कानपुर में खौफनाक 'डिजिटल अरेस्ट': इंजीनियर को 70 दिनों तक कमरे में कैद रखा, 53 लाख ठगे
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
उत्तर प्रदेश के कानपुर से साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। ठगों ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को डरा-धमकाकर 70 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा और उनके बैंक खातों से 53 लाख रुपये पार कर दिए। यह मामला न केवल ठगी का है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा है, जहां पीड़ित को घर से बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी दी गई और यहां तक कि उन्हें ठीक से खाना भी नहीं खाने दिया गया।
3 अक्टूबर, सुबह 9:59 बजे से शुरू हुआ खेल
इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत 3 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह ठीक 9:59 बजे हुई। पीड़ित इंजीनियर के पास एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का अधिकारी बताया। ठगों ने इंजीनियर को झांसा दिया कि उनके नाम से भेजे गए एक पार्सल में नशीले पदार्थ और अवैध दस्तावेज मिले हैं। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें तुरंत स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर जुड़ने को कहा गया।
70 दिनों तक कैमरे की नजर में कैद
इंजीनियर को डराया गया कि वह एक बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय केस में फंस चुके हैं। ठगों ने उन्हें आदेश दिया कि वह अपने लैपटॉप का कैमरा 24 घंटे ऑन रखेंगे और किसी को भी इस बारे में नहीं बताएंगे।
- बाहर जाने पर पाबंदी: ठगों ने धमकी दी कि अगर उन्होंने घर का दरवाजा खोला या बालकनी में गए, तो बाहर खड़े शूटर उन्हें मार देंगे।
- भोजन पर नियंत्रण: प्रताड़ना का आलम यह था कि ठग वीडियो कॉल पर नजर रखते थे कि इंजीनियर क्या कर रहे हैं। उन्हें अपनी मर्जी से खाना खाने तक की अनुमति नहीं थी। वह घंटों एक ही जगह बैठे रहने को मजबूर थे।
टुकड़ों में ऐंठे 53 लाख रुपये
डिजिटल अरेस्ट के दौरान, साइबर अपराधियों ने इंजीनियर को “केस से नाम हटाने” और “जांच” के नाम पर डराया। ठगों ने उनके सेविंग अकाउंट, एफडी (FD) और यहां तक कि पर्सनल लोन तक लेकर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर किया। 70 दिनों के भीतर, अलग-अलग किस्तों में इंजीनियर ने कुल 53 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में भेज दिए।
ऐसे टूटा ठगों का जाल
जब इंजीनियर के पास पैसे पूरी तरह खत्म हो गए और ठगों ने और दबाव बनाना शुरू किया, तब उन्हें संदेह हुआ। ठगों की मानसिक पकड़ से बाहर निकलने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और पुलिस की साइबर सेल से संपर्क किया। पुलिस भी यह जानकर हैरान रह गई कि किसी व्यक्ति को इतने लंबे समय तक डिजिटल माध्यम से बंधक बनाकर रखा जा सकता है।
पुलिस की चेतावनी: सावधान रहें
कानपुर पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने इस घटना के बाद हाई अलर्ट जारी किया है। पुलिस का कहना है कि:
- कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को “गिरफ्तार” या “अरेस्ट” नहीं करती।
- “डिजिटल अरेस्ट” जैसा भारत के कानून में कोई प्रावधान नहीं है।
- अगर कोई आपको वीडियो कॉल पर कैमरा ऑन रखने या किसी से बात न करने को कहे, तो तुरंत कॉल काटें और 1930 पर रिपोर्ट करें।
कानपुर साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है और उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू की है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
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