उन्नाव मतदाता सूची में 'महा-सफाई'
उन्नाव | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व ‘चुनाव’ की सुचिता और पारदर्शिता को लेकर उन्नाव जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिले में चलाए गए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची से 4,06,939 मतदाताओं के नाम चिन्हित कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह संख्या कोई मामूली आंकड़ा नहीं है, बल्कि जिले की कुल मतदाता संख्या का लगभग 17.50 प्रतिशत है। प्रशासन की इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना आने वाले चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
क्या है ASD श्रेणी और क्यों गिरी गाज?
प्रशासन ने यह कार्रवाई ASD (Absent, Shifted, Dead & Duplicate) श्रेणी के तहत की है। इसका मतलब है कि ये वे मतदाता हैं जो या तो अपने पते पर अनुपस्थित मिले, या शहर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, या फिर जिनका नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज (डुप्लीकेट) था।
अपर जिलाधिकारी (ADM) सुशील कुमार गोंड ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ‘अपात्रों’ को सूची से बाहर करना और ‘पात्रों’ को शामिल करना अनिवार्य है।
उन्नाव सदर में सबसे बड़ी ‘सर्जरी’: 25.75% वोटर आउट
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो सबसे चौंकाने वाली स्थिति उन्नाव सदर विधानसभा की है। यहां कुल 4,33,034 मतदाताओं में से 1,11,361 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। यानी अकेले सदर विधानसभा के करीब 25.72% वोटरों पर गाज गिरी है। यह जिले में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में हुई सबसे बड़ी कटौती है।
विधानसभा वार आंकड़ों का पूरा विश्लेषण
जिले की कुल मतदाता संख्या 23,25,053 है। विधानसभा वार हटाए गए नामों की स्थिति इस प्रकार है:
| विधानसभा क्षेत्र | कुल मतदाता | हटाए गए नाम (ASD श्रेणी) |
| उन्नाव (सदर) | 4,33,034 | 1,11,361 (सर्वाधिक) |
| भगवंतनगर | 4,20,381 | 70,526 |
| पुरवा | 4,19,696 | 66,107 |
| बांगरमऊ | 3,59,434 | 54,567 |
| मोहान | 3,46,132 | 52,969 |
| सफीपुर | 3,46,386 | 51,409 |
ग्राउंड जीरो पर BLO और BLA की मुस्तैदी
इस अभियान को पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तकनीक और जमीनी सर्वे का सहारा लिया है। ADM सुशील कुमार गोंड ने बताया कि जिले के शत-प्रतिशत मतदाताओं के घर-घर जाकर सर्वे प्रपत्रों का वितरण पूरा कर लिया गया है। पूरे डेटा का डिजिटाइजेशन हो चुका है और अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) दोबारा उन घरों का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं जहाँ ASD श्रेणी के मतदाता मिले हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सत्यापन की प्रक्रिया में कोई लापरवाही न बरती जाए। इसके लिए उप जिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जनप्रतिनिधियों और जनता की भागीदारी
प्रशासन का मानना है कि मतदाता सूची की शुद्धता केवल सरकारी कर्मचारियों के भरोसे संभव नहीं है। इसीलिए इस अभियान में ग्राम प्रधानों, पार्षदों और समाजसेवियों को भी जोड़ा गया है। सभी मतदान केंद्रों पर ASD सूचियाँ उपलब्ध करा दी गई हैं, ताकि आम जनता और राजनीतिक दल भी इनकी जांच कर सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में किसी भी प्रकार के ‘वोटर लिस्ट विवाद’ की संभावना खत्म हो जाएगी।
क्या होगा अगला कदम?
चिन्हित किए गए नामों को हटाने के साथ-साथ, प्रशासन नए पात्र मतदाताओं, विशेषकर युवाओं (18 वर्ष पूर्ण कर चुके) के नाम जोड़ने पर भी जोर दे रहा है। ADM के अनुसार, “हमारी नीति है—पात्र मतदाता छूटे नहीं और अपात्र शामिल न हों।” भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जो आगामी चुनावों की आधारशिला बनेगी।
Truth India Times की रिपोर्ट यह साफ करती है कि उन्नाव प्रशासन डिजिटल इंडिया के दौर में डेटा की शुद्धता को लेकर कितना गंभीर है। 4 लाख नामों का कटना एक स्वस्थ लोकतंत्र की ओर बढ़ता कदम है, ताकि ‘फर्जी वोटिंग’ की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सके।
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