विकास या विनाश? उन्नाव में ऐतिहासिक बसीरतगंज मार्ग बंद
प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में विकास की चमक के पीछे जनहित को रौंदने का एक गंभीर मामला सामने आया है। दही थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसीरतगंज मुख्य मार्ग को प्रशासन द्वारा अचानक बंद किए जाने से क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है। अंग्रेजों के जमाने से इस इलाके की जीवनरेखा रहे इस मार्ग को बंद किए जाने के विरोध में आज हजारों की संख्या में किसान, व्यापारी और ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि प्रशासन ‘विकास’ के नाम पर आम जनता के बुनियादी अधिकारों और आजीविका का गला घोंट रहा है।
जनहित बनाम एक्सप्रेसवे: क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ में मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण है। बताया जा रहा है कि सोनिक गांव के पास देश का सबसे बड़ा चौराहा (इंटरचेंज) बनाया जाना प्रस्तावित है। इस भव्य निर्माण के नक्शे में ऐतिहासिक बसीरतगंज मार्ग आड़े आ रहा था, जिसे बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था किए रातों-रात बंद कर दिया गया।
स्थानीय निवासियों का तर्क है कि विकास का स्वागत है, लेकिन वह विनाश की कीमत पर नहीं होना चाहिए। बसीरतगंज मार्ग केवल ईंट-पत्थरों का रास्ता नहीं है, बल्कि यह इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ है। इसके बंद होने से न केवल आवागमन बाधित हुआ है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के सामने रोटी-बेटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्कूली बच्चों और मरीजों पर संकट
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे गुजरते हैं। रास्ता बंद होने से बच्चों को अब कई किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा और शिक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। इतना ही नहीं, आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस का गांव तक पहुँचना अब नामुमकिन सा हो गया है। ग्रामीणों ने सवाल किया कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
किसानों और व्यापारियों की टूटती कमर
बसीरतगंज मार्ग पर कई बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थित हैं जो आसपास के दर्जनों गांवों में रसद और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं। मार्ग बंद होने से माल की ढुलाई ठप हो गई है, जिससे छोटे दुकानदारों और व्यापारियों की आजीविका पर संकट आ गया है।
वहीं, किसानों के लिए यह मार्ग किसी आपदा से कम नहीं है। किसान अपनी फसल मंडी तक ले जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते थे। अब वैकल्पिक मार्ग न होने के कारण उनकी लागत बढ़ गई है और समय की बर्बादी अलग से हो रही है। किसानों ने प्रशासन से तीखा सवाल पूछा है— “क्या यही वह विकास है जिसमें अन्नदाता को अपनी ही जमीन पर पराया बना दिया गया?”
प्रशासन की ‘अनदेखी’ ने भड़काया आक्रोश
विरोध की आग बुझाने के लिए सदर एसडीएम क्षितिज द्विवेदी मौके पर जरूर पहुँचे, लेकिन उनके व्यवहार ने आग में घी डालने का काम किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसडीएम ने उनकी पीड़ा सुनने के बजाय सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों और अधिकारियों के पक्ष को प्राथमिकता दी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी समस्याओं को सिरे से नकार दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और प्रशासन के लिए आम आदमी की सुविधा से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट्स का टाइमलाइन मायने रखता है।
सरकार की जवाबदेही पर बड़े सवाल
यह घटना सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है:
- वैकल्पिक मार्ग कहाँ है? किसी भी मुख्य मार्ग को बंद करने से पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन का यह दायित्व है कि वे जनता के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करें। यहाँ ऐसा क्यों नहीं किया गया?
- जन-परामर्श का अभाव: इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय लोगों से राय क्यों नहीं ली गई? क्या लोकतंत्र में जनता की सहमति का कोई मूल्य नहीं रह गया है?
- ऐतिहासिक विरासत की अनदेखी: अंग्रेजों के समय के इस ऐतिहासिक मार्ग का अपना एक महत्व है। इसे बिना किसी संरक्षण योजना के बंद करना हमारी विरासत के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।
आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह विरोध केवल शुरुआत है। यदि तत्काल प्रभाव से मार्ग को नहीं खोला गया या कोई पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो यह आंदोलन जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, निर्माण कार्य को सुचारू रूप से चलने नहीं दिया जाएगा।
निष्कर्ष: उन्नाव की यह घटना विकास की उस अवधारणा पर चोट करती है जो आम आदमी को हाशिए पर धकेल देती है। सरकार को यह समझना होगा कि एक्सप्रेसवे और चौराहे तभी सार्थक हैं जब वे जनता के जीवन को सुगम बनाएं, न कि दुर्गम। फिलहाल, बसीरतगंज की जनता न्याय की आस में सड़कों पर डटी है।
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