करंट की चपेट में आने से इंटरमीडिएट की छात्रा की मौत
बबेरू (बांदा) | प्रलभ शरण चौधरी (Truth India Times)
उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद अंतर्गत बबेरू कोतवाली क्षेत्र के करिंगा गांव में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां करंट की चपेट में आने से 17 वर्षीय एक मेधावी छात्रा की असमय मौत हो गई। छात्रा इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थी और घर के पास से गुजर रहे विद्युत खंभे के तार से निकले करंट का शिकार हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है, वहीं ग्रामीणों ने बिजली विभाग की जर्जर व्यवस्था और लापरवाही पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
खेत के पास से गुजरते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करिंगा गांव निवासी बच्छराज कुशवाहा की 17 वर्षीय पुत्री अर्चना देवी शनिवार को अपने दैनिक कार्यों के सिलसिले में घर से बाहर निकली थी। रास्ते में बिजली का एक खंभा लगा हुआ है, जिसका सपोर्टिंग वायर (स्टे-वायर) या कोई अन्य तार नीचे की ओर झुका हुआ था। बताया जा रहा है कि नमी या तकनीकी खराबी के कारण उस तार में करंट उतर आया था। जैसे ही अर्चना का हाथ या शरीर उस तार से स्पर्श हुआ, उसे बिजली का जोरदार झटका लगा।
झटका इतना तेज था कि अर्चना दूर जाकर गिरी और अचेत हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने जब चीख-पुकार सुनी तो तुरंत दौड़कर पहुंचे और किसी तरह लकड़ी के डंडे की मदद से उसे तार से अलग किया। आनन-फानन में परिजनों ने उसे निजी वाहन से बबेरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मेधावी छात्रा की मौत से परिवार का सपना टूटा
मृतका अर्चना देवी इंटरमीडिएट (12वीं) की छात्रा थी और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी। बच्छराज कुशवाहा का परिवार अर्चना की पढ़ाई को लेकर काफी उत्साहित था और उसे उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देख रहा था। छात्रा की अचानक मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। मां और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता बच्छराज इस वज्रपात से बेसुध हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अर्चना स्वभाव से बहुत सरल और पढ़ाई में काफी होनहार थी।
बिजली विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों का गुस्सा
इस दुखद घटना ने बिजली विभाग की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बिजली के तार काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं। कई स्थानों पर खंभे झुक गए हैं और तार नीचे लटक रहे हैं। इसकी शिकायत कई बार विभागीय अधिकारियों और लाइनमैन से की गई, लेकिन मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते झूलते तारों को ठीक कर दिया गया होता या खंभे के अर्थिंग सिस्टम की जांच हुई होती, तो आज एक मासूम की जान न जाती।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि जिस खंभे से करंट उतरा, वहां पहले भी कई बार चिंगारियां निकलते देखी गई थीं। विभाग की इसी अनदेखी ने आज एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
अस्पताल से मिली सूचना के आधार पर बबेरू कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होगी। परिजनों की ओर से यदि बिजली विभाग के खिलाफ तहरीर दी जाती है, तो वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासन और मुआवजा की मांग
गांव के प्रधान और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, क्योंकि मृतक छात्रा एक गरीब किसान परिवार से थी। साथ ही, मांग की गई है कि पूरे गांव में जर्जर तारों को तुरंत बदला जाए ताकि भविष्य में ऐसी कोई अन्य दुर्घटना न हो।
करंट लगने से हुई यह मौत एक बार फिर बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में बरसात या नमी के मौसम में खंभों में करंट उतरने की घटनाएं आम हो जाती हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों पर ही पेट्रोलिंग और मरम्मत का दावा करते हैं।
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