उन्नाव पीड़िता का दर्द, सेंगर की बेटियों पर गंभीर आरोप
प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उन्नाव: न्याय की दहलीज पर खड़ी एक बेटी, जिसकी अस्मत को सत्ता के नशे में चूर भेड़ियों ने तार-तार किया, आज एक बार फिर चीख-चीख कर समाज और सिस्टम से सवाल पूछ रही है। उन्नाव रेप कांड की पीड़िता ने एक हृदयविदारक वीडियो जारी कर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की बेटियों और समर्थकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि उसकी पहचान को जानबूझकर सार्वजनिक कर उसका ‘चरित्र हनन’ किया जा रहा है, ताकि वह टूट जाए और न्याय की इस लंबी जंग से पीछे हट जाए।
सत्ता की विरासत और ‘चरित्र हनन’ की घिनौनी चाल
पीड़िता ने अपने वीडियो में सीधा निशाना कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर पर साधा है। पीड़िता का आरोप है कि जेल की सलाखों के पीछे से अपनी राजनैतिक जमीन खो चुके सेंगर अब अपनी बेटियों के जरिए ‘इमोशनल कार्ड’ खेल रहे हैं। पीड़िता ने कहा, “ऐश्वर्या बहन, तुम बड़ी नेता बनो, मेरी शुभकामनाएं हैं, पर अपने समर्थकों से मेरा चरित्र हनन मत करवाओ।”
पीड़िता का आरोप है कि सेंगर की बेटियां सोशल मीडिया पर उसकी पहचान उजागर कर रही हैं, जो न केवल अनैतिक है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन भी है। आरोप है कि यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि समाज की नज़रों में पीड़िता को ‘चरित्रहीन’ साबित कर दिया जाए और मुख्य आरोपी कुलदीप सेंगर को ‘निर्दोष’ बताया जा सके।
11 जनवरी का ‘जंतर-मंतर’ प्रदर्शन: न्याय की मांग या शक्ति प्रदर्शन?
11 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पीड़िता ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसके अनुसार, यह कोई जन-आंदोलन नहीं बल्कि कुलदीप सेंगर का ‘शक्ति प्रदर्शन’ है।
- न्यायपालिका पर दबाव: पीड़िता का आरोप है कि जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जुटाकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और न्यायपालिका को डराने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाले फैसलों को प्रभावित किया जा सके।
- राजनैतिक लॉन्चिंग: पीड़िता का दावा है कि इस पूरे ड्रामे के पीछे मुख्य मकसद ऐश्वर्या सेंगर को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार करना और सेंगर की राजनैतिक विरासत को बचाना है।
इंदौर से लेकर दिल्ली तक: बेटियों की सुरक्षा पर सवाल
‘Truth India Times’ ने पहले भी आगाह किया था कि क्या सेंगर की बेटी का इंटरव्यू और बयान किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? आज पीड़िता के बयानों ने इस अंदेशे पर मुहर लगा दी है। जब से कुलदीप सेंगर को सशर्त जमानत मिली है, तब से पीड़िता और उसके परिवार पर मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है। 29 दिसंबर को जंतर-मंतर पर हुआ हंगामा और पीड़िता को जबरन पुलिस द्वारा हटाए जाने की तस्वीरें आज भी न्याय प्रेमियों के मन में चुभ रही हैं। एक्टिविस्ट योगिता भयाना का कहना है कि सरकार और प्रशासन दोषियों को बचाने में लगा है, जबकि बेटियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है।
कानून की बारीकियां और CBI की जांच
कुलदीप सेंगर की बेटियों द्वारा सोशल मीडिया पर ‘सबूत’ होने के दावों पर पीड़िता ने करारा प्रहार किया। उसने सवाल किया कि यदि कोई ठोस सबूत थे, तो उन्हें CBI या कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखा गया? तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाते समय उसे ‘मृत्यु तक जेल’ में रहने का आदेश दिया था। CBI की लंबी जांच और कोर्ट के आदेश के बाद भी सोशल मीडिया पर खुद को ‘जांच अधिकारी’ बताना न्यायपालिका का अपमान है।
पीड़िता की बेबसी: “मेरे पास क्या है?”
वीडियो के अंत में पीड़िता की बेबसी साफ झलकती है। उसने कहा, “आप लोग क्षत्रिय समाज की बात करते हो, मैं भी उसी समाज से हूं। आपके पास पैसा है, सत्ता है, राजनीति है, लेकिन मेरे पास सिर्फ न्याय की उम्मीद है। मेरे पास एक बेटा है, अगर आप चाहते हैं कि मैं जीवित रहूं, तो ये गंदा खेल बंद करो।”
‘Truth India Times’ के कड़े सवाल:
- पहचान उजागर करने पर चुप्पी क्यों?: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों पर अब तक आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- सशर्त जमानत का दुरुपयोग?: क्या जमानत मिलने के बाद आरोपी के समर्थक पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना देकर जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं कर रहे?
- प्रशासन का दोहरा रवैया: पीड़िता जब इंडिया गेट पर बैठती है तो उसे घसीटकर हटाया जाता है, लेकिन अपराधियों के समर्थन में होने वाले ‘शक्ति प्रदर्शन’ को अनुमति कैसे मिल जाती है?
निष्कर्ष: यह मामला अब केवल एक बलात्कार के मुकदमे का नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जंग है—एक बेबस बेटी बनाम ताकतवर राजनैतिक रसूख। यदि आज फिर पीड़िता को सुरक्षा और सम्मान नहीं मिला, तो यह पूरे देश की बेटियों के हौसले को तोड़ देगा। ‘Truth India Times’ इस मामले की हर बारीकी पर नज़र रखेगा ताकि न्याय की ज्योति बुझने न पाए।
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