राइफल क्लब मैदान बेचने की तैयारी में प्रशासन, सदर विधायक ने CM योगी को लिखा पत्र; बोले- ‘यह मैदान खिलाड़ियों की धरोहर है’

बांदा। बुंदेलखंड की खेल प्रतिभाओं की ‘नर्सरी’ कहे जाने वाले बांदा के ऐतिहासिक राइफल क्लब मैदान को लेकर अब सियासत गरमा गई है। बांदा विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा इस बेशकीमती और ऐतिहासिक खेल मैदान की नीलामी करने के फैसले ने स्थानीय खिलाड़ियों और नागरिकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस गंभीर मामले में अब बांदा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

124 साल पुराना इतिहास और दिग्गजों की यादें

सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में इस मैदान के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि यह मैदान केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि बांदा की अस्मिता से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1902 में तत्कालीन जमींदार द्वारा इस मैदान को पुलिस परेड और खेल गतिविधियों के लिए लीज पर दिया गया था।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस छोटे से शहर के इस मैदान ने भारतीय खेल जगत के दिग्गजों को अपनी ओर आकर्षित किया है। विधायक ने उल्लेख किया कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद से लेकर भारतीय क्रिकेट के सितारे सुरेश रैना, पीयूष चावला, प्रवीण कुमार और आर.पी. सिंह जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी यहाँ अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा चुके हैं।

BDA की नीलामी से खिलाड़ियों में हड़कंप

विवाद की शुरुआत तब हुई जब बांदा विकास प्राधिकरण (बी०डी०ए०) ने पत्रांक 933/2025-26 के तहत 1 जनवरी 2026 को एक विज्ञापन प्रकाशित कर इस मैदान की नीलामी की सूचना सार्वजनिक की। प्राधिकरण ने इस मैदान को नीलाम करने के लिए 21 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है।

जैसे ही यह खबर शहर में फैली, खेल प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में चिंता की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि अगर यह मैदान निजी हाथों में चला गया, तो शहर के युवाओं के पास खेलने के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।

“सदर का एकमात्र बचा हुआ मैदान”: विधायक की चेतावनी

विधायक प्रकाश द्विवेदी ने पत्र में कड़े शब्दों में कहा है कि राइफल क्लब मैदान बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र का एकमात्र बचा हुआ सार्वजनिक खेल मैदान है। उन्होंने तर्क दिया कि:

  • पुलिस लाइन का अपना अलग मैदान बन जाने के बाद से यह मैदान पूरी तरह से खिलाड़ियों और आम जनता के लिए समर्पित है।
  • यहाँ न केवल खेल प्रतियोगिताएं होती हैं, बल्कि शहर के महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी यह एकमात्र केंद्र है।
  • शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी के बीच इस तरह के खुले मैदान को व्यावसायिक उपयोग के लिए बेचना जनविरोधी कदम है।

विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बांदा के भविष्य और खेल प्रतिभाओं के हित को ध्यान में रखते हुए इस नीलामी को निरस्त किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस मैदान को बेचने के बजाय इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘स्पोर्ट्स हब’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

जनभावनाओं का केंद्र है राइफल क्लब

स्थानीय निवासियों का मानना है कि राइफल क्लब मैदान बांदा का ‘फेफड़ा’ है। यहाँ सुबह-शाम सैकड़ों युवा सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगाते हैं। बुजुर्गों के लिए यह टहलने का एकमात्र स्थान है। यदि विकास प्राधिकरण इसे भूखंडों में काटकर बेच देता है, तो शहर का सामाजिक और सांस्कृतिक ताना-बाना बिखर जाएगा।

सदर विधायक के इस पत्र के बाद अब सबकी निगाहें लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं। क्या योगी सरकार अपने विधायक की अपील पर इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाएगी? या फिर विकास प्राधिकरण की नीलामी की योजना परवान चढ़ेगी? यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

ट्रुथ इंडिया टाइम्स की विशेष रिपोर्ट: बांदा के खिलाड़ियों ने भी इस मामले में एकजुट होने का फैसला किया है। यदि नीलामी नहीं रुकी, तो शहर में बड़े आंदोलन की आहट सुनाई दे रही है।

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