उन्नाव में 'वोटों की सफाई' से मचा सियासी हड़कंप
प्रलभ शरण चौधरी | ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘सत्ता का द्वार’ कहे जाने वाले उन्नाव जनपद से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी 6 सीटों पर ‘क्लीन स्वीप’ कर इतिहास रचने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए भविष्य की राह अब चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। मतदाता सूची के ताजा संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के बाद जिले से कुल 4,06,939 मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। ये आंकड़े इसलिए चौंकाने वाले हैं क्योंकि कटे हुए नामों की संख्या कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत के अंतर (Victory Margin) से कहीं ज्यादा है।
उन्नाव सदर: जीत के अंतर से 3.5 गुना ज्यादा कटे नाम
सबसे हैरान करने वाले आंकड़े उन्नाव सदर विधानसभा सीट के हैं। यहाँ से भाजपा के कद्दावर नेता पंकज गुप्ता ने 31,427 मतों के अंतर से जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई थी। लेकिन नए आंकड़ों के अनुसार, सदर सीट से अकेले 1,11,361 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
यह संख्या विधायक पंकज गुप्ता की जीत के मार्जिन से लगभग 3.5 गुना अधिक है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो सदर सीट के कुल मतदाताओं का 25.72% हिस्सा अब मतदाता सूची से बाहर हो चुका है। यह जिले में किसी भी सीट पर हुई सबसे बड़ी कटौती है, जो आने वाले चुनाव में पूरे समीकरण को पलट कर रख सकती है।
क्या खतरे में है ‘क्लीन स्वीप’ का किला?
2022 में भाजपा ने आजादी के बाद पहली बार उन्नाव की सभी छह सीटों पर भगवा फहराया था। लेकिन अब 4 लाख से ज्यादा वोटों की ‘छंटनी’ ने विपक्षी दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है। नीचे दी गई तालिका स्पष्ट करती है कि कैसे कटे हुए नामों ने जीत के अंतर को पीछे छोड़ दिया है:
| विधानसभा सीट | जीत का अंतर (2022) | सूची से कटे नाम | अंतर (कटे नाम – जीत मार्जिन) |
| उन्नाव सदर | 31,427 | 1,11,361 | + 79,934 |
| बांगरमऊ | 16,025 | 54,567 | + 38,542 |
| पुरवा | 31,314 | 66,107 | + 34,793 |
| भगवंतनगर | 42,562 | 70,526 | + 27,964 |
| सफीपुर | 34,394 | 51,409 | + 17,015 |
| मोहान | 43,357 | 52,969 | + 9,612 |
बांगरमऊ और सफीपुर में खतरे की घंटी
बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र में श्रीकांत कटियार ने 16,025 वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन यहाँ 54,567 नाम काटे गए हैं। यानी जीत के अंतर से 38 हजार ज्यादा वोटर्स अब सूची में नहीं हैं। यही स्थिति सफीपुर और मोहान की भी है। मोहान में जहाँ भाजपा ने जिले की सबसे बड़ी जीत (43,357) दर्ज की थी, वहां भी कटे हुए नामों की संख्या (52,969) जीत के मार्जिन को पार कर गई है।
शुद्धिकरण या रणनीति? उठ रहे हैं सवाल
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है। मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं या जिनके नाम दो जगहों पर दर्ज (Duplicate) थे। इस प्रक्रिया के बाद जनपद में अब कुल 19,18,114 मतदाता शेष बचे हैं।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकता है। विपक्ष इस कटौती को सोची-समझी रणनीति बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे ‘स्वच्छ मतदाता सूची’ की ओर बढ़ता कदम मान रहा है।
निष्कर्ष: नए समीकरणों की आहट
4 लाख से ज्यादा वोटों की यह ‘सफाई’ महज कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन्नाव की जमीनी सियासत का भविष्य तय करेगी। यदि कटे हुए नामों में किसी विशेष वर्ग या विचारधारा के मतदाताओं की संख्या अधिक हुई, तो अगले चुनाव में भाजपा के ‘क्लीन स्वीप’ वाले अभेद्य किले में सेंध लगना तय है।
अब देखना यह होगा कि आगामी चुनावों में सियासी दल इन ‘गायब’ हुए वोटों की भरपाई कैसे करते हैं और क्या नए मतदाता इस बड़े अंतर को पाट पाएंगे?
About The Author
Discover more from Truth India Times
Subscribe to get the latest posts sent to your email.