सरकारी स्कूल की जमीन पर जल निगम का 'कब्जा'
Unnao/Truth India Times Digital Desk
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के श्रीनगर क्षेत्र में सरकारी स्कूल की जमीन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मझरा पीपरखेड़ा एहतमाली स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की जमीन पर जल निगम द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य पर विद्यालय प्रशासन ने कड़ा ऐतराज जताया है। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका ने जल निगम पर परिसर की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए गंगाघाट कोतवाली में तहरीर दी है। इस घटना के बाद से शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के बीच खींचतान शुरू हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
उन्नाव के वार्ड संख्या 27 में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय, मझरा पीपरखेड़ा एहतमाली काफी समय से अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका शिखा के अनुसार, स्कूल परिसर की जमीन का सीमांकन पहले ही किया जा चुका था, लेकिन बजट या अन्य कारणों से बाउंड्री वॉल (चाहरदीवारी) का निर्माण नहीं हो पाया। इसी खाली जगह का फायदा उठाकर अब जल निगम वहां पक्का निर्माण करने की कोशिश कर रहा है।
जल निगम और स्कूल के बीच ‘नींव’ का विवाद
शिक्षिका ने बताया कि कुछ समय पहले जल निगम ने विद्यालय परिसर के एक हिस्से में पानी की टंकी का निर्माण किया था। चूंकि पानी की टंकी एक सार्वजनिक सेवा है, इसलिए विद्यालय प्रशासन और ग्रामीणों ने बच्चों के हित और गांव की जलापूर्ति को देखते हुए उस समय कोई विरोध नहीं किया। लेकिन अब मामला बढ़ गया है।
जल निगम के ठेकेदार ने अब टंकी के पास ही ऑपरेटर कक्ष और जनरेटर कक्ष बनाने के लिए गहरी नींव खुदवाना शुरू कर दिया है। यह निर्माण उस जमीन पर हो रहा है जो विद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज है और जिसका उपयोग बच्चे खेलकूद के लिए करते हैं।
बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर संकट
प्रधान शिक्षिका शिखा ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बेहद गंभीर तर्क रखे हैं। उनका कहना है कि:
- खेल का मैदान: जिस जगह नींव खोदी गई है, वह बच्चों के खेलने का एकमात्र खुला स्थान है। निर्माण होने से बच्चों के पास खेलने की जगह नहीं बचेगी।
- स्मार्ट क्लास की योजना: विभाग ने इस खाली भूमि पर भविष्य में कंप्यूटर कक्ष और ‘स्मार्ट क्लास’ बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यदि यहां जल निगम का कब्जा हो गया, तो स्कूल का विस्तार रुक जाएगा।
- सुरक्षा का मुद्दा: स्कूल परिसर के भीतर जनरेटर कक्ष और बाहरी ऑपरेटरों का आना-जाना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है।
प्रशासन की पिछली कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
उल्लेखनीय है कि इस विद्यालय की जमीन पहले भी विवादों में रही है। पूर्व में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष अपूर्वा दुबे ने इस भूमि का सीमांकन कराया था। वहीं, तत्कालीन एसडीएम हिमांशु गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटवाया था। इतनी मशक्कत के बाद खाली हुई जमीन पर अब सरकारी विभाग (जल निगम) द्वारा ही निर्माण शुरू कर देने से स्कूल प्रशासन आहत है।
“ठेकेदार नहीं मान रहे बात”
शिक्षिका का आरोप है कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में कई बार पत्र लिखे और मौखिक रूप से भी ठेकेदार को काम रोकने को कहा। लेकिन ठेकेदार ने उनकी बातों को अनसुना कर निर्माण कार्य जारी रखा। थक-हारकर उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी।
पुलिस और राजस्व टीम करेगी फैसला
मामले की गंभीरता को देखते हुए गंगाघाट कोतवाली प्रभारी अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रधान शिक्षिका की तहरीर मिल गई है। पुलिस ने फिलहाल काम रुकवाने की सलाह दी है और स्पष्ट किया है कि यह मामला राजस्व विभाग से जुड़ा है। जल्द ही पुलिस और राजस्व (लेखपाल/कानूनगो) की संयुक्त टीम मौके पर जाकर पैमाइश करेगी। यदि जमीन स्कूल की निकली, तो जल निगम को वहां से निर्माण हटाना होगा।
ग्रामीणों और अभिभावकों में रोष
स्कूल की जमीन पर हो रहे इस निर्माण को लेकर बच्चों के अभिभावकों में भी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी की टंकी जरूरी है, लेकिन वह स्कूल की जमीन दबाकर नहीं बननी चाहिए। गांव में अन्य खाली जमीनें उपलब्ध हैं, जहां ऑपरेटर कक्ष बनाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: उच्च प्राथमिक विद्यालय, मझरा पीपरखेड़ा एहतमाली, उन्नाव।
- विवाद: जल निगम द्वारा स्कूल की जमीन पर ऑपरेटर व जनरेटर कक्ष का निर्माण।
- शिकायतकर्ता: प्रधान शिक्षिका शिखा।
- प्रशासनिक रुख: राजस्व टीम के जरिए पैमाइश के बाद होगी कार्रवाई।
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