बांदा PWD में ₹9.97 करोड़ का ‘महा-घोटाला’: सहायक अभियंता अजय कुमार ने चहेते ठेकेदारों पर लुटाया सरकारी खजाना, सांसद की शिकायत पर CM योगी का कड़ा एक्शन

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से भ्रष्टाचार की एक ऐसी काली कहानी सामने आई है जिसने विभाग के ‘ईमानदार’ होने के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (PWD), बांदा में तैनात सहायक अभियंता अजय कुमार पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 9 करोड़ 97 लाख 60 हजार 9 रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला तब गरमाया जब बांदा-चित्रकूट सांसद कृष्णा देवी शिव शंकर पटेल ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में इस लूट का कच्चा चिट्ठा खोल दिया।

मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग को तत्काल और कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। सत्ता के गलियारों में इस ‘पर्ची घोटाले’ को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।

भ्रष्टाचार का ‘मोडस ओपरेन्डी’: नियमों को ताक पर रख लुटाए करोड़ों

सहायक अभियंता अजय कुमार ने गबन के लिए जो तरीका अपनाया, वह विभाग की व्यवस्था में मौजूद छेदों को उजागर करता है। जांच रिपोर्ट और सांसद की शिकायत के अनुसार, अजय कुमार ने अनुरक्षण (Maintenance) कार्यों के लिए हुए अनुबंधों में भारी हेरफेर की।

  1. अतिरिक्त मदों का गठन: अनुबंध में जो कार्य तय थे, उनके अलावा अपनी मर्जी से ‘अतिरिक्त मद’ (Extra Items) बना दिए गए।
  2. अनुबंध राशि से अधिक भुगतान: सरकारी नियम कहते हैं कि अनुबंध की राशि से अधिक का भुगतान बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति और ठोस कारण के नहीं हो सकता, लेकिन यहाँ तो खजाना ही खोल दिया गया।
  3. 12 चहेते ठेकेदारों पर मेहरबानी: सहायक अभियंता ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अपने 12 पसंदीदा ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुँचाया।

इन ठेकेदारों के खातों में बहा सरकारी पैसा

सांसद द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट में उन ठेकेदारों की सूची और भुगतान की गई अतिरिक्त राशि का स्पष्ट विवरण है, जिसने भ्रष्टाचार की पुष्टि कर दी है। मुख्य रूप से मेसर्स बुंदेलखंड कंस्ट्रक्शन और सुरेशचंद्र गुप्ता जैसे नामों पर धन की सबसे ज्यादा वर्षा की गई है।

भुगतान का ब्यौरा (रुपयों में):

  • मेसर्स बुंदेलखंड कंस्ट्रक्शन: कई बार में लाखों का अतिरिक्त भुगतान (9,65,190; 9,78,803; 9,20,400 आदि)।
  • मेसर्स सुरेशचंद्र गुप्ता: 9,95,396; 9,68,328; 3,88,807 और 9,95,290 रुपये के अतिरिक्त भुगतान।
  • मेसर्स रमेश प्रसाद: 9,91,277 रुपये।
  • मेसर्स मातृभूमि कंस्ट्रक्शन: 6,09,524 रुपये।
  • रामकिशुन रैकवार: 1,89,549 रुपये।
  • विजेंद्र सिंह: 1,12,310 रुपये।

यह सूची तो सिर्फ एक बानगी है। आरोप है कि पैच मरम्मत (Patchwork) के नाम पर भी अतिरिक्त मद गठित कर सरकारी धन को डकारा गया है।

सांसद की सक्रियता और मुख्यमंत्री का ‘हंटर’

बांदा-चित्रकूट सांसद कृष्णा देवी शिव शंकर पटेल ने 12 जनवरी को लखनऊ में ‘जनता दर्शन’ के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस भ्रष्टाचार की फाइल सौंपी। उन्होंने मुख्य अभियंता झांसी क्षेत्र के पत्र का हवाला देते हुए बताया कि अजय कुमार के खिलाफ पहले ही अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी थी, लेकिन मामला फाइलों में दबा रहा।

सांसद की शिकायत पर मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी एन.के.एस. चौहान ने प्रमुख सचिव (PWD) को पत्र लिखकर स्पष्ट आदेश दिया है कि इस मामले में अविलंब कार्रवाई की जाए। सांसद ने मांग की है कि अजय कुमार के पूरे कार्यकाल के कार्यों की उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराई जाए और केवल निलंबन नहीं, बल्कि रिकवरी और जेल जैसी सख्त सजा दी जाए।

ट्रुथ इंडिया टाइम्स का सवाल: क्या अकेले मुमकिन था यह खेल?

9.97 करोड़ रुपये का गबन कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि:

  • क्या प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता (EE) और लेखा विभाग की आंखें बंद थीं?
  • बिना उच्चाधिकारियों के डिजिटल सिग्नेचर या सहमति के इतना बड़ा भुगतान कैसे संभव हुआ?
  • क्या अजय कुमार को विभाग के ही किसी ‘बड़े मगरमच्छ’ का संरक्षण प्राप्त है?

जनता को सच जानना होगा

बांदा की सड़कें आज भी गड्ढों के लिए जानी जाती हैं। पैच वर्क के नाम पर करोड़ों रुपये कागजों में बहा दिए गए, लेकिन धरातल पर सफर आज भी दर्दनाक है। जनता के टैक्स का पैसा विकास के बजाय कुछ अफसरों और ठेकेदारों के ‘गठजोड़’ की भेंट चढ़ गया।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब उम्मीद है कि बांदा PWD के इस काले साम्राज्य का अंत होगा और अजय कुमार जैसे अधिकारियों को सबक मिलेगा।

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