कानपुर फर्जी डिग्री कांड: STF ने नैनीताल से दबोचा ‘भगोड़ा’ अधिवक्ता आशीष शुक्ला, 26 दिनों बाद पुलिस के हाथ लगा मुख्य आरोपी

कानपुर/नैनीताल। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पिछले करीब एक महीने से पुलिस को चकमा दे रहे अधिवक्ता आशीष शुक्ला को उत्तराखंड के नैनीताल से गिरफ्तार कर लिया है। फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों (Fake Degrees) के आधार पर एलएलबी में दाखिला लेने और फिर वकालत करने के मामले में आशीष शुक्ला मुख्य आरोपी है। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद वह पिछले 26 दिनों से फरार चल रहा था। एसटीएफ की टीम उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर कानपुर रवाना हो चुकी है।

फर्जी डिग्री के खेल का भंडाफोड़

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब जांच के दौरान पता चला कि आशीष शुक्ला ने वकालत की डिग्री हासिल करने के लिए जिन शैक्षणिक दस्तावेजों और मार्कशीट का सहारा लिया था, वे पूरी तरह फर्जी थे। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न केवल उसने कानून की पढ़ाई की, बल्कि बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर वर्षों से अदालतों में वकालत भी कर रहा था। इस खुलासे के बाद कानूनी गलियारों और बार एसोसिएशन में हड़कंप मच गया था।

26 दिनों से चल रहा था ‘चूहे-बिल्ली’ का खेल

पुलिस ने जब इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की और आशीष की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए, तो वह भूमिगत हो गया। कानपुर पुलिस की टीमें उसे तलाशने में नाकाम रहीं, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ को जिम्मेदारी सौंपी गई। आशीष शुक्ला बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। उसने कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगाने की भी कोशिश की थी, लेकिन एनबीडब्ल्यू (NBW) जारी होने के बाद उसकी मुश्किलें बढ़ गई थीं।

नैनीताल में छिपे होने की मिली थी सटीक लोकेशन

एसटीएफ की टीम को सर्विलांस और मुखबिरों के जरिए सूचना मिली थी कि आशीष शुक्ला अपनी पहचान छुपाकर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के एक गेस्ट हाउस में शरण लिए हुए है। इसी सूचना पर एसटीएफ की एक विशेष टीम ने नैनीताल में जाल बिछाया। बुधवार देर शाम टीम ने सटीक घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के वक्त आरोपी ने भागने की कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहा।

कानपुर में होगी गहन पूछताछ

एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक, आशीष शुक्ला को कानपुर लाने के बाद उसे संबंधित कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस उसकी रिमांड की मांग भी कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी डिग्री बनाने के इस बड़े सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

  • क्या विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की इसमें मिलीभगत थी?
  • क्या आशीष के साथ कुछ अन्य अधिवक्ताओं ने भी इसी तरह की फर्जी डिग्रियां हासिल की हैं?
  • फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला ‘मास्टरमाइंड’ कौन है?

वकीलों के बीच चर्चा का विषय

आशीष शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद कानपुर कचहरी में भी हलचल तेज हो गई है। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा है कि इस तरह के मामलों से वकालत जैसे पवित्र पेशे की छवि धूमिल होती है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने का साहस न कर सके।


निष्कर्ष: बड़ा खुलासा होने की उम्मीद

आशीष शुक्ला की गिरफ्तारी इस पूरे फर्जी डिग्री रैकेट की एक छोटी सी कड़ी मात्र हो सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि एसटीएफ की पूछताछ में कई बड़े सफेदपोशों और विश्वविद्यालय कर्मियों के नाम सामने आ सकते हैं।

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