जमानत के ‘काले खेल’ पर पुलिस का कड़ा प्रहार: नए साल में टूटेगा फर्जी जमानतगीरों का सिंडिकेट, 578 रडार पर; ADCP बने नोडल अफसर

कानपुर। अपराधियों को जेल की सलाखों से बाहर निकालने के लिए फर्जी दस्तावेजों के सहारे ‘गारंटी’ देने वाले सफेदपोश अपराधियों की अब खैर नहीं है। मर्डर, लूट, डकैती और साइबर ठगी जैसे संगीन अपराधों में शामिल अपराधियों को जमानत दिलाने वाले फर्जी जमानतगीरों के खिलाफ उन्नाव पुलिस ने ‘मिशन क्लीन’ तैयार कर लिया है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही जिले में एक वृहद अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत ऐसे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा जो कचहरी और थानों के आसपास सक्रिय होकर न्याय प्रणाली से खिलवाड़ कर रहे हैं।

पुलिस की अब तक की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, 578 जमानतगीरों का सत्यापन कार्य पूरा कर लिया गया है, जिनमें से बड़ी संख्या में संदिग्ध पाए गए हैं। इस पूरे अभियान की कमान ADCP (एलआईयू नोडल अफसर) को सौंपी गई है, जो सीधे तौर पर इस फर्जीवाड़े की निगरानी करेंगे।

फर्जी जमानतगीरों का ‘मायाजाल’: कैसे होता है खेल?

शहर के कचहरी परिसरों और आसपास के इलाकों में एक ऐसा गैंग सक्रिय है जो पेशेवर रूप से जमानत देने का काम करता है। ये लोग फर्जी खतौनी, जाली आधार कार्ड और दूसरे के नाम के निवास प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर गंभीर अपराधियों की जमानत लेते हैं। अक्सर देखा गया है कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग नामों या जाली दस्तावेजों के आधार पर दर्जनों अपराधियों का जमानतदार बन जाता है।

जब अपराधी जमानत पर बाहर आता है और दोबारा अपराध करता है या फरार हो जाता है, तब पुलिस जब जमानतदार की तलाश करती है, तो पता चलता है कि वह पता या व्यक्ति ही अस्तित्व में नहीं है। इसी ‘लूपहोल’ को बंद करने के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है।

578 जमानतगीरों की कुंडली तैयार

पुलिस विभाग ने पिछले कुछ महीनों में जमानत लेने वाले 578 लोगों का डेटा खंगाला है। इसमें एलआईयू (Local Intelligence Unit) की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि जमानत के लिए जो संपत्ति दिखाई गई है, क्या वह वास्तव में जमानतदार की है? या फिर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोर्ट को गुमराह किया गया है।

नोडल अफसर (ADCP) के नेतृत्व में एक विशेष डेटाबेस तैयार किया गया है। इसमें उन लोगों को ब्लैकलिस्ट किया जा रहा है जिन्होंने एक से अधिक बार संदिग्ध तरीके से जमानत ली है। नए साल से शुरू होने वाले अभियान में ऐसे लोगों की धरपकड़ की जाएगी और उनके खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) व कूटरचित दस्तावेज तैयार करने (धारा 467, 468, 471) के तहत सख्त मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।

साइबर अपराधियों और लुटेरों के ‘मददगारों’ पर पैनी नजर

पुलिस का मुख्य फोकस उन जमानतगीरों पर है जो साइबर ठगों और अंतर्राज्यीय लुटेरों की मदद करते हैं। साइबर अपराध के मामलों में अक्सर अपराधी दूसरे राज्यों के होते हैं और स्थानीय फर्जी जमानतदार चंद रुपयों के लालच में उनकी गारंटी ले लेते हैं।

ADCP एलआईयू नोडल अफसर ने बताया, “हमारा उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। फर्जी जमानतगीर न केवल पुलिस के लिए सिरदर्द बनते हैं, बल्कि समाज के लिए भी खतरा हैं क्योंकि उनकी वजह से पेशेवर अपराधी बाहर आकर दोबारा वारदात करते हैं। अब हर जमानतदार का फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा।”

LIU और थानों के बीच समन्वय

इस अभियान की सफलता के लिए एक नया प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। अब जैसे ही कोर्ट में जमानत के कागज पेश होंगे, उनकी एक प्रति तत्काल एलआईयू और संबंधित थाने को भेजी जाएगी। 24 से 48 घंटे के भीतर पुलिसकर्मी मौके पर जाकर जमानतदार के घर, उसकी संपत्ति और उसके चरित्र का सत्यापन करेंगे। यदि सत्यापन रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो जमानत की अर्जी तुरंत खारिज करने की सिफारिश की जाएगी।

सिंडिकेट के सरगनाओं की पहचान शुरू

पुलिस को अंदेशा है कि इस खेल के पीछे कुछ ‘बिचौलिए’ और शातिर दिमाग लोग शामिल हैं जो अनपढ़ या गरीब लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके दस्तावेज इस्तेमाल करते हैं। पुलिस ने ऐसे कुछ बिचौलियों को चिह्नित कर लिया है जो कचहरी के बाहर चाय की दुकानों या छोटे दफ्तरों से इस नेटवर्क को संचालित करते हैं।

जनता से अपील: झांसे में न आएं

ट्रुथ इंडिया टाइम्स (प्रलभ शरण चौधरी) के माध्यम से पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति के लिए जमानतदार न बनें। अपनी खतौनी या पहचान पत्र किसी बिचौलिए को न दें। यदि आपके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल होता है, तो अपराधी के साथ-साथ आपको भी जेल जाना पड़ सकता है।

निष्कर्ष: नए साल में उन्नाव पुलिस का यह कदम अपराधियों की कमर तोड़ने वाला साबित होगा। जब अपराधियों को पता चलेगा कि अब बाहर निकलने का ‘फर्जी रास्ता’ बंद हो चुका है, तो अपराध दर में निश्चित रूप से कमी आएगी। ADCP के नोडल अफसर बनने से जांच में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।


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