बांदा में गूँजा जल संरक्षण का संकल्प: 'पानी की पाठशाला' में पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने सिखाए संरक्षण के गुर; वंदे मातरम् के सामूहिक गान से थमा कार्यक्रम
Banda/Truth India Times Digital Desk
जल संकट से जूझते बुंदेलखंड की धरती पर भावी पीढ़ी को पानी की अहमियत समझाने के लिए मंगलवार को एक अनूठी पहल की गई। शहर के प्रतिष्ठित विद्यावती निगम मेमोरियल पब्लिक स्कूल में ‘पानी की पाठशाला’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जल योद्धा पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने छात्रों को जल संरक्षण के व्यावहारिक तरीकों से रूबरू कराया। कार्यक्रम का एक और विशेष आकर्षण ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर किया गया सामूहिक गान रहा, जिसने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
बैज अलंकरण और “पानी की कहानी” से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा अतिथियों के आत्मीय स्वागत और बैज अलंकरण के साथ हुआ। विद्यालय के निदेशक पूर्णाशीश रथ ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज के समय में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता भी शिक्षा का अनिवार्य हिस्सा है।
इसके बाद छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गंभीर संदेश दिया। “पानी की कहानी, बचानी है ये ज़िंदगानी” और “नदियाँ हमारी, उन्हें बचाना हमारी जिम्मेदारी” जैसे गीतों और नाटकों के जरिए छात्रों ने वर्तमान में बर्बाद हो रहे जल संसाधनों पर कटाक्ष किया और भविष्य की भयावह तस्वीर पेश की। इन प्रस्तुतियों को उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों ने खूब सराहा।
पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय: “केवल नीतियों से नहीं, जनभागीदारी से बचेगा पानी”
पिछले तीन दशकों से जल ग्राम (जखनी) को मॉडल बनाने वाले और “खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़” अभियान के प्रणेता पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पानी को लेकर केवल बड़ी नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौटना होगा। जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है और दुनिया के सभी धर्मों में इसे सबसे पवित्र माना गया है।”
उमाशंकर पाण्डेय ने व्यावहारिक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे हर व्यक्ति अपने घर और विद्यालय स्तर पर छोटी-छोटी कोशिशों से लाखों लीटर पानी बचा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने गांवों और मुहल्लों में ‘जल दूत’ के रूप में काम करें।
संस्कार और कर्तव्य का पाठ
केसीएनआईटी (KCNIT) ग्रुप के चेयरमैन अरुण कुमार निगम ने अपने संबोधन में जल संरक्षण के साथ-साथ नैतिक मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिस तरह जल ही जीवन है, उसी तरह माता-पिता का सम्मान और उनके प्रति कर्तव्यनिष्ठा ही एक सफल विद्यार्थी के जीवन का आधार है। उन्होंने छात्रों को सदैव अपने माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करने की शपथ के लिए प्रेरित किया। वहीं विद्यालय की प्रधानाचार्या ने जल संकट के वैश्विक कारणों और स्थानीय समाधानों पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता बताई।
सम्मान और जल शपथ
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रबंधन द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक ख्याति प्राप्त करने वाले पद्मश्री उमाशंकर पाण्डेय को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके उपरांत, सभागार में मौजूद सैकड़ों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को हाथ आगे बढ़ाकर ‘जल संरक्षण की शपथ’ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं पानी बर्बाद नहीं करेंगे, बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष: एक ऐतिहासिक समापन
कार्यक्रम का समापन अत्यंत गौरवशाली रहा। महान स्वतंत्रता सेनानी और साहित्यकार बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विद्यालय में सामूहिक गान का आयोजन हुआ। सैकड़ों कंठों से एक साथ निकलती वंदे मातरम् की ध्वनि और “भारत माता की जय” के गगनभेदी उद्घोष के साथ इस प्रेरणादायक पाठशाला का समापन हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक, गणमान्य नागरिक और जल संरक्षण प्रेमी उपस्थित रहे।
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