बच्चों की थाली रही खाली तो भड़के DM, BDO और BEO समेत कई बड़े अफसरों का रोका वेतन
Truth India Times Digital Desk
प्रलभ शरण चौधरी/कानपुर।
कानपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ने लगी है। कानपुर के जिलाधिकारी (DM) जितेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए खंड विकास अधिकारी (BDO), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और ADO पंचायत सहित कई जिम्मेदार अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया है। डीएम की इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है।
समीक्षा बैठक में खुली लापरवाही की पोल
सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ‘ऑपरेशन कायाकल्प’, ‘निपुण भारत मिशन’ और ‘मध्याह्न भोजन योजना’ की प्रगति की बारीकी से जांच कर रहे थे। समीक्षा के दौरान जब मिड-डे मील के आंकड़े सामने आए, तो पता चला कि कई स्कूलों में बच्चों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल पा रहा है।
अधिकारियों द्वारा दी गई रिपोर्ट और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर देख डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण और शिक्षा के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
डीएम ने कार्य में शिथिलता बरतने और शासन की प्राथमिकताओं को नजरअंदाज करने के आरोप में निम्नलिखित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए:
- BDO (खंड विकास अधिकारी)
- BEO (खंड शिक्षा अधिकारी)
- ADO पंचायत
इन अधिकारियों का वेतन तब तक के लिए रोक दिया गया है जब तक कि वे मिड-डे मील और स्कूलों के कायाकल्प की प्रगति में सुधार नहीं लाते। डीएम ने साफ लहजे में कहा कि केवल फाइलों पर प्रगति दिखाने से काम नहीं चलेगा, असर जमीन पर दिखना चाहिए।
‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और ‘निपुण भारत’ पर भी फटकार
बैठक में केवल मिड-डे मील ही नहीं, बल्कि स्कूलों के बुनियादी ढांचे (ऑपरेशन कायाकल्प) को लेकर भी चर्चा हुई। कई ब्लॉकों में स्कूलों की रंगाई-पुताई, शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था अधूरी पाई गई। ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत बच्चों के सीखने की क्षमता और शिक्षकों की उपस्थिति की समीक्षा करते हुए डीएम ने निर्देश दिया कि जो शिक्षक या अधिकारी फील्ड विजिट नहीं कर रहे हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाए।
सामुदायिक सहभागिता की कमी पर जताई नाराजगी
डीएम ने बैठक में सामुदायिक सहभागिता की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) के साथ समन्वय स्थापित करना ADO पंचायत और BDO की जिम्मेदारी है। यदि स्कूलों में टाइल्स, बिजली या बाउंड्री वॉल का काम अधूरा है, तो इसके लिए संबंधित पंचायत अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
डीएम का कड़ा संदेश: “बच्चों का हक मारना अपराध है”
बैठक के समापन पर जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मध्याह्न भोजन योजना केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बचाना और उन्हें स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना है। यदि किसी भी स्कूल में मेनू के अनुसार भोजन नहीं बनता या राशन की कमी पाई जाती है, तो संबंधित ब्लॉक के बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह केवल वेतन रोकने की कार्रवाई है, यदि सुधार नहीं हुआ तो प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) और विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: नवीन सभागार, सरसैया घाट, कानपुर।
- कारण: मिड-डे मील में लापरवाही और सरकारी योजनाओं की धीमी प्रगति।
- कार्रवाई: BDO, BEO और ADO पंचायत का वेतन रोका गया।
- फोकस: ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत मिशन।
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