BUAT बांदा में 'भविष्य के किसानों' का पाठशाला
Banda/Truth India Times Digital Desk
बुंदेलखंड में कृषि क्रांति की नई इबारत लिख रहे बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (BUAT) में मंगलवार को शिक्षा और तकनीक का संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय के ‘संरक्षित फसल शोध केंद्र’ (पॉलीहाउस) में एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया, जिसमें हिन्दू इंटर कॉलेज, अतर्रा के कृषि संकाय के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों को परंपरागत खेती से ऊपर उठकर आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों से रूबरू कराना था।
हाईस्कूल और इंटर के छात्रों ने जाना ‘संरक्षित खेती’ का महत्व
08 दिसंबर 2025 को आयोजित इस भ्रमण में हिन्दू इंटर कॉलेज अतर्रा के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट (कृषि वर्ग) के विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षक भी शामिल हुए। विश्वविद्यालय के सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत सिंह ने छात्रों की अगवानी की। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती जलवायु और घटते संसाधनों के बीच ‘संरक्षित खेती’ यानी पॉलीहाउस तकनीक भविष्य की जरूरत है।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा की व्यापक संभावनाओं के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे केवल खेती को आजीविका का साधन न समझें, बल्कि इसे एक उन्नत व्यवसाय और वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र के रूप में देखें।
यूरोपियन फसलों और ग्राफ्टिंग तकनीक ने खींचा ध्यान
भ्रमण के दौरान छात्रों ने पॉलीहाउस के भीतर उगाई जा रही यूरोपियन फसलों को करीब से देखा। छात्रों ने विशेष रूप से विदेशी प्रजाति के खीरे और रंगीन शिमला मिर्च की खेती का अवलोकन किया। उन्होंने सीखा कि कैसे नियंत्रित वातावरण में बिना मौसम के भी उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगाई जा सकती हैं।
शोध प्रक्षेत्र में छात्रों को निम्नलिखित प्रमुख तकनीकें दिखाई गईं:
- कोल क्रॉप की नर्सरी: गोभी वर्गीय फसलों की वैज्ञानिक तरीके से नर्सरी तैयार करने की विधि।
- ग्राफ्टिंग (कलम) तकनीक: छात्रों ने ग्राफ्टिंग किए गए पौधों को देखा और समझा कि कैसे दो अलग-अलग पौधों के गुणों को मिलाकर एक बेहतर पौधा तैयार किया जाता है।
- प्याज के ट्रायल: प्याज की नई किस्मों पर चल रहे शोध और उनके उत्पादन की उन्नत विधियों की जानकारी ली।
करियर मार्गदर्शन और जागरूकता पर जोर
इस भ्रमण का एक महत्वपूर्ण पहलू छात्रों का करियर मार्गदर्शन करना भी था। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने छात्रों को बताया कि 12वीं के बाद कृषि विज्ञान (B.Sc. Ag) में प्रवेश लेकर वे कैसे कृषि अधिकारी, वैज्ञानिक या सफल कृषि उद्यमी बन सकते हैं। बुंदेलखंड जैसे शुष्क क्षेत्र के लिए पॉलीहाउस तकनीक कैसे वरदान साबित हो सकती है, इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
छात्रों ने बताया कि किताबों में पढ़ी गई बातों को साक्षात खेत और लैब में देखना उनके लिए एक नया और सुखद अनुभव रहा। इससे उन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति रुचि पैदा हुई है।
कृषि शिक्षा के प्रति नई पहल
हिन्दू इंटर कॉलेज के शिक्षकों ने BUAT प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि ऐसे भ्रमण से ग्रामीण परिवेश के छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे उन्हें नई तकनीक को अपनाने और उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित होने का अवसर मिलता है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में अन्य विद्यालयों के लिए भी ऐसे सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि कृषि की आधुनिक तकनीक गांव-गांव तक पहुंच सके।
निष्कर्ष: बुंदेलखंड में तकनीकी खेती की ओर बढ़ते कदम
BUAT बांदा का यह संरक्षित फसल शोध केंद्र वर्तमान में क्षेत्र के किसानों और छात्रों के लिए ज्ञान का केंद्र बना हुआ है। अतर्रा के छात्रों का यह भ्रमण निश्चित रूप से क्षेत्र में कृषि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में सहायक सिद्ध होगा।
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