POCSO और किशोर न्याय पर पुलिस को मिली स्पेशल ट्रेनिंग
बांदा | (प्रलभ शरण चौधरी – ट्रुथ इंडिया टाइम्स)
बांदा। समाज के सबसे कोमल और संवेदनशील हिस्से, यानी बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए बांदा पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। मंगलवार को चित्रकूटधाम परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) राजेश एस. की अध्यक्षता में महर्षि बामदेव सभागार में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य एजेंडा किशोर न्याय प्रणाली को धार देना और POCSO (पॉक्सो) अधिनियम के तहत होने वाली कार्यवाहियों को अधिक मानवीय और विधि-सम्मत बनाना रहा।
कार्यशाला में जिलाधिकारी जे. रीभा और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल की गरिमामयी उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि शासन स्तर पर बाल संरक्षण को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है।
कानून की बारीकियां और खाकी का नया चेहरा
अक्सर देखा जाता है कि किशोर अपराधों या बच्चों के साथ होने वाली ज्यादतियों के मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। इसी धारणा को बदलने के लिए इस कार्यशाला में बांदा परिक्षेत्र के तमाम थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों और ‘मिशन शक्ति’ प्रभारियों को आमंत्रित किया गया था।
डीआईजी राजेश एस. ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, “जब मामला किसी बच्चे का हो, तो पुलिस की वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान का होना जरूरी है। किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) केवल सजा देने के लिए नहीं, बल्कि सुधार और संरक्षण के लिए बना है। थानों में तैनात अधिकारियों को यह समझना होगा कि विधि के साथ संघर्षरत बालक अपराधी से पहले एक बच्चा है, जिसे सही दिशा की जरूरत है।”
POCSO और जेजे एक्ट: फाइलों में नहीं, फील्ड में दिखे असर
कार्यशाला के दौरान किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम-2015 के पेचीदा प्रावधानों पर विस्तार से मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने बताया कि विवेचकों (Investigating Officers) की एक छोटी सी गलती पूरे केस को कमजोर कर सकती है।
कार्यशाला के मुख्य बिंदु:
- विवेचना में समयबद्धता: पॉक्सो एक्ट और बच्चों से जुड़े अपराधों में चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा और साक्ष्य संकलन की बारीकियों को समझाया गया।
- बरामदगी और SOP: गुमशुदा बच्चों के मामलों में Standard Operating Procedure (SOP) का पालन कैसे किया जाए, ताकि बच्चा जल्द से जल्द अपने परिवार तक सुरक्षित पहुँच सके।
- संवेदनशील व्यवहार: बच्चों से पूछताछ के दौरान वर्दी के बजाय सादे कपड़ों में होना और उनके अनुकूल वातावरण (Child-friendly environment) तैयार करने पर जोर दिया गया।
विभागीय समन्वय: ‘चाइल्ड हेल्पलाइन’ से लेकर ‘वन स्टॉप सेंटर’ तक
इस कार्यशाला की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि बाल संरक्षण से जुड़ी हर इकाई मौजूद थी। अपर पुलिस अधीक्षक (नोडल अधिकारी WCSO), बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य, जिला प्रोबेशन अधिकारी और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के प्रभारियों ने एक मंच पर बैठकर चर्चा की।
जिलाधिकारी जे. रीभा ने कहा कि जब तक पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय नहीं होगा, तब तक पीड़ित बच्चे को न्याय मिलना मुश्किल है। उन्होंने ‘वन स्टॉप सेंटर’ और ‘मिशन शक्ति’ केंद्रों को और अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश दिए ताकि पीड़ित बालिकाओं को एक ही छत के नीचे कानूनी और चिकित्सीय मदद मिल सके।
गुमशुदा बच्चों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने जनपद के सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों की गुमशुदगी की सूचना पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही तत्काल पंजीकरण और बरामदगी के लिए टीमें रवाना होनी चाहिए। सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए तकनीक और सोशल मीडिया का भी सहारा लेने की बात कही गई।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यशाला में संरक्षण अधिकारी, जिला बाल कल्याण अधिकारी, विधि सह परिवीक्षा अधिकारी, प्रभारी विशेष किशोर पुलिस इकाई, और प्रभारी थाना एएचटी (AHT) सहित परिक्षेत्र के सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी शामिल रहे। कार्यशाला के अंत में अधिकारियों के संशय दूर करने के लिए एक ‘प्रश्न-उत्तर’ सत्र भी आयोजित किया गया।
निष्कर्ष: सुरक्षित बचपन की ओर एक कदम
बांदा में आयोजित यह कार्यशाला केवल एक प्रशिक्षण सत्र नहीं था, बल्कि यह एक वादा था कि आने वाले समय में जिले का हर बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करेगा। जब पुलिस कानून के डंडे के साथ-साथ संवेदनशीलता का मरहम लेकर चलेगी, तभी समाज में किशोर न्याय प्रणाली का वास्तविक उद्देश्य सफल होगा।
‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ के माध्यम से प्रलभ शरण चौधरी की यह रिपोर्ट बांदा पुलिस के उस संकल्प को दर्शाती है, जहाँ लक्ष्य केवल अपराधी को पकड़ना नहीं, बल्कि बचपन को बचाना भी है।
रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स
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