उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामला: कुलदीप सेंगर की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा बढ़ाने की याचिका पर CBI और दोषियों से मांगा जवाब

नई दिल्ली/उन्नाव। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को इस मामले में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और कुलदीप सिंह सेंगर सहित सभी दोषियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने यह नोटिस पीड़िता द्वारा दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।

सजा बढ़ाने की मांग पर कानूनी घेराबंदी

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने पीड़िता की ओर से दायर उस याचिका पर संज्ञान लिया है, जिसमें निचली अदालत द्वारा दी गई 10 वर्ष की सजा को अपर्याप्त बताते हुए उसे बढ़ाने की गुहार लगाई गई है। पीड़िता का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने दलील दी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता अनुबा भारद्वाज ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि इस याचिका पर विचार करने से पहले इसकी ‘मेंटेनेबिलिटी’ (सुनवाई योग्यता) पर निर्णय लिया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों को अपना-अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च 2026 के लिए नियत कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2018 का है, जब उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप था कि कुलदीप सिंह सेंगर और उसके सहयोगियों ने पीड़िता के पिता को झूठे मुकदमे में फंसाया और कस्टडी के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

इस मामले में दिल्ली की निचली अदालत ने मार्च 2020 में कुलदीप सिंह सेंगर, उसके भाई अतुल सिंह सेंगर और तत्कालीन थाना प्रभारी सहित अन्य को दोषी करार देते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में, कुलदीप सेंगर को छोड़कर अन्य सभी दोषी जमानत पर जेल से बाहर हैं, जबकि सेंगर नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और समय सीमा

इससे पहले इसी सप्ताह न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मंजू जैन की खंडपीठ ने पीड़िता की पुत्री द्वारा दायर शीघ्र सुनवाई की याचिका पर विचार किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशानुसार इस संवेदनशील मामले का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर तीन महीने के भीतर किया जाना था।

अदालत ने स्वीकार किया कि अलग-अलग पीठों के समक्ष अपीलें लंबित होने के कारण निर्धारित तीन माह की अवधि में फैसला संभव नहीं हो सका। अब मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर इस मामले की सुनवाई को गति दी जा रही है।

सेंगर की कानूनी स्थिति और चुनौतियां

कुलदीप सिंह सेंगर वर्तमान में दोहरे कानूनी संकट का सामना कर रहे हैं:

  1. दुष्कर्म मामला: नाबालिग से बलात्कार के जुर्म में उन्हें पहले ही आजीवन कारावास (मरते दम तक जेल) की सजा सुनाई जा चुकी है।
  2. कस्टोडियल डेथ: इस मामले में उन्हें 10 साल की सजा मिली है, जिसे बढ़ाने के लिए अब हाई कोर्ट में बहस छिड़ी है।

उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने कस्टोडियल डेथ मामले में सेंगर की सजा को निलंबित (Suspend) करने का आदेश दिया था, जिससे उसे अंतरिम राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिससे सेंगर का जेल से बाहर आना मुमकिन नहीं हो सका।

2 मार्च को होगी निर्णायक बहस

अब सबकी नजरें 2 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि हाई कोर्ट पीड़िता की याचिका को स्वीकार कर सजा बढ़ाने का फैसला लेता है, तो यह दोषियों के लिए बड़ा कानूनी झटका होगा। उत्तरदाताओं को अब कोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी सजा को क्यों न बढ़ाया जाए।

प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस नोटिस के बाद हलचल तेज हो गई है। ‘ट्रुथ इंडिया टाइम्स’ इस मामले की पल-पल की कानूनी कार्यवाही पर नजर बनाए हुए है।

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