बांदा में काल बनी ट्रैक्टर-ट्रॉली
बांदा | (प्रलभ शरण चौधरी – ट्रुथ इंडिया टाइम्स)
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में एक बार फिर रफ्तार और अनियंत्रित वाहन ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। पैलानी तहसील क्षेत्र के खरेई गांव के पास बीती रात एक दर्दनाक हादसा पेश आया, जहाँ मिट्टी लेकर लौट रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 30 वर्षीय चालक की मौके पर ही मौत हो गई। विडंबना यह रही कि हादसा जंगल के सुनसान इलाके में हुआ, जिसके चलते घायल युवक को समय पर मदद नहीं मिल सकी और उसने ट्रॉली के नीचे दबे-दबे ही दम तोड़ दिया।
खरेई तालाब के पास हुआ ‘खूनी’ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पैलानी थाना क्षेत्र के उसरा डेरा निवासी पंकज निषाद (30 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय बाबूलाल निषाद, ट्रैक्टर चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। मंगलवार की रात पंकज खपटिहा कला में मिट्टी डालकर वापस अपने घर उसरा डेरा लौट रहा था।
रात के अंधेरे में पंकज का ट्रैक्टर जब साड़ी गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले खरेई तालाब के पास पहुँचा, तभी अचानक सन्तुलन बिगड़ गया। घने जंगल और सुनसान रास्ता होने के कारण ट्रैक्टर की रफ्तार शायद अधिक थी। जैसे ही ट्रैक्टर अनियंत्रित हुआ, पंकज ने अपनी जान बचाने के लिए नीचे छलांग लगा दी, लेकिन उसकी किस्मत ने दगा दे दिया। जैसे ही वह कूदा, भारी-भरकम ट्रॉली पलटकर सीधे उसके ऊपर जा गिरी। पंकज का आधा शरीर ट्रॉली के नीचे बुरी तरह दब गया।
रात भर तड़पता रहा पंकज, सुबह मिली लाश
हादसा जिस जगह हुआ, वह इलाका काफी सुनसान और घने जंगल से घिरा हुआ है। रात के वक्त वहां से आवाजाही न के बराबर रहती है। आशंका जताई जा रही है कि पंकज काफी देर तक मदद के लिए चिल्लाया होगा, लेकिन जंगल के सन्नाटे में उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। अत्यधिक रक्तस्राव और ट्रॉली के भारी वजन के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
बुधवार की सुबह जब राहगीर उस रास्ते से गुजरे, तो उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉली को पलटा हुआ देखा। पास जाकर देखा तो ट्रॉली के नीचे एक युवक दबा हुआ था। यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। शिनाख्त होने के बाद परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद घर में कोहराम मच गया।
प्रशासनिक अमला मौके पर: शव को बाहर निकाला गया
हादसे की सूचना मिलते ही पैलानी थाना प्रभारी राजेश कुमार वर्मा, चौकी इंचार्ज हरिशरन सिंह और तहसीलदार राधेश्याम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने कड़ी मशक्कत और ग्रामीणों के सहयोग से ट्रॉली के नीचे दबे पंकज के शव को बाहर निकाला। युवक की मौत हो चुकी थी, यह देख परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा।
पंकज अपने घर का कमाऊ सदस्य था। पिता की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी, अब पंकज की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया है।
जांच में जुटी पुलिस: क्या था हादसे का कारण?
थाना प्रभारी राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने का लग रहा है। उन्होंने कहा, “हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर कार्यवाही की है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और समय का पता चल सकेगा। फिलहाल विधिक कार्यवाही प्रचलित है।”
पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि क्या ट्रैक्टर में कोई तकनीकी खराबी आई थी या फिर घने जंगल के रास्ते में किसी जानवर के अचानक सामने आ जाने के कारण पंकज ने संतुलन खो दिया।
जंगल के रास्तों पर सुरक्षा और रोशनी का अभाव
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खरेई तालाब और आसपास का जंगली रास्ता रात के समय काफी खतरनाक हो जाता है। वहां न तो स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था है और न ही सड़कों की स्थिति बहुत अच्छी है। आए दिन यहां छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे ब्लैक स्पॉट्स को चिह्नित कर वहां सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं।
निष्कर्ष: पंकज निषाद की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रात के समय सुनसान रास्तों पर वाहन चलाना कितना जोखिम भरा हो सकता है। एक छोटी सी चूक या एक पल की लापरवाही ने एक नौजवान की जिंदगी खत्म कर दी। ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के माध्यम से प्रलभ शरण चौधरी की यह रिपोर्ट बांदा के उस बेबस परिवार की कहानी है, जिसका सहारा अब हमेशा के लिए छिन गया है।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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