CMO दफ्तर में 'आशा' का आक्रोश
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
कानपुर: कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का कार्यालय सोमवार को सैकड़ों की संख्या में जुटी आशा वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन के कारण छावनी में तब्दील हो गया। अपनी मांगों को लेकर आशा वर्कर्स ने जमकर नारेबाजी की और दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शनकारी महिलाओं का मुख्य गुस्सा पिछले सात महीने से रुका हुआ मानदेय (वेतन) न मिलने और कम वेतन के साथ-साथ अधिकारियों के ‘तानाशाही’ रवैये को लेकर था।
आशा वर्कर्स ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होगी, उनका यह धरना लगातार जारी रहेगा। इस विरोध प्रदर्शन के कारण सीएमओ कार्यालय का सामान्य कामकाज घंटों बाधित रहा।
विरोध का प्रमुख कारण: सात महीने का मानदेय रुका
सोमवार की सुबह होते ही जिले भर से आशा वर्कर्स एकत्रित होकर CMO दफ्तर पहुंचीं। उनके हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर ‘सेवा का भुगतान करो’, ‘मानदेय बढ़ाओ’ और ‘नौकरी से निकालना बंद करो’ जैसे नारे लिखे थे।
प्रदर्शनकारी आशा वर्कर्स ने मीडिया को बताया कि उन्हें पिछले सात महीने से उनका मानदेय नहीं मिला है। एक वर्कर ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, “हम अपनी जान जोखिम में डालकर, घर-घर जाकर टीकाकरण से लेकर प्रसव और स्वास्थ्य सर्वे का काम करते हैं। हमें सरकार की रीढ़ कहा जाता है, लेकिन हमारी अपनी रीढ़ टूट रही है। घर का चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है, बच्चों की फीस बाकी है। हम किससे मदद मांगे?”
वेतन वृद्धि की मांग: ‘इतने कम पैसों में गुजारा असंभव’
रुके हुए मानदेय के साथ ही, आशा वर्कर्स की दूसरी बड़ी मांग उनके मासिक मानदेय में वृद्धि करना था। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें जो मामूली मानदेय दिया जाता है, वह आज की महंगाई और उनके काम के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरा है।
उन्होंने कहा, “हम एक फुलटाइम कर्मचारी की तरह काम करते हैं, लेकिन हमें दिहाड़ी मजदूर से भी कम भुगतान मिलता है। सरकार को हमारी सेवाओं का मूल्यांकन करना चाहिए और हमारा मानदेय इतना बढ़ाना चाहिए कि हम सम्मानजनक जीवन जी सकें। महंगाई के दौर में इतने कम पैसों में गुजारा करना असंभव है।”
नौकरी से निकालने की धमकी और शोषण का आरोप
विरोध प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि जब वे अपनी सैलरी या मानदेय की बात करती हैं, तो उन्हें अधिकारियों की तरफ से धमकाया जाता है।
एक आशा वर्कर ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सीएमओ कार्यालय के कुछ अधिकारी हमसे अभद्र भाषा में बात करते हैं और जब हम मानदेय मांगते हैं, तो साफ कहते हैं कि ज्यादा आवाज उठाई तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा और किसी और को रख लिया जाएगा। हमारी सेवा की कद्र करने के बजाय हमें धमकाया जाता है, यह कैसा न्याय है?”
CMO ने दिया आश्वासन, पर शांत नहीं हुईं वर्कर्स
विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) स्वयं आशा वर्कर्स से बात करने के लिए बाहर आए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से ज्ञापन लिया और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया गया है।
CMO ने कहा, “हमने उनकी सभी मांगों को सुना है। रुके हुए मानदेय के भुगतान की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है और जल्द ही उनका बकाया चुका दिया जाएगा। मानदेय वृद्धि और अधिकारियों के दुर्व्यवहार से संबंधित ज्ञापन को भी तत्काल प्रभाव से शासन (State Government) को भेजा जा रहा है।”
हालांकि, CMO के इस आश्वासन से भी आशा वर्कर्स शांत नहीं हुईं। उनका कहना था कि उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित में समय सीमा चाहिए। पिछली बार भी ऐसे ही आश्वासन दिए गए थे, लेकिन महीनों तक भुगतान नहीं हुआ।
धरना जारी: आर-पार की लड़ाई का ऐलान
आशा वर्कर्स ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें बकाया भुगतान की ठोस तारीख नहीं दी जाती और मानदेय वृद्धि के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक वे धरने पर बैठी रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो वे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बहिष्कार करेंगी, जिससे टीकाकरण और सर्वे जैसे जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं।
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के कारण सीएमओ कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
आशा वर्कर्स की मुख्य मांगें:
- पिछले 7 महीने से रुका हुआ मानदेय तत्काल जारी किया जाए।
- मासिक मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
- अधिकारियों द्वारा शोषण और नौकरी से निकालने की धमकी पर रोक लगाई जाए।
- उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
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