अतर्रा में धान खरीद केंद्रों पर पसरा सन्नाटा: सरकारी दावों की खुली पोल
Banda/Truth India Times Digital Desk
अतर्रा (बांदा)। बुंदेलखंड के किसान एक बार फिर व्यवस्था की बेरुखी और प्रशासनिक सुस्ती की मार झेल रहे हैं। अतर्रा क्षेत्र की विभिन्न सहकारी समितियों के अंतर्गत संचालित धान क्रय केंद्रों पर खरीद की कछुआ गति ने किसानों की कमर तोड़ दी है। एक ओर जहां सरकार किसानों को उनकी उपज का ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) दिलाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं धरातल पर अतर्रा के किसानों को आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रों पर महीनों की मेहनत से उपजाए गए धान की फसल को बेचने के लिए किसानों को हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है।
एमएसपी (MSP) से दूर, औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी
क्रय केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्थाओं का सीधा फायदा बिचौलिए और आढ़ती उठा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर खरीद इतनी धीमी है कि उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार में निजी व्यापारियों को धान बेचना पड़ रहा है। सरकारी केंद्रों पर जहाँ धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होनी चाहिए, वहीं बिचौलिए किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर फसल को काफी कम दामों में खरीद रहे हैं। इससे किसानों को लागत निकालना भी दूभर हो गया है।
बारदाने की कमी और कर्मचारियों की मनमानी
धान खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम यह है कि किसान अपनी ट्रॉली लेकर केंद्रों पर खड़े हैं, लेकिन उन्हें कभी बारदाने (बोरों) की कमी तो कभी कर्मचारियों की अनुपस्थिति का बहाना बनाकर लौटा दिया जा रहा है। किसान रामू और रज्जन ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए बताया कि वे कई दिनों से केंद्र के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार सर्द रातें खुले आसमान के नीचे गुजारने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।
इन किसानों ने बयां किया अपना दर्द
केंद्र पर मौजूद किसान पप्पू, अरविंद और सूरज सहित दर्जनों अन्नदाताओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण और टोकन लेने के बावजूद खरीद प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है। किसानों का आरोप है कि:
- केंद्रों पर नमी के नाम पर धान को रिजेक्ट किया जा रहा है।
- तौल में देरी की जाती है ताकि किसान परेशान होकर वापस चला जाए।
- कुछ प्रभावशाली लोगों का धान तुरंत तौला जा रहा है, जबकि छोटे किसानों को अनदेखा किया जा रहा है।
आर्थिक संकट में घिरे किसान
धान की फसल बेचकर ही किसानों को अगली फसल यानी रबी (गेहूं) की बुवाई के लिए बीज और खाद का इंतजाम करना होता है। खरीद में हो रही देरी के कारण किसानों के पास नकदी की भारी कमी हो गई है। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, अब साहूकारों का दबाव और अगली फसल की चिंता उन्हें मानसिक तनाव में डाल रही है। अतर्रा के किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो क्षेत्र के सैकड़ों परिवार दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
सहकारी समितियों और विपणन विभाग के आला अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि, कागजों पर खरीद के आंकड़े दिखाए जा रहे हैं, लेकिन अतर्रा की जमीनी हकीकत इन आंकड़ों से कोसों दूर है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी किसानों को अखर रही है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही धान की सुचारू खरीद शुरू नहीं हुई और उन्हें एमएसपी का लाभ नहीं मिला, तो वे तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष और समाधान की मांग
अतर्रा के किसानों की मांग है कि:
- क्रय केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बारदाने उपलब्ध कराए जाएं।
- तौल की मशीनों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि भीड़ कम हो।
- खरीद की समय सीमा बढ़ाई जाए और नमी मापन के नाम पर किसानों का उत्पीड़न बंद हो।
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