किसान की गृहस्थी पर टूटा 'अग्नि तांडव'
Kanpur/Truth India Times Digital Desk
बिल्हौर (कानपुर)। उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद स्थित बिल्हौर तहसील के गढ़ेवा गांव में शुक्रवार की आधी रात काल बनकर आई आग ने एक गरीब किसान का आशियाना उजाड़ दिया। भीषण अग्निकांड में किसान की एक बेशकीमती गाय जिंदा जल गई, जबकि बाइक, अनाज और नकदी समेत पूरी गृहस्थी खाक हो गई। गनीमत यह रही कि झोपड़ी के भीतर सो रहा चार सदस्यीय परिवार ऐन वक्त पर जाग गया और भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि, आग बुझाने की कोशिश में किसान बुरी तरह झुलस गया है।
आधी रात को मौत बनकर बरसी चिंगारी
गढ़ेवा गांव निवासी किसान प्रभात चंद अग्निहोत्री खेती-किसानी के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। शुक्रवार की रात कड़ाके की ठंड से बचने के लिए प्रभात अपनी पत्नी गुड्डी और दो मासूम बेटों—उज्जवल (7 वर्ष) तथा प्रज्वल (5 वर्ष)—के साथ घास-फूस से बनी झोपड़ी के अंदर सो रहे थे। रात करीब 2 बजे अचानक झोपड़ी के एक कोने से आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते सूखे घास-फूस ने विकराल रूप ले लिया और पूरी झोपड़ी आग के गोले में तब्दील हो गई।
कैसे लगी आग? दो थ्योरी आई सामने
गांव में आग लगने के कारणों को लेकर दो तरह की चर्चाएं हैं। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शाम को घर के पास बच्चे आग ताप रहे थे, संभवतः उसी अलाव की एक चिंगारी उड़कर झोपड़ी पर जा गिरी और रात में हवा के दबाव से वह भड़क गई। वहीं, कुछ ग्रामीणों का मानना है कि देर रात पास ही टहल रहे एक छुट्टा गोवंश (सांड) ने जलती हुई लकड़ी को पैरों से इधर-उधर कर दिया, जिससे निकली चिंगारी झोपड़ी तक जा पहुंची।
परिवार को बचाने में किसान झुलसा, बेजुबान की गई जान
जैसे ही प्रभात चंद की आंख खुली, उन्होंने देखा कि पूरी छत आग की लपटों से घिरी हुई है। उन्होंने बिना देरी किए अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। परिवार को बाहर निकालने के बाद प्रभात अपनी गाय को बचाने के लिए दोबारा अंदर कूदे और आग बुझाने की कोशिश करने लगे। इस संघर्ष में उनके हाथ और पैर झुलस गए, लेकिन बदकिस्मती से खूंटे से बंधी गाय को नहीं बचाया जा सका और वह जिंदा जल गई। किसान के मुताबिक, गाय की कीमत लगभग 48 हजार रुपए थी।
राख का ढेर बनी ‘सालों की मेहनत’
इस भीषण अग्निकांड में किसान प्रभात चंद का सब कुछ नष्ट हो गया है। नुकसान का आकलन कुछ इस प्रकार है:
- लाइवस्टॉक: 48 हजार रुपए की एक गाय।
- वाहन: घर के अंदर खड़ी एक मोटरसाइकिल।
- खाद्यान्न: लगभग 3 क्विंटल अनाज (साल भर की मेहनत)।
- अन्य सामान: एक सिलाई मशीन, 5 हजार रुपए नकद और कपड़े-बर्तन समेत पूरी गृहस्थी।
खुले आसमान के नीचे आया परिवार, प्रशासन से गुहार
देर रात मची इस चीख-पुकार को सुनकर ग्रामीण दौड़े और पानी डालकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सिर्फ राख का ढेर बचा था। हाड़ कंपाने वाली इस ठंड में प्रभात चंद का परिवार अब खुले आसमान के नीचे आ गया है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय प्रशासन और बिल्हौर तहसील के अधिकारियों से तत्काल आर्थिक सहायता और तिरपाल/आवास की मांग की है।
ग्रामीणों की मांग: गांव के लोगों ने भी मांग उठाई है कि पीड़ित किसान बहुत गरीब है और अग्नि दुर्घटना ने उसे दाने-दाने का मोहताज कर दिया है। सरकार को जल्द से जल्द मुआवाजा देना चाहिए ताकि बच्चों को ठंड से बचाया जा सके और किसान दोबारा अपना सिर ढकने की जगह बना सके।
घटना का संक्षिप्त विवरण:
- स्थान: गढ़ेवा गांव, बिल्हौर, कानपुर।
- समय: शुक्रवार देर रात (करीब 2 बजे)।
- प्रभावित: प्रभात चंद अग्निहोत्री का परिवार।
- नुकसान: 1 गाय की मौत, बाइक और अनाज राख।
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