कानपुर में सत्ता का पावर बनाम खाकी का रसूख: BJP कार्यकर्ता को ‘जुआरी’ समझ दरोगा ने जड़े थप्पड़! थाने में भाजपाइयों का तांडव, दरोगा की कुर्सी पर संकट?

कानपुर (चकेरी): उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बार फिर ‘सत्ता और सिस्टम’ के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। चकेरी थाने में रविवार की रात उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया, जब दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप बेहद गंभीर हैं— भाजपा कार्यकर्ता का कहना है कि दरोगा और सिपाहियों ने उसे न केवल सरेराह घसीटा, बल्कि थाने ले जाकर ‘अपराधी’ की तरह थप्पड़ों से नवाजा। करीब 45 मिनट तक चले इस हंगामे ने पुलिस महकमे की चूलें हिला दीं।

टिफिन देने गया था बेटा, पुलिस ने बना दिया ‘बड़ा जुआरी’!

घटना की शुरुआत रविवार शाम रामादेवी इलाके से हुई। चकेरी के सफीपुर निवासी भाजपा कार्यकर्ता सौरभ निषाद अपने पिता राजकुमार को टिफिन देने के लिए माधवी अस्पताल के पास गए थे। सौरभ का दावा है कि उन्होंने अपनी बाइक हाईवे किनारे खड़ी की थी। इत्तेफाक से उसी जगह के पास कुछ लोग जुआ खेल रहे थे।

तभी रामादेवी चौकी प्रभारी कुलदीप यादव अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। पुलिस को देखते ही जुआरी तो चंपत हो गए, लेकिन पुलिस की नजर बाइक खड़ी कर रहे सौरभ पर पड़ गई। सौरभ का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें देखते ही कहा, “यही है वो बड़ा अपराधी, इसे पकड़ो।” जब सौरभ ने विरोध किया और अपनी पहचान बताई, तो आरोप है कि पुलिस वालों ने उन्हें जबरन घसीटकर सरकारी गाड़ी में ठूंस दिया।

गाड़ी के अंदर थप्पड़ और चौकी में ‘खातिरदारी’

सौरभ निषाद का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि गाड़ी में बैठाने के बाद दरोगा कुलदीप यादव और तीन सिपाहियों ने उन्हें थप्पड़ मारे। सौरभ का कहना है कि वह बार-बार अपनी बेगुनाही की दुहाई देते रहे, लेकिन पुलिस ‘वर्दी के गुरूर’ में चूर थी। उन्हें चौकी ले जाया गया और वहां भी उनके साथ अभद्रता की गई। जैसे ही यह खबर स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगी, इलाके की सियासत उबल पड़ी।

थाने में ‘भगवा’ का घेरा: 45 मिनट तक गूंजे नारे

अपने साथी की पिटाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता चकेरी थाने पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने थाने के अंदर ही दरी बिछा दी और नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपाइयों की मांग एक ही थी— “दोषी दरोगा कुलदीप यादव को तुरंत सस्पेंड करो।” थाने के अंदर हंगामे का आलम यह था कि पुलिस अधिकारी भी बैकफुट पर आ गए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब भाजपा की सरकार में कार्यकर्ताओं का ही सम्मान सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा? हंगामा बढ़ता देख एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय को मौके पर पहुंचना पड़ा।

एसीपी का आश्वासन और ‘जांच’ का झुनझुना

करीब पौन घंटे तक चले भारी हंगामे और गर्मागर्मी के बाद एसीपी अभिषेक पांडेय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने उत्तेजित कार्यकर्ताओं को शांत कराते हुए कहा कि मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर दरोगा और सिपाही दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। एसीपी के इस भरोसे के बाद ही भाजपाइयों ने थाने का घेराव खत्म किया, लेकिन चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।

पुलिस की अपनी दलील: ‘जुए की सूचना पर हुई थी छापेमारी’

वहीं, पुलिस सूत्रों का कहना है कि रामादेवी इलाके में जुए की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। पुलिस टीम इसी सूचना पर छापेमारी करने गई थी। संदिग्ध परिस्थितियों में खड़े युवक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। हालांकि, पिटाई और अभद्रता के आरोपों पर पुलिस के आला अधिकारी अभी जांच की बात कह रहे हैं।

निष्कर्ष: ट्रुथ इंडिया टाइम्स की पड़ताल

कानपुर पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह कोई पहली भिड़ंत नहीं है। लेकिन इस बार मामला ‘गलत पहचान’ (Mistaken Identity) और ‘पुलिसिया बर्बरता’ का है। अगर सौरभ वाकई जुआरी नहीं थे, तो उनके साथ हुई बदसलूकी पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा धब्बा है। क्या एक कार्यकर्ता को अपनी पहचान बताने के बावजूद थप्पड़ खाना पड़ेगा? अब गेंद पुलिस कमिश्नर के पाले में है— क्या दरोगा पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?

रिपोर्ट: प्रलभ शरण चौधरी, ट्रुथ इंडिया टाइम्स (Truth India Times)

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