फेसबुक पर ‘हनीट्रैप’ का शिकार हुआ बैंककर्मी, निवेश के नाम पर 92 लाख की ठगी; भरोसा जीतने के लिए भेजे थे बुके

उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगों ने एक बैंककर्मी को अपना निशाना बनाते हुए उनसे 92 लाख रुपये की बड़ी रकम ठग ली। यह मामला ‘हनीट्रैप’ और निवेश के नाम पर की गई धोखाधड़ी का एक घातक मेल है। ठगों ने पहले फेसबुक के जरिए बैंककर्मी से दोस्ती की, फिर उनका अटूट विश्वास जीता और अंत में मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उनकी जीवनभर की कमाई हड़प ली।

फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती और विश्वास का खेल

पीड़ित, जो शहर के एक प्रतिष्ठित बैंक में कार्यरत हैं, की मुलाकात कुछ समय पहले फेसबुक पर एक युवती से हुई थी। युवती ने खुद को एक सफल बिजनेस कंसल्टेंट के रूप में पेश किया। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और ठगों ने बैंककर्मी का भरोसा जीतने के लिए भावनात्मक जाल बुना। विश्वास पैदा करने के लिए युवती ने बैंककर्मी को उनके घर और ऑफिस के पते पर कई बार फूलों के बुके (Bouquet) और उपहार भेजे। इस मधुर व्यवहार से बैंककर्मी को जरा भी शक नहीं हुआ कि वह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह के जाल में फंस रहे हैं।

मुनाफे का लालच और 92 लाख का निवेश

जब विश्वास पूरी तरह जम गया, तो युवती ने एक ‘विशेष इन्वेस्टमेंट स्कीम’ का जिक्र किया। उसने दावा किया कि यदि वह एक विशेष प्लेटफॉर्म पर निवेश करते हैं, तो उन्हें बहुत कम समय में दोगुना या तिगुना मुनाफा मिल सकता है। बैंककर्मी ने शुरुआती तौर पर छोटी रकम लगाई, जिस पर उन्हें डिजिटल डैशबोर्ड पर “बंपर मुनाफा” दिखाया गया।

इसी मुनाफे के लालच में आकर पीड़ित ने अपने बैंक खातों, सेविंग और यहां तक कि दोस्तों व करीबियों से कर्ज लेकर कुल 92 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में निवेश कर दिए।

ऐसे खुला ठगी का राज

धोखाधड़ी का एहसास तब हुआ जब बैंककर्मी ने अपने मुनाफे की रकम को निकालने (Withdraw) की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने पैसे निकालने की रिक्वेस्ट डाली, वह प्लेटफॉर्म ब्लॉक हो गया। जब उन्होंने उस फेसबुक दोस्त से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसने और पैसों की मांग की और कहा कि “टैक्स और क्लियरेंस” के नाम पर और 10 लाख रुपये देने होंगे, तभी पुराने पैसे वापस मिलेंगे। इसके कुछ समय बाद ही युवती का प्रोफाइल डिलीट हो गया और उसका नंबर भी बंद आने लगा।

पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई

पूरी तरह लुट चुके बैंककर्मी ने तुरंत कानपुर साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

  • जांच का दायरा: पुलिस उन बैंक खातों की तलाश कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
  • डिजिटल फुटप्रिंट: साइबर विशेषज्ञ उस फेसबुक प्रोफाइल और आईपी एड्रेस को ट्रैक कर रहे हैं जिससे ठगी की स्क्रिप्ट रची गई थी।

साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी

इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अजनबियों से दोस्ती करने के खतरों को उजागर कर दिया है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि:

  1. सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी व्यक्ति के निवेश संबंधी सुझावों पर भरोसा न करें।
  2. उपहार या बुके भेजना ठगों की एक नई तकनीक है जिससे वे पीड़ित का ‘इमोशनल विश्वास’ जीतते हैं।
  3. कभी भी किसी अज्ञात लिंक या अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर पैसे जमा न करें।

कानपुर पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी के साथ इस तरह की कोई घटना होती है, तो बिना डरे तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।

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