'श्रीअन्न' से संवरेगा छात्रों का भविष्य और स्वास्थ्य, कृषि विश्वविद्यालय में मोटे अनाजों पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA), कानपुर के प्रसार निदेशालय में ‘पोषक अनाजों’ (Millet) के महत्व और उनकी तकनीकी बारीकियों पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि के छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें भविष्य की सुपरफूड कही जाने वाली ‘श्रीअन्न’ फसलों की खेती व उनके विपणन की तकनीकी जानकारियां देना था।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि और विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. आर.के. यादव ने मुख्य अतिथि को अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान परिसर में कृषि वैज्ञानिकों और छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
श्रीअन्न: मानव और मृदा स्वास्थ्य का रक्षक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए ‘श्रीअन्न’ की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “श्रीअन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और मृदा (मिट्टी) के स्वास्थ्य के लिए एक वरदान है। ये फसलें जलवायु अनुकूल (Climate Resilient) हैं, जो कम पानी और विषम परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्वार, बाजरा, रागी, सावा और कोदों जैसे अनाजों को हमें अपनी थाली में अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि ये अनाज ग्लूटेन-मुक्त होते हैं और फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम व आयरन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जिसके कारण इन्हें विश्व स्तर पर ‘सुपरफूड’ के रूप में मान्यता मिल रही है और सरकार भी इन्हें लगातार बढ़ावा दे रही है।
उत्तर प्रदेश: मोटे अनाज का उभरता हुआ हब
निदेशक शोध डॉ. आर.के. यादव ने देश और प्रदेश के कृषि आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि भारत में श्रीअन्न का कुल रकबा लगभग 69.70 लाख हेक्टेयर (वर्ष 2023-24) तक पहुंच गया है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और राजस्थान के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बनकर उभरा है।
यूपी में मोटे अनाज की खेती का रकबा लगभग 12.45 मिलियन हेक्टेयर (कुल हिस्सेदारी का लगभग 8.06%) है। डॉ. यादव ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मोटे अनाज की खेती में बढ़ता निवेश और मांग किसानों व भविष्य के कृषि उद्यमियों के लिए मुनाफे का बड़ा द्वार खोल रही है।
छात्रों को मिली तकनीकी जानकारियां
अनुवांशिकी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय यादव ने अनाज के उच्च पोषण मान पर चर्चा की, जबकि कार्यक्रम की आयोजक सचिव डॉ. श्वेता ने विभिन्न श्रीअन्न फसलों की बुवाई, प्रबंधन और कटाई के बाद की तकनीकों के बारे में विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि कैसे कोदो, कुटकी, कंगनी और सांवा जैसी विलुप्त होती फसलों को पुनर्जीवित कर पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
प्रमाण पत्र वितरण और सम्मान
प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों की योग्यता और भागीदारी को देखते हुए छात्र-छात्राओं व फैकल्टी सदस्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। शोध छात्रा वैष्णवी ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। इस महत्वपूर्ण शैक्षिक अवसर पर डॉ. लोकेंद्र, डॉ. सोमवीर, डॉ. सीमा सोनकर सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ प्रोफेसर और वैज्ञानिक उपस्थित रहे, जिन्होंने छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण ने छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें यह भी समझाया कि कैसे वे कृषि के क्षेत्र में नए स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं। श्रीअन्न की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन (मूल्य संवर्धन) के जरिए छात्र खुद को स्वावलंबी बना सकते हैं।
मुख्य विशेषताएं:
- विषय: पोषक अनाजों (श्रीअन्न) पर एक दिवसीय प्रशिक्षण।
- प्रमुख उपस्थिति: डॉ. संजय सिंह (महानिदेशक, UPCAR), डॉ. आर.के. यादव।
- मुख्य संदेश: श्रीअन्न है भविष्य का सुपरफूड, यूपी बना दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक।
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