदाधिकारी नितिन शुक्ला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूरी घटना का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि 15 फरवरी को नवाबगंज ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ‘मही नईमपुर’ गांव में शिवरात्रि के उपलक्ष्य में एक भव्य मेले का आयोजन किया गया था। यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र था।
आरोप है कि उसी दौरान कुछ उपद्रवी किस्म के लोगों ने मेले में आकर वहां स्थापित मूर्तियों के प्रति न केवल आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि उन्हें ‘पाखंड’ करार दिया। नितिन शुक्ला के अनुसार, जब वहां मौजूद महंतों और साधु-संतों ने उन लोगों को समझाने की कोशिश की, तो वे आक्रोशित हो गए और उन्होंने महंतों के साथ मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते मेले का सौहार्दपूर्ण माहौल अशांत हो गया और वहां अफरा-तफरी मच गई।
बीच-बचाव करने वालों पर दर्ज हुआ मुकदमा
बजरंग दल के पदाधिकारियों का सबसे बड़ा आक्रोश पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर है। उनका आरोप है कि घटना के बाद पुरवा कोतवाली पुलिस ने वास्तविक उपद्रवियों पर कार्रवाई करने के बजाय, उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने वहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीच-बचाव किया था।
नितिन शुक्ला ने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और स्थानीय भक्तों पर दबाव बनाकर सात गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिसमें एससी/एसटी एक्ट जैसी धाराएं भी शामिल हैं। बजरंग दल का तर्क है कि जो लोग धार्मिक आस्था पर प्रहार कर रहे थे, उन्हें तो छोड़ दिया गया, लेकिन जो अपनी संस्कृति और संतों के सम्मान की रक्षा के लिए आगे आए, उन्हें ही फंसाया जा रहा है।
एसपी कार्यालय में भारी भीड़, निष्पक्ष जांच की मांग
शुक्रवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा। ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने पुलिस अधीक्षक से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- निष्पक्ष जांच: पूरे प्रकरण की पुन: निष्पक्ष और गहन जांच की जाए।
- सीसीटीवी और साक्ष्यों का परीक्षण: घटना के समय मौके पर मौजूद वीडियो फुटेज और सीसीटीवी साक्ष्यों की सत्यता की जांच की जाए ताकि असल दोषियों की पहचान हो सके।
- झूठे मुकदमों की वापसी: जिन निर्दोष लोगों को इस मामले में फंसाया गया है, उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- उपद्रवियों पर कार्रवाई: धार्मिक भावनाएं आहत करने और संतों के साथ मारपीट करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन और पुलिस का रुख
वहीं, इस मामले पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है और प्रकरण की फाइल को फिर से गंभीरता से देखा जा रहा है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, कानून व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
बढ़ता आक्रोश और संवेदनशीलता
इस घटना ने क्षेत्र में सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग भी इस बात से चिंतित हैं कि त्योहारों के दौरान होने वाली ऐसी घटनाएं न केवल शांति व्यवस्था को बाधित करती हैं, बल्कि आपसी भाईचारे में भी दरार पैदा करती हैं। बजरंग दल के इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि संगठन इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
अब सबकी निगाहें पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या वाकई पुलिस इस मामले में कोई नया मोड़ लेगी या फिर पुराना मुकदमा ही आधार बना रहेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिगत क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है।
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