बांदा में रोडवेज की ‘जनता बसें’ भरेंगी फर्राटा: 10% सस्ता होगा सफर, डग्गामार वाहनों से मिलेगी मुक्ति; 90 बसों का हुआ चयन

बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में आवागमन की समस्या को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) ने एक बड़ी पहल की है। बांदा डिपो अब जिले के ग्रामीण रूटों पर ‘जनता बसों’ का संचालन शुरू करने जा रहा है। इन बसों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इनका किराया सामान्य बसों की तुलना में 10 प्रतिशत कम होगा। इस फैसले से न केवल ग्रामीणों की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि उन्हें डग्गामार और निजी वाहनों की मनमानी से भी निजात मिलेगी।

90 बसों का बेड़ा तैयार, जल्द शुरू होगा संचालन

बांदा रोडवेज डिपो के प्रबंधक संदीप अग्रवाल ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में परिवहन सेवा को सुदृढ़ करने के लिए 90 रोडवेज बसों को ‘जनता बसों’ के रूप में चुना गया है। वर्तमान में इन बसों के संचालन के लिए ग्रामीण रूटों के निर्धारण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। परिवहन निगम का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द इन बसों को सड़कों पर उतार दिया जाए ताकि दूर-दराज के गांवों को शहर से सीधे जोड़ा जा सके।

10% की छूट: जानें किसे और कैसे मिलेगा लाभ?

‘जनता बसों’ के किराए में मिलने वाली 10 प्रतिशत की छूट को लेकर विभाग ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है।

  • रूट सीमा: किराए में इस छूट का लाभ केवल संबंधित ग्रामीण रूट से लेकर रोडवेज डिपो (शहर) तक की यात्रा पर ही मिलेगा।
  • सस्ता सफर: यदि सामान्य बस का किराया किसी रूट पर 50 रुपये है, तो जनता बस में उसी सफर के लिए यात्रियों को लगभग 45 रुपये ही चुकाने होंगे। यह बचत रोजाना सफर करने वाले दूध विक्रेताओं, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

डग्गामार वाहनों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

वर्तमान में बांदा के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी बसों की पहुंच न होने के कारण ग्रामीण पूरी तरह से निजी वाहनों और डग्गामार टैक्सियों पर निर्भर हैं। निजी वाहन संचालक अक्सर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं और क्षमता से अधिक सवारियां बैठाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को इन वाहनों में सफर करने में काफी असुरक्षा और असुविधा महसूस होती है। ‘जनता बसों’ के आने से सुरक्षित और सुलभ यात्रा का मार्ग प्रशस्त होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण रूटों पर सरकारी बसों के बढ़ने से स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। किसान अपनी उपज लेकर आसानी से मंडी पहुंच सकेंगे और गांव के छात्र उच्च शिक्षा के लिए शहर के कॉलेजों तक समय पर पहुंच पाएंगे।

अंतिम चरण में रूट निर्धारण का काम

निर्वाचन और अन्य प्रशासनिक कार्यों के बीच रोडवेज विभाग तेजी से उन रूटों की मैपिंग कर रहा है जहाँ यात्रियों की संख्या अधिक है लेकिन बसों की उपलब्धता कम है। प्रबंधक संदीप अग्रवाल के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों के भीतर इन रूटों की सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी और विधिवत रूप से बसों का संचालन शुरू हो जाएगा।

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