BSA कार्यालय पर फूंकी सरकारी आदेश की प्रतियां
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में बुधवार को शिक्षक राजनीति गरमा गई। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर सरकार द्वारा जारी किए गए हालिया आदेश के विरोध में शिक्षक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बुधवार शाम को भारी संख्या में शिक्षक बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन इतना उग्र था कि आक्रोशित शिक्षकों ने शासन के आदेश की प्रतियां तक फूंक डालीं।
‘टीईटी’ की अनिवार्यता पर तकरार
मामले की जड़ में सरकार का वह नया आदेश है, जिसमें सेवाकाल के दौरान कुछ विशेष श्रेणियों के शिक्षकों के लिए भी TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों का तर्क है कि जो शिक्षक वर्षों से विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी नियुक्ति मानक के अनुरूप हुई थी, उन पर अब इस तरह की परीक्षा थोपना मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ शिक्षक नेताओं ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर शिक्षकों से पात्रता परीक्षा की उम्मीद करना उनके अनुभव का अपमान है। शिक्षकों की मांग है कि पुराने अनुभवी शिक्षकों को इस नियम से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।
BSA कार्यालय परिसर में गूंजे नारे
बुधवार शाम ढलते ही उन्नाव का बीएसए कार्यालय परिसर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘शिक्षक एकता जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। जिले के विभिन्न ब्लॉक से आए सैकड़ों शिक्षकों ने कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार बिना किसी ठोस योजना के नित नए नियम थोप रही है, जिससे शिक्षकों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
आक्रोश व्यक्त करते हुए शिक्षकों ने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने एक स्वर में कहा, “जब हमारी नियुक्ति वैध तरीके से हुई है, तो अब पात्रता का नया प्रमाण पत्र क्यों माँगा जा रहा है?”
आदेश की प्रतियां फूंक जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब शिक्षकों के एक समूह ने सरकार के उस विवादास्पद आदेश की प्रतियों को आग के हवाले कर दिया। शिक्षकों ने प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दिया कि वे इस आदेश को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह केवल उन्नाव की लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश का शिक्षक इस मुद्दे पर एकजुट हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया या इसमें संशोधन कर छूट प्रदान नहीं की, तो वे राजधानी लखनऊ में बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगे।
क्या हैं शिक्षकों की मुख्य मांगें?
शिक्षक संघ ने बीएसए के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी तैयार किया है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को उठाया गया है:
- छूट का प्रावधान: सेवाकाल में 10 वर्ष से अधिक का समय बिता चुके शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से तत्काल छूट दी जाए।
- वरिष्ठता का सम्मान: शिक्षकों की पदोन्नति और अन्य लाभों को TET से न जोड़ा जाए।
- पारदर्शी नीति: शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने से पहले शिक्षक संगठनों के साथ वार्ता की जाए।
विभाग का पक्ष और आगामी रणनीति
इस पूरे मामले पर फिलहाल जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग के आला अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया था ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि यह तो महज एक सांकेतिक विरोध था। यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आगामी दिनों में स्कूलों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्नाव के शिक्षक अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और अपनी सेवा सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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